लघु प्रश्नाः — Short Questions
१. क्रिया का कथ्यते ?
हिन्दी: क्रिया किसे कहते हैं?
उत्तरम्: यस्य शब्दस्य द्वारा कार्यस्य करणस्य वा बोधः भवति, सा क्रिया कथ्यते।
हिन्दी: जिस शब्द से कार्य के करने या होने का बोध हो, उसे क्रिया कहते हैं।
२. धातुः का कथ्यते ?
हिन्दी: धातु किसे कहते हैं?
उत्तरम्: क्रियापदस्य मूलरूपं धातुः कथ्यते।
हिन्दी: क्रियापद के मूल रूप को धातु कहते हैं।
३. धातूनां गणाः कतिः सन्ति ?
हिन्दी: धातुओं के गण कितने हैं?
उत्तरम्: धातूनां दश गणाः सन्ति।
हिन्दी: धातुओं के दस गण होते हैं।
४. परस्मैपदी धातुः का ?
हिन्दी: परस्मैपदी धातु क्या है?
उत्तरम्: यस्य वर्तमानकाले ति, तः, अन्ति इत्यादयः रूपाणि भवन्ति, सा परस्मैपदी धातुः।
हिन्दी: जिसके वर्तमानकाल में ति, तः, अन्ति आदि रूप होते हैं, वह परस्मैपदी धातु है।
५. आत्मनेपदी धातुः का ?
हिन्दी: आत्मनेपदी धातु क्या है?
उत्तरम्: यस्य वर्तमानकाले ते, इते, अन्ते इत्यादयः रूपाणि भवन्ति, सा आत्मनेपदी धातुः।
हिन्दी: जिसके वर्तमानकाल में ते, इते, अन्ते आदि रूप होते हैं, वह आत्मनेपदी धातु है।
६. लकाराः कतिः सन्ति ?
हिन्दी: लकार कितने होते हैं?
उत्तरम्: संस्कृतव्याकरणे दश लकाराः सन्ति।
हिन्दी: संस्कृत व्याकरण में दस लकार होते हैं।
मध्यम प्रश्नाः — Medium Questions
१. लट् लकारस्य प्रयोगः कुत्र भवति ?
हिन्दी: लट् लकार का प्रयोग कहाँ होता है?
उत्तरम्: वर्तमानकालस्य बोधाय लट् लकारस्य प्रयोगः भवति।
हिन्दी: वर्तमानकाल के बोध के लिए लट् लकार का प्रयोग होता है।
२. लङ् लकारस्य प्रयोगः किमर्थं भवति ?
हिन्दी: लङ् लकार का प्रयोग किसलिए होता है?
उत्तरम्: भूतकालस्य बोधाय लङ् लकारस्य प्रयोगः भवति।
हिन्दी: भूतकाल के बोध के लिए लङ् लकार का प्रयोग होता है।
३. लृट् लकारस्य प्रयोगः किमर्थं भवति ?
हिन्दी: लृट् लकार का प्रयोग किसलिए होता है?
उत्तरम्: भविष्यत्कालस्य बोधाय लृट् लकारस्य प्रयोगः भवति।
हिन्दी: भविष्यकाल के बोध के लिए लृट् लकार का प्रयोग होता है।
४. लोट् लकारः कदा प्रयुज्यते ?
हिन्दी: लोट् लकार कब प्रयुक्त होता है?
उत्तरम्: आज्ञायाः बोधाय लोट् लकारः प्रयुज्यते।
हिन्दी: आज्ञा के बोध के लिए लोट् लकार प्रयुक्त होता है।
५. विधिलिङ् कदा प्रयुज्यते ?
हिन्दी: विधिलिङ् कब प्रयुक्त होता है?
उत्तरम्: चाहिए, करे इत्यादि भावेषु विधिलिङ् प्रयुज्यते।
हिन्दी: चाहिए, करे आदि भावों में विधिलिङ् प्रयुक्त होता है।
६. उभयपदी धातुः का कथ्यते ?
हिन्दी: उभयपदी धातु किसे कहते हैं?
