1. प्रस्तावना
संस्कृत
यः शब्दः कस्यचित् कार्यस्य करणं, भवितुं वा बोधयति, सः क्रिया कथ्यते। क्रियापदस्य मूलरूपं धातुः कथ्यते।
उदाहरणम्
रामः पुस्तकं पठति।
अत्र पठति इति क्रियापदम् अस्ति, तस्य मूलधातुः पठ् अस्ति।
हिन्दी अनुवाद
जो शब्द किसी कार्य के करने या होने का बोध कराए, उसे क्रिया कहते हैं। क्रियापद के मूल रूप को धातु कहते हैं।
उदाहरण— राम पुस्तक पढ़ता है। यहाँ पठति क्रिया है और उसका मूल रूप पठ् धातु है।
2. धातूनां गणाः
संस्कृत
संस्कृतभाषायां धातवः दशसु गणेषु विभक्ताः सन्ति।
- भ्वादिगणः
- अदादिगणः
- जुहोत्यादिगणः
- दिवादिगणः
- स्वादिगणः
- रुधादिगणः
- तुदादिगणः
- तनादिगणः
- क्र्यादिगणः
- चुरादिगणः
हिन्दी अनुवाद
संस्कृत में धातुओं को दस गणों में बाँटा गया है।
3. पदभेदाः
संस्कृत
धातवः त्रिविधाः भवन्ति—
- परस्मैपदी
- आत्मनेपदी
- उभयपदी
हिन्दी अनुवाद
धातु तीन प्रकार की होती हैं—
- परस्मैपदी
- आत्मनेपदी
- उभयपदी
4. परस्मैपदी धातुः
संस्कृत
यासां धातूनां रूपाणि ति, तः, अन्ति इत्यादीनि भवन्ति, ताः परस्मैपदिधातवः।
उदाहरणानि
पठति, गच्छति, लिखति।
हिन्दी अनुवाद
जिन धातुओं के रूप ति, तः, अन्ति आदि होते हैं, वे परस्मैपदी कहलाती हैं।
5. आत्मनेपदी धातुः
संस्कृत
यासां धातूनां रूपाणि ते, इते, अन्ते इत्यादीनि भवन्ति, ताः आत्मनेपदिधातवः।
उदाहरणानि
सेवते, सेवेते, सेवन्ते।
हिन्दी अनुवाद
जिन धातुओं के रूप ते, इते, अन्ते आदि होते हैं, वे आत्मनेपदी कहलाती हैं।
6. उभयपदी धातुः
संस्कृत
याः धातवः परस्मैपदे आत्मनेपदे च उभयत्र प्रयुज्यन्ते, ताः उभयपदिधातवः।
उदाहरणानि
कृ, पच्, ब्रू।
हिन्दी अनुवाद
जो धातुएँ परस्मैपद और आत्मनेपद दोनों में प्रयुक्त हों, वे उभयपदी कहलाती हैं।
7. लकाराः
संस्कृत
कालभावप्रदर्शनार्थं दश लकाराः भवन्ति। पाठ्यक्रमे प्रमुखाः एते—
- लट्
- लङ्
- लृट्
- लोट्
- विधिलिङ्
हिन्दी अनुवाद
काल और भाव प्रकट करने के लिए लकार होते हैं। पाठ्यक्रम में मुख्यतः पाँच लकार पढ़े जाते हैं।
8. लट् लकारः (वर्तमानकालः)
संस्कृत
वर्तमानकाले क्रियायाः बोधाय लट् लकारः प्रयुज्यते।
उदाहरणानि
रामः पठति।
छात्रः लिखति।
हिन्दी अनुवाद
वर्तमान काल बताने के लिए लट् लकार का प्रयोग होता है।
9. लङ् लकारः (भूतकालः)
संस्कृत
भूतकाले क्रियायाः बोधाय लङ् लकारः प्रयुज्यते।
उदाहरणानि
रामः अपठत्।
सः अगच्छत्।
हिन्दी अनुवाद
बीते हुए समय का बोध कराने के लिए लङ् लकार होता है।
10. लृट् लकारः (भविष्यत्कालः)
संस्कृत
भविष्यत्काले क्रियायाः बोधाय लृट् लकारः प्रयुज्यते।
उदाहरणानि
रामः पठिष्यति।
सः गमिष्यति।
हिन्दी अनुवाद
भविष्य काल बताने के लिए लृट् लकार का प्रयोग होता है।
11. लोट् लकारः (आज्ञार्थः)
संस्कृत
आज्ञा, प्रार्थना, आदेशार्थं लोट् लकारः प्रयुज्यते।
उदाहरणानि
त्वं पठ।
भवान् गच्छतु।
हिन्दी अनुवाद
आज्ञा या आदेश देने के लिए लोट् लकार का प्रयोग होता है।
12. विधिलिङ्
संस्कृत
इच्छा, कर्तव्य, चाहिए इत्यर्थे विधिलिङ् प्रयुज्यते।
उदाहरणानि
सः पठेत्।
त्वं लिखेः।
हिन्दी अनुवाद
चाहिए, करे, करना चाहिए आदि अर्थों में विधिलिङ् का प्रयोग होता है।
13. परस्मैपदी प्रत्ययाः (लट् लकारे)
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथम | ति | तः | अन्ति |
| मध्यम | सि | थः | थ |
| उत्तम | मि | वः | मः |
हिन्दी अनुवाद
ये परस्मैपदी धातुओं के वर्तमानकाल के प्रत्यय हैं।
14. आत्मनेपदी प्रत्ययाः (लट् लकारे)
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथम | ते | इते | अन्ते |
| मध्यम | से | इथे | ध्वे |
| उत्तम | ए | वहे | महे |
15. पठ् धातोः रूपाणि (लट् लकारः)
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथम | पठति | पठतः | पठन्ति |
| मध्यम | पठसि | पठथः | पठथ |
| उत्तम | पठामि | पठावः | पठामः |
हिन्दी अनुवाद
यह पठ् धातु के वर्तमानकाल के रूप हैं।
16. सेव् धातोः रूपाणि (लट् लकारः)
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथम | सेवते | सेवेते | सेवन्ते |
| मध्यम | सेवसे | सेवेथे | सेवध्वे |
| उत्तम | सेवे | सेवावहे | सेवामहे |
17. स्मरणीय बिन्दवः
संस्कृत
- क्रियायाः मूलरूपं धातुः।
- धातवः दशगणेषु विभक्ताः।
- धातवः त्रिविधाः भवन्ति।
- लट् वर्तमानकालः।
- लङ् भूतकालः।
- लृट् भविष्यत्कालः।
- लोट् आज्ञार्थकः।
- विधिलिङ् कर्तव्यबोधकः।
हिन्दी अनुवाद
- क्रिया का मूल रूप धातु है।
- धातुएँ दस गणों में बाँटी गई हैं।
- धातुएँ तीन प्रकार की होती हैं।
- लट् = वर्तमान काल
- लङ् = भूतकाल
- लृट् = भविष्यकाल
- लोट् = आज्ञा
- विधिलिङ् = चाहिए

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