अभ्यासकार्यम्
प्र. 1. समुचितैः अव्ययै: (मंजूषात: गृहीत्वा) रिक्तस्थानानि पूरयत-
(उचित अव्ययों द्वारा रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-)
मञ्जूषा
मा (मत), बहि: (बाहर), मुहुर्मुहुः (बार-बार), अन्यथा (नहीं तो), एकदा (एक बार),
शनै: शनै: (धीरे-धीरे), चिरम् (देर तक), नूनम् (निश्चित रूप से), उच्चैः (ज़ोर से), कुत्र (कहाँ)
i) सः एकदा वनं गतवान्। (वह एक बार वन गया था।)
ii) सः कुत्र गच्छति ? (वह कहाँ जाता है)
iii) गजः शनैः, शनैः चलति। (हाथी धीरे-धीरे चलता है।)
iv) सः चिरम् स्वपिति। (वह देर तक सोता है।)
v) सिंहः उच्चैः गर्जति। (शेर ज़ोर से गरजता है।)
vi) सः नूनम् विजेष्यते। (वह निश्चित रूप से जीतेगा।)
vii) परिश्रमं कुरु, अन्यथा अनुत्तीर्णः भविष्यसि। (परिश्रम करो, नहीं तो असफल हो जाओगे।)
viii) गृहात् बहिः मा गच्छ। (घर से बाहर मत जाओ।)
ix) सः मुहुर्मुहुः माम् उद्वेजयति। (वह बार-बार मुझे परेशान करता है।)
x) कोलाहलं मा कुरु। (शोर मत करो।)
प्र. 2. अधोलिखितेषु वाक्येषु अव्ययपदं चित्वा लिखत-
(निम्नलिखित वाक्यों में से अव्यय पद चुनकर लिखिए-)
i) यावत् परीक्षाकाल: नायाति तावत् परिश्रमं कुरु । यावत्, तावत्
(जब तक परीक्षा का समय नहीं आता, तब तक परिश्रम करो।)
ii) अस्माभिः सर्वदा सत्यं वक्तव्यम्। सर्वदा
(हमें हमेशा सच बोलना चाहिए।)
iii) काल: वृथा न यापनीयः । वृथा
(समय व्यर्थ नहीं बिताना चाहिए।)
iv) अहं सम्प्रति गृहं गन्तुम् इच्छामि। सम्प्रति
(मैं अब घर जाना चाहता हूँ।)
v) त्वं कुतः समायातः ? कुतः
(तुम कहाँ से आए हो?)
vi) अहं श्वः ग्रामं गमिष्यामि। श्वः
(मैं कल गाँव जाऊँगा।)
vii) तौ परस्परम् आलपत:। परस्परम्
(वे दोनों आपस में बातचीत करते हैं।)
viii) अद्यप्रभृति अहं धूमपानं न करिष्यामि । अद्यप्रभृति
(आज से मैं धूम्रपान नहीं करूँगा।)
ix) धनं विना जीवनं वृथा भवति । विना, वृथा
(धन के बिना जीवन व्यर्थ होता है।)
X) अथ रामायणकथा आरभ्यते। अथ
(अब रामायण की कथा शुरू होती है।)
प्र. 3. कोष्ठकेभ्यः शुद्धम् अव्ययपदं चित्वा रिक्तस्थानं पूरयत्-
(कोष्ठक से शुद्ध अव्यय चुनकर रिक्त स्थान भरिए-)
i) अहम् श्वः भ्रमणाय गमिष्यामि। (श्व: /ह्यः)
(मैं कल घूमने जाऊँगा।)
ii) त्वम् कस्य पुरतः गच्छसि ? (परित: /पुरतः)
(तुम किसके सामने जा रहे हो?)
iii) विद्यालयम् परितः उद्यानम् अस्ति। (परित: / एव)
(विद्यालय के चारों ओर बगीचा है।)
iv) सः यदा आगमिष्यति तदैव अहं गमिष्यामि। (तदैव / तथैव)
(वह जब आएगा, तभी मैं जाऊँगा।)
v) परिश्रमं कुरु अन्यथा अनुत्तीर्णः भविष्यसि। (सर्वदा / अन्यथा)
(परिश्रम करो नहीं तो असफल हो जाओगे।)
vi) त्वं साम्प्रतम् कुत्र गच्छसि ? (जातु / साम्प्रतम्)
(तुम इस समय कहाँ जा रहे हो?)
vii) यूयम् नूनम् ध्यानेन पठत। (बाढम् / नूनम्)
(तुम सब निश्चित रूप से ध्यान से पढ़ो।)
viii) श्यामः एव पठति श्यामा न। (एव/ विना)
(श्याम ही पढ़ता है, श्यामा नहीं।)
ix) छात्राः पुस्तकम् विना न शोभन्ते। (यदि / विना)
(छात्र पुस्तक के बिना शोभा नहीं देते।)
x) यथा वप्स्यसि तथा फलं प्राप्स्यसि। (तदा / तथा)
(जैसा बोओगे, वैसा फल पाओगे।)

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