उत्तरम्: यस्य धातोः परस्मैपदे आत्मनेपदे च रूपाणि भवन्ति, सा उभयपदी धातुः।
हिन्दी: जिस धातु के परस्मैपद और आत्मनेपद दोनों रूप होते हैं, वह उभयपदी धातु कहलाती है।
दीर्घ प्रश्नाः — Long Questions
१. क्रियायाः परिभाषां लिखित्वा धातोः परिचयं ददातु।
हिन्दी: क्रिया की परिभाषा लिखकर धातु का परिचय दीजिए।
उत्तरम्: यस्य शब्दस्य द्वारा कार्यस्य करणस्य वा बोधः भवति, सा क्रिया कथ्यते। क्रियापदस्य मूलरूपं धातुः कथ्यते। धातोः आधारात् विविधानि क्रियारूपाणि भवन्ति।
हिन्दी: जिस शब्द से कार्य के करने या होने का बोध हो, उसे क्रिया कहते हैं। क्रियापद के मूल रूप को धातु कहते हैं। धातु के आधार पर विभिन्न क्रिया रूप बनते हैं।
२. धातूनां गणानां विषये लिखत।
हिन्दी: धातुओं के गणों के विषय में लिखिए।
उत्तरम्: संस्कृतभाषायां धातूनां दश गणाः सन्ति। ते सन्ति— भ्वादिगणः, अदादिगणः, जुहोत्यादिगणः, दिवादिगणः, स्वादिगणः, रुधादिगणः, तुदादिगणः, तनादिगणः, क्र्यादिगणः, चुरादिगणः।
हिन्दी: संस्कृत भाषा में धातुओं के दस गण होते हैं। वे हैं— भ्वादिगण, अदादिगण, जुहोत्यादिगण, दिवादिगण, स्वादिगण, रुधादिगण, तुदादिगण, तनादिगण, क्र्यादिगण, चुरादिगण।
३. परस्मैपदी, आत्मनेपदी, उभयपदी धातूनां विवेचनं कुरुत।
हिन्दी: परस्मैपदी, आत्मनेपदी और उभयपदी धातुओं का वर्णन कीजिए।
उत्तरम्: यासां धातूनां ति, तः, अन्ति इत्यादयः रूपाणि भवन्ति, ताः परस्मैपदी धातवः। यासां ते, इते, अन्ते इत्यादयः रूपाणि भवन्ति, ताः आत्मनेपदी धातवः। यासां उभयत्र रूपाणि भवन्ति, ताः उभयपदी धातवः।
हिन्दी: जिन धातुओं के ति, तः, अन्ति आदि रूप होते हैं, वे परस्मैपदी धातुएँ हैं। जिनके ते, इते, अन्ते आदि रूप होते हैं, वे आत्मनेपदी धातुएँ हैं। जिनके दोनों प्रकार के रूप होते हैं, वे उभयपदी धातुएँ हैं।
४. लकाराणां महत्त्वं लिखित्वा पञ्च लकाराणि वर्णयत।
हिन्दी: लकारों का महत्व लिखकर पाँच लकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तरम्: कालस्य भावस्य च बोधाय लकाराः प्रयुज्यन्ते। लट् वर्तमानकाले, लङ् भूतकाले, लृट् भविष्यत्काले, लोट् आज्ञायाम्, विधिलिङ् विध्यर्थे प्रयुज्यते।
हिन्दी: काल और भाव के बोध के लिए लकार प्रयुक्त होते हैं। लट् वर्तमानकाल में, लङ् भूतकाल में, लृट् भविष्यकाल में, लोट् आज्ञा में और विधिलिङ् विधि अर्थ में प्रयुक्त होता है।
५. लट् लकारस्य उदाहरणैः सह वर्णनं कुरुत।
हिन्दी: लट् लकार का उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।
उत्तरम्: वर्तमानकाले क्रियायाः बोधाय लट् लकारः भवति। यथा— रामः पाठं पठति। छात्रः गुरुम् सेवते। अत्र पठति, सेवते इति लट् लकारस्य रूपे स्तः।
हिन्दी: वर्तमानकाल में क्रिया के बोध के लिए लट् लकार होता है। जैसे— राम पाठ पढ़ता है। छात्र गुरु की सेवा करता है। यहाँ पठति, सेवते लट् लकार के रूप हैं।
६. विधिलिङ् तथा लोट् लकारयोः भेदं लिखत।
हिन्दी: विधिलिङ् और लोट् लकार का अंतर लिखिए।
उत्तरम्: आज्ञार्थे लोट् लकारः प्रयुज्यते, यथा— गच्छतु। इच्छायां, कर्तव्ये, उचितभावे च विधिलिङ् प्रयुज्यते, यथा— पठेत्। अतः उभयोः प्रयोगः भिन्नः अस्ति।
हिन्दी: आज्ञा के अर्थ में लोट् लकार प्रयुक्त होता है, जैसे— गच्छतु। इच्छा, कर्तव्य या उचित भाव में विधिलिङ् प्रयुक्त होता है, जैसे— पठेत्। इसलिए दोनों का प्रयोग भिन्न है।

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