अभ्यासकार्यम्
प्र. 1. कोष्ठकात् समुचितैः समस्तपदैः रिक्तस्थानानां पूर्तिं कुरुत-
(कोष्ठक से उचित समस्तपदों द्वारा रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए—)
उदाहरण – तौ लवकुशौ वाल्मीकेः आश्रमे पठत: । (लवकुशे / लवकुशौ)
(वे दोनों, लव और कुश, वाल्मीकि के आश्रम में पढ़ते हैं।)
i) सुप्तोत्थितः जनः नित्यकर्म कृत्वा प्रातराशं करोति। (विशालवृक्षः/ सुप्तोत्थितः)
(सोकर उठा हुआ व्यक्ति नित्यकर्म करके नाश्ता करता है।)
ii) त्रयाणां लोकानां समाहारः त्रिलोकी इति कथ्यते। (त्रिलोकी / त्रिलोकम्)
(तीन लोकों का समूह ‘त्रिलोकी’ कहलाता है।)
iii) ऋषेः आश्रमः उपगङ्गम् अस्ति। (प्रतिगृहम् / उपगङ्गम्)
(ऋषि का आश्रम गंगा के समीप है।)
iv) तव पाणिपादम् मलिनम् अस्ति। (पाणिपादाः / पाणिपादम्)
(तुम्हारे हाथ और पैर गंदे हैं।)
v) सैनिकः अश्वपतितः व्रणयुक्तः जातः। (स्वर्गपतितः / अश्वपतितः)
(सैनिक घोड़े से गिरकर घायल (ज़ख्मी) हो गया।)
vi) धर्मार्थकाममोक्षाः जीवनस्य उद्देश्याः सन्ति। (धर्मार्थकाममोक्षं / धर्मार्थकाममोक्षाः)
(धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष जीवन के उद्देश्य हैं।)
प्र. 2. अधोलिखितवाक्येषु स्थूलपदानि आश्रित्य समस्तपदं विग्रहं वा लिखत-
(मोटे (स्थूल) पदों के आधार पर समस्तपद अथवा विग्रह लिखिए—)
यथा— भिक्षुकः प्रत्येकं गृहं गच्छति।
उत्तरम्: एकम् एकम् इति
i) शरणम् आगतः तु सदैव रक्षणीयः।
उत्तरम्: शरणागतः
(शरण में आया हुआ (शरणागत) तो हमेशा रक्षा के योग्य होता है।)
ii) विद्यया हीनः छात्रः न शोभते।
उत्तरम्: विद्याहीनः
(विद्या से रहित (विद्याहीन) छात्र सुशोभित नहीं होता।)
iii) असत्यं तु त्याज्यं भवति।
उत्तरम्: न सत्यम्
(जो सत्य नहीं है (असत्य), वह तो त्यागने योग्य होता है।)
iv) रामः महाराजः आसीत्।
उत्तरम्: महान् च असौ राजा
(राम महान राजा (महाराज) थे।)
v) सीता च रामः च वनम् अगच्छताम्।
उत्तरम्: सीतारामौ
(सीता और राम (सीताराम) वन गए।)
vi) तडागः नीलोत्पलैः सुशोभते।
उत्तरम्: नीलैः उत्पलैः
(तालाब नीले कमलों (नीलोत्पलों) से सुशोभित होता है।)
प्र. 3. उदाहरणानि पठित्वा तदनुसारं विग्रहं समासनामानि च लिखत—
(दिए गए उदाहरणों का संस्कृत विग्रह और उनका हिंदी अर्थ दिया गया है। यह अभ्यास द्वन्द्व समास के तीन प्रमुख भेदों को समझने के लिए है)
उदाहरण-
पाणी च पादौ च तेषां समाहारः- पाणिपादम् (समाहार द्वन्द्व )
(हाथ और पैर, इन सबका समूह – पाणिपादम् (हाथ-पैर)।)
माता च पिता च इति – मातापितरौ (इतरेतर द्वन्द्व)
(माता और पिता – मातापितरौ (माता-पिता)।)
माता च पिता च इति – पितरौ (एकशेष)
(माता और पिता (जहाँ केवल एक शब्द ‘पितरौ’ शेष बचा है) – माता-पिता।)
| समस्तपदम् | विग्रहः (संस्कृत) | समास का नाम | हिंदी अर्थ (Hindi Meaning) |
| ब्राह्मणौ | ब्राह्मणी च ब्राह्मणश्च | एकशेष द्वन्द्व | ब्राह्मणी और ब्राह्मण। |
| सुखदुःखम् | सुखं च दुःखं च (एतयोः समाहारः) | समाहार द्वन्द्व | सुख और दुःख का समूह। |
| शिरोग्रीवम् | शिरश्च ग्रीवा च (एतयोः समाहारः) | समाहार द्वन्द्व | सिर और गर्दन का समूह। |
| रामलक्ष्मणभरताः | रामश्च लक्ष्मणश्च भरतश्च | इतरेतर द्वन्द्व | राम, लक्ष्मण और भरत। |
| अजौ | अजा च अजश्च | एकशेष द्वन्द्व | बकरी और बकरा। |
| बालकाः | बालकश्च बालकश्च बालकश्च | एकशेष द्वन्द्व | बहुत से बालक (बालक और