MCQ संस्कृत Chapter 11 Sanskrit शारदा Class 9 Sharada CBSE Advertisement वर्णोच्चारण – शिक्षा २ 1. वर्णानाम् उत्पत्त्यर्थं कति तत्त्वानि आवश्यकानि?(वर्णों की उत्पत्ति के लिए कितने तत्त्व आवश्यक हैं?)द्वे (दो)त्रीणि (तीन)चत्वारि (चार)पञ्च (पाँच)Question 1 of 192. स्थानानि कति सन्ति?(स्थान कितने हैं?)पञ्च (पाँच)सप्त (सात)षट् (छः)अष्ट (आठ)Question 2 of 193. करणानि कति सन्ति?(करण कितने हैं?)षट् (छः)पञ्च (पाँच)चत्वारि (चार)त्रीणि (तीन)Question 3 of 194. आभ्यन्तर-प्रयत्नः कतिविधः भवति?(आभ्यन्तर-प्रयत्न कितने प्रकार का होता है?)द्विविधः (दो प्रकार)त्रिविधः (तीन प्रकार)चतुर्विधः (चार प्रकार)पञ्चविधः (पाँच प्रकार)Question 4 of 195. 'आभ्यन्तर-प्रयत्नः' इत्यस्य अर्थः कः?('आभ्यन्तर-प्रयत्न' का अर्थ क्या है?)बाह्यः प्रयत्नः (बाहरी प्रयत्न)आस्यस्य अभ्यन्तरे करणस्य स्थानं प्रति प्रयुक्तं बलम् (मुख के अन्दर करण का स्थान की ओर प्रयुक्त बल)नासिकायाः प्रयत्नः (नासिका का प्रयत्न)जिह्वायाः प्रयत्नः (जीभ का प्रयत्न)Question 5 of 196. स्पृष्ट-प्रयत्नः कदा भवति?(स्पृष्ट-प्रयत्न कब होता है?)करणं यदा स्थानं न स्पृशति (जब करण स्थान को नहीं स्पर्श करता)करणं यदा स्थानं स्पष्टरूपेण स्पृशति (जब करण स्थान को स्पष्टरूप से स्पर्श करता है)करणं यदा स्वल्पं स्पृशति (जब करण थोड़ा स्पर्श करता है)करणं यदा दूरं याति (जब करण दूर जाता है)Question 6 of 197. स्पृष्ट-प्रयत्नेन के वर्णाः उत्पद्यन्ते?(स्पृष्ट-प्रयत्न से कौन-से वर्ण उत्पन्न होते हैं?)स्वराः (स्वर)ऊष्म-व्यञ्जनानि (ऊष्म व्यञ्जन)स्पर्श-व्यञ्जनानि (स्पर्श व्यञ्जन)अन्तःस्थ-व्यञ्जनानि (अन्तःस्थ व्यञ्जन)Question 7 of 198. ईषत्-स्पृष्ट-प्रयत्नः कदा भवति?(ईषत्-स्पृष्ट-प्रयत्न कब होता है?)करणं यदा स्थानं स्पष्टरूपेण स्पृशति (जब स्पष्ट स्पर्श हो)करणं यदा स्वल्पम् एव स्पृशति (जब करण थोड़ा ही स्पर्श करता है)करणं यदा न स्पृशति (जब स्पर्श न हो)करणं यदा दूरं याति (जब करण दूर जाता है)Question 8 of 199. ईषत्-स्पृष्ट-प्रयत्नेन के वर्णाः जायन्ते?(ईषत्-स्पृष्ट-प्रयत्न से कौन-से वर्ण होते हैं?)स्वराः (स्वर)स्पर्शाः (स्पर्श)अन्तःस्थ-व्यञ्जनानि (अन्तःस्थ व्यञ्जन)ऊष्माणः (ऊष्म)Question 9 of 1910. ईषद्-विवृत-प्रयत्नः कदा भवति?(ईषद्-विवृत-प्रयत्न कब होता है?)