अभ्यासकार्यम्
प्र. 1. कोष्ठके प्रदत्तपदानां समुचितविभक्तिप्रयोगेण वाक्यानि पूरयत —
(कोष्ठक में दिए गए शब्दों के उचित विभक्ति प्रयोग से वाक्य पूरे कीजिए:)
i) गङ्गायाः जलं पवित्रं वर्तते। (गङ्गा, षष्ठी, एकवचन)
(गंगा का जल पवित्र है।)
ii) बालिकाभिः इदं कार्यं कृतम्। (बालिका, तृतीया, बहुवचन)
(बालिकाओं के द्वारा यह कार्य किया गया।)
iii) गगने प्रातः भानुः उदेति। (गगन, सप्तमी, एकवचन)
(आकाश में सुबह सूरज उगता है।)
iv) धेनोः दुग्धं मधुरं भवति। (धेनु, षष्ठी, एकवचन)
(वह नदी को नाव से पार करता है।)
v) नदीं नौकया तरति। (नदी, द्वितीया, एकवचन)
(गंगा का जल पवित्र है।)
vi) विदुषाम् वचांसि सम्माननीयानि। (विद्वस्, षष्ठी, बहुवचन)
(विद्वानों के वचन सम्मान के योग्य होते हैं।)
vii) सः भवन्तम् उपगम्य किं करोति? (भवत्, पुँल्लिङ्ग, द्वितीया, एकवचन)
(वह आपके पास आकर क्या करता है?)
viii) गच्छता बालकेन पुष्पं त्रोटितम्। (गच्छत्, तृतीया, एकवचन)
(जाते हुए बालक के द्वारा फूल तोड़ा गया।)
ix) एतेभ्यः बालकेभ्यः आचार्यः पुस्तकानि आनयत्। (एतत् पुंल्लिङ्ग, चतुर्थी, बहुवचन)
(इन बालकों के लिए आचार्य पुस्तकें लाए।)
x) ताः बालिकाः उद्याने क्रीडन्ति। (तत्, स्त्री, प्रथमा, बहुवचन)
(वे बालिकाएँ बगीचे में खेलती हैं।)
प्र. 2. कोष्ठके प्रदत्तपदेभ्यः समुचितं पदं चित्वा वाक्यानि पूरयत –
(कोष्ठक में दिए गए शब्दों में से सही पद चुनकर वाक्य पूरे कीजिए:)
i) वयम् उत्तमकार्याणि कुर्मः। (वयम्/यूयम्/ते)
(हम सब अच्छे कार्य करते हैं।)
ii) भानोः प्रकाशः ग्रीष्मकाले प्रचण्डः। (भानुना/भानो:/भानुम्)
(सूर्य का प्रकाश गर्मी के समय में बहुत तेज होता है।)
iii) चन्द्रमसः शीतलता ग्रीष्मकाले सर्वेभ्यः रोचते। (चन्द्रमसे/चन्द्रमसा / चन्द्रमसः )
(चंद्रमा की शीतलता गर्मी में सबको अच्छी लगती है।)
iv) मधुनि बहवः गुणाः सन्ति। (मधु/मधुने/मधुनि)
(हम सब अच्छे कार्य करते हैं।)
v) मुनयः तपसः फलं लभन्ते। (मुनि: /मुनी/मुनय:)
(शहद में बहुत से गुण होते हैं।)
vi) उत्तमबालकाः मातरम् सेवन्ते। (मातरम्/मात्रे/मातरि)
(मुनिगण तपस्या का फल प्राप्त करते हैं।)
vii) अस्मिन् कार्ये कः क्षमः? (अस्मात् / अस्य / अस्मिन्)
(अच्छे बालक माता की सेवा करते हैं।)
viii) विद्या राजसु शोभते, न हि धनम्। (राज्ञ:/राजसु/राज्ञाम्)
(विद्या राजाओं में सुशोभित होती है, धन नहीं।)
ix) सर्वान् बालकान् अत्र आह्वय। (सर्वेषाम् / सर्वै: / सर्वान्)
(सभी बालकों को यहाँ बुलाओ।)
x) साधवः सन्मार्गं प्रदर्शयन्ति। (साधुः/साधू/साधवः)
(सज्जन लोग सही रास्ता दिखाते हैं।)

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