अभ्यासकार्यम्
प्र. 1. कोष्ठकेषु मूलशब्दाः प्रदत्ताः। तेषु उचितविभक्तीः योजयित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत—
| क्र.सं. | पूर्ण संस्कृत वाक्य | हिंदी अर्थ (Hindi Meaning) |
| i) | बालका: अम्बाम् पृच्छन्ति। | बालक माता से पूछते हैं। |
| ii) | नास्ति क्रोधात् सम: शत्रु:। | क्रोध के समान (कोई) शत्रु नहीं है। |
| iii) | चौरात् भीतः बालक: क्रन्दति। | चोर से डरा हुआ बालक रोता है। |
| iv) | शिष्या: गुरोः विद्यां गृह्णन्ति। | शिष्य गुरु से विद्या ग्रहण करते हैं। |
| v) | अहम् अध्यापकात् प्राक् आगमिष्यामि। | मैं अध्यापक से पहले आऊँगा। |
| vi) | अस्माकं बालिका: गायने कुशला: सन्ति। | हमारी बालिकाएँ गायन में कुशल हैं। |
| vii) | माता शिशवे स्निह्यति। | माता शिशु से स्नेह करती है। |
| viii) | कामात् क्रोध: जायते। | काम (इच्छा) से क्रोध उत्पन्न होता है। |
| ix) | सरस्वत्यै नम:। | सरस्वती जी को नमस्कार है। |
| x) | अलम् विवादेन। | विवाद (झगड़ा) बस करो/मत करो। |
| xi) | भिक्षुक: भिक्षाम् याचते। | भिखारी भिक्षा माँगता है। |
| xii) | धिक् देशस्य शत्रुम्। | देश के शत्रु को धिक्कार है। |
| xiii) | वीर: धर्मयुद्धात् न विरमति। | वीर धर्मयुद्ध से पीछे नहीं हटता। |
| xiv) | दुर्योधन: पाण्डवान् जगुप्सति स्म। | दुर्योधन पाण्डवों से घृणा करता था। |
| xv) | भ्रातृषु अर्जुन: श्रेष्ठ: धनुर्धर:। | भाइयों में अर्जुन श्रेष्ठ धनुर्धर हैं। |
| xvi) | पितरौ अस्मभ्यम् सर्वस्वं यच्छत:। | माता-पिता हमें (हमारे लिए) सब कुछ देते हैं। |
| xvii) | किम् युष्मभ्यम् एतत् गीतं रोचते? | क्या तुम्हें यह गीत अच्छा लगता है? |
| xviii) | पृथिवीं परित: वायुमण्डलम् अस्ति। | पृथ्वी के चारों ओर वायुमंडल है। |
| xix) | कक्षायाः बहिः छात्रा: कोलाहलं कुर्वन्ति? | कक्षा के बाहर छात्र शोर कर रहे हैं? |
| xx) | अहम् शयनात् पूर्वं ईश्वरम् वन्दे। | मैं सोने से पहले ईश्वर की वंदना करता हूँ। |
| xxi) | परिश्रमिण: सफलतायै स्पृहयन्ति। | परिश्रमी लोग सफलता की इच्छा करते हैं। |
| xxii) | वाल्मीकि: रामायणस्य रचयिता। | वाल्मीकि रामायण के रचयिता हैं। |
| xxiii) | पङ्कजैः विभाति सर:। | तालाब कमलों से सुशोभित होता है। |
प्र. 2. कोष्ठकेभ्य: शुद्धम् उत्तरं चित्वा रिक्तस्थानपूर्तिं कुरुत—
i) ……………… सह सीता वनम् अगच्छत्। (रामस्य/रामेण)
उत्तर: रामेण सह सीता वनम् अगच्छत्।
(राम के साथ सीता वन गईं।)
ii) माता ……………… स्निह्यति। (माम/मयि)
उत्तर: माता मयि स्निह्यति।
(माता मुझसे स्नेह करती हैं।)
iii) ……………… मोदकं रोचते। (मोहनम्/मोहनाय)
उत्तर: मोहनाय मोदकं रोचते।
(मोहन को लड्डू अच्छा लगता है।)
iv) स: ……………… धनं ददाति। (रमेशम्/रमेशाय)
उत्तर: स: रमेशाय धनं ददाति।
(वह रमेश को धन देता है।)
v) ……………… पत्राणि पतन्ति। (वृक्षेण/वृक्षात्)
उत्तर: वृक्षात् पत्राणि पतन्ति।
(वृक्ष से पत्ते गिरते हैं।)
vi) अध्यापिका ……………… पुस्तकं यच्छति। (सुलेखाम्/सुलेखायै)
उत्तर: अध्यापिका सुलेखायै पुस्तकं यच्छति।
(अध्यापिका सुलेखा को पुस्तक देती हैं।)
vii) ……………… परित: वृक्षा: सन्ति। (विद्यालयम्/विद्यालयस्य)
उत्तर: विद्यालयम् परित: वृक्षा: सन्ति।
(विद्यालय के चारों ओर वृक्ष हैं।)
viii) ……………… नम:। (गुरवे/गुरुम्)