करणं स्थानं स्पष्टं स्पृशति (स्पष्ट स्पर्श हो)करणं स्थानं न स्पृशति परन्तु बहु समीपं याति (करण स्पर्श नहीं करता पर बहुत पास जाता है)करणं स्थानात् दूरं याति (करण दूर जाता है)करणं संकुचितं भवति (करण सिकुड़ता है)Question 10 of 1911. ईषद्-विवृत-प्रयत्नेन के वर्णाः जायन्ते?(ईषद्-विवृत-प्रयत्न से कौन-से वर्ण होते हैं?)स्पर्शाः (स्पर्श)स्वराः (स्वर)ऊष्म-व्यञ्जनानि तथा अयोगवाहौ (ऊष्म व्यञ्जन और अयोगवाह)अन्तःस्थाः (अन्तःस्थ)Question 11 of 1912. विवृत-प्रयत्नः कदा भवति?(विवृत-प्रयत्न कब होता है?)करणं स्थानं स्पष्टं स्पृशति (स्पष्ट स्पर्श हो)करणं स्थानं न स्पृशति, किञ्चित् समीपं याति (करण स्पर्श नहीं करता, थोड़ा पास जाता है)करणं संकुचितं भवति (करण सिकुड़ता है)करणं स्वल्पं स्पृशति (थोड़ा स्पर्श हो)Question 12 of 1913. विवृत-प्रयत्नेन के वर्णाः उच्चार्यन्ते?(विवृत-प्रयत्न से कौन-से वर्ण उच्चारित होते हैं?)अ-कारः (अ-कार)अ-कारं विहाय अन्ये सर्वे स्वराः (अ-कार को छोड़कर सब स्वर)स्पर्शाः (स्पर्श)ऊष्माणः (ऊष्म)Question 13 of 1914. संवृत-प्रयत्नः केवलं कस्य वर्णस्य उच्चारणे भवति?(संवृत-प्रयत्न केवल किस वर्ण के उच्चारण में होता है?)आ-कारस्य (आ-कार का)इ-कारस्य (इ-कार का)अ-कारस्य ह्रस्वस्य (ह्रस्व अ-कार का)उ-कारस्य (उ-कार का)Question 14 of 1915. संवृत-प्रयत्नः कुत्र भवति?(संवृत-प्रयत्न कहाँ होता है?)तालौ (तालु में)दन्तेषु (दाँतों में)ओष्ठे (ओठ में)केवलं कण्ठ-स्थाने (केवल कण्ठ-स्थान में)Question 15 of 1916. अ-कारस्य उच्चारणे कण्ठे किं भवति?(अ-कार के उच्चारण में कण्ठ में क्या होता है?)विस्तारः (विस्तार)संकोचः (संकोच / सिकुड़ना)स्पर्शः (स्पर्श)विवरः (अन्तराल)Question 16 of 1917. 'संवृतम्' इत्यस्य अर्थः कः?('संवृत' का अर्थ क्या है?)उद्घाटितः (खुला हुआ)विस्तृतः (फैला हुआ)संकीर्णता / संकोचः (सिकुड़ा हुआ)स्पृष्टः (स्पर्श किया हुआ)Question 17 of 1918. प्रयत्नः कतिविधः भवति (पाणिनीय-शिक्षानुसारम्)?(पाणिनीय-शिक्षा के अनुसार प्रयत्न कितने प्रकार का है?)स्पृष्टः, ईषत्-स्पृष्टः (स्पृष्ट और ईषत्-स्पृष्ट)आभ्यन्तरः, बाह्यः (आभ्यन्तर और बाह्य)विवृतः, संवृतः (विवृत और संवृत)स्वरः, व्यञ्जनम् (स्वर और व्यञ्जन)Question 18 of 1919. 'विवरः' इत्यस्य अर्थः कः?('विवर' का अर्थ क्या है?)स्पर्शः (स्पर्श)संकोचः (संकोच)छिद्रः / अन्तरालः (अन्तराल / छेद)बलम् (बल)Question 19 of 19 Loading...
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