अभ्यासकार्यम्
प्र. 1 अधोलिखितपदेभ्यः आगमवर्णान्, आदेशवर्णान् वा स्पष्टीकृत्य पृथक् कुरुत-
(निम्नलिखित शब्दों से आगम (जोड़ा गया वर्ण) तथा आदेश (बदला हुआ वर्ण) को स्पष्ट करके अलग-अलग कीजिए।)
यथा- वृक्ष + छाया – वृक्षच्छाया (वृक्ष की छाँव) – च् (आगमः)
यदि+ अपि – यद्यपि (यद्यपि) – य् (आदेश:)
i) इति + आदि → इत्यादि (इत्यादि) → य् (आदेशः)
ii) तरु + छाया → तरुच्छाया (वृक्ष की छाया) → च् (आगमः)
iii) अनु + छेदः → अनुच्छेदः (अनुच्छेद) → च् (आगमः)
iv) अनु + इच्छति → अन्विच्छति (इच्छा करता है)→ व् (आदेशः)
प्र. 2 अधोलिखिततालिकातः पदसंज्ञकपदानि पृथक् कृत्वा लिखत-
(निम्नलिखित तालिका से पद-संज्ञा वाले शब्दों को अलग करके लिखिए।)
स:, पठति, हरि, दृश्, हसामि, चल्, मुनी, चलति, ते
✔ सही पदसंज्ञक शब्द:
स: (सुप् प्रत्यय) – वह (पुल्लिंग)
पठति (तिङ् प्रत्यय) – पढ़ता है
हसामि (तिङ् प्रत्यय) – मैं हँसता हूँ
चलति (तिङ् प्रत्यय) – चलता है
ते (सुप् प्रत्यय) – वे सब
मुनी (सुप् प्रत्यय – द्विवचन) – दो मुनि
❌ पद नहीं हैं: (इनमें प्रत्यय नहीं है)
हरि – भगवान विष्णु
दृश् – देखना
चल् – चलना
प्र. 3. अधोलिखिततालिकायां प्रदत्तपदेषु संयोगस्य उदाहरणानि पृथक् कृत्वा लिखत-
(निम्नलिखित तालिका में दिए गए शब्दों में संयोग (व्यंजन संयोग) के उदाहरणों को अलग करके लिखिए।)
महेश:, उष्ण:, वागीश:, महत्त्वम्, सज्जन:, क्लेश:, पावक:
✔ संयोग वाले शब्द:
उष्ण: (गर्म) – (ष् + ण)
महत्त्वम् (जरूरी होना) – (त् + त्)
सज्जन: (अच्छा व्यक्ति) – (ज् + ज)
क्लेश: (दुःख) – (क् + ल)
❌ संयोग नहीं है:
महेश: (महेश)
वागीश: (सरस्वती का स्वामी)
पावक: (आग)

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