उत्तर: गुरवे नम:।
(गुरु को नमस्कार है।)
प्र. 3. अधोलिखितवाक्येषु रेखाङ्कितपदेषु प्रयुक्तां विभक्तिं कारणं च लिखत-
(निम्नलिखित वाक्यों में रेखांकित पदों में प्रयुक्त विभक्ति और उसका कारण लिखिए)
i) समम् — राम: सीतया समं गच्छति। (राम सीता के साथ जाता है।)
ii) धिक् — धिक् दुष्टम्। (दुष्ट को धिक्कार है।)
iii) उभयत: — मार्गम् उभयत: वृक्षा: सन्ति। (मार्ग के दोनों ओर वृक्ष हैं।)
iv) विना — जलं विना जीवनं नास्ति। (जल के बिना जीवन नहीं है।)
v) अन्ध: — स: नेत्रेण अन्ध: अस्ति। (वह आँख से अंधा है।)
vi) बहिः — गृहात् बहिः बालक: क्रीडति। (घर से बाहर बालक खेलता है।)
vii) प्रवीण: — स: गीतायां प्रवीण: अस्ति। (वह गीता में निपुण/कुशल है।)
viii) अलम् — अलं विवादेन। (विवाद (झगड़ा) मत करो।)
ix) विभेति — बालक: सर्पात् विभेति। (बालक साँप से डरता है।)
x) श्रेष्ठ: — अर्जुन: वीराणां श्रेष्ठ:। (अर्जुन वीरों में श्रेष्ठ है।)
प्र. 4. ‘क’ स्तम्भे शब्दा: दत्ता: सन्ति, ‘ख’ स्तम्भे च विभक्तय:। कस्य योगे का विभक्ति: प्रयुज्यते इति योजयित्वा लिखत—
(‘क’ स्तम्भ में शब्द दिए गए हैं और ‘ख’ स्तम्भ में विभक्तियाँ। किसके योग में कौन सी विभक्ति प्रयोग की जाती है, मिलान करके लिखिए—)
‘क’ ‘ख
i) ‘रुच्’ धातुयोगे: ‘रुच्’ (अच्छा लगना) धातु के योग में — चतुर्थी
ii) ‘सह’ शब्दयोगे: ‘सह’ (साथ) शब्द के योग में — तृतीया
iii) ‘नमः’ शब्दयोगे: ‘नमः’ (नमस्कार) शब्द के योग में — चतुर्थी
iv) ‘भी’ ‘त्रा’ धातुयोगे: ‘भी’ (डरना) और ‘त्रा’ (रक्षा करना) धातु के योग में — पञ्चमी
v) ‘दा’ धातुयोगे: ‘दा’ (देना) धातु के योग में — चतुर्थी
vi) कर्तृवाच्यस्य कर्तरि: कर्तृवाच्य (Active Voice) के कर्ता में — प्रथमा
vii) कर्मवाच्यस्य कर्तरि: कर्मवाच्य (Passive Voice) के कर्ता में — तृतीया
viii) ‘विना’ योगे: ‘विना’ के योग में — द्वितीया/तृतीया/पञ्चमी
ix) यस्मिन् अङ्गे विकार: जिस अंग में विकार (दोष) हो — तृतीया
x) कर्मवाच्यस्य कर्मणि: कर्मवाच्य के कर्म में — प्रथमा
प्र. 5. ‘स्थूलपदानां’ स्थाने शुद्धपदं लिखत—
i) अध्यापिकाया: परित: छात्रा: सन्ति।
उत्तर: (यथावत् सही)
(अध्यापिका के चारों ओर छात्र हैं।)
ii) छात्र: आचार्याय प्रश्नं पृच्छति।
उत्तर: छात्र: आचार्यं प्रश्नं पृच्छति।
(छात्र आचार्य से प्रश्न पूछता है।)
iii) सीता लेखन्या लेखं लिखति।
उत्तर: सीता लेखन्या लेखं लिखति।
(सीता कलम से लेख लिखती है।)
iv) गोपाल: शिवस्य सह वार्तां करोति।
उत्तर: गोपाल: शिवेन सह वार्तां करोति।
(गोपाल शिव के साथ बातचीत करता है।)
v) चौरा: आरक्षिणा विभ्यति।
उत्तर: चौरा: आरक्षिभ्यः विभ्यति।
(चोर सिपाही से डरते हैं।)
vi) महापुरुषम् नम:।
उत्तर: महापुरुषाय नमः।
(महापुरुष को नमस्कार है।)
vii) त्वाम् किम् रोचते?
उत्तर: तुभ्यम् किम् रोचते?
(तुम्हें क्या अच्छा लगता है?)
viii) कवये कालिदास: श्रेष्ठ:।
उत्तर: कविषु कालिदास: श्रेष्ठ:।
(कवियों में कालिदास श्रेष्ठ हैं।)
ix) सा गृहकर्मण: निपुण:।
उत्तर: सा गृहकर्मणि निपुणा।
(वह घर के काम में कुशल है।)
x) अहम् रेलयानात् कालिकातां गमिष्यामि।
उत्तर: अहम् रेलयानेन कालिकातां गमिष्यामि।
(मैं रेलगाड़ी से कोलकाता जाऊँगा।)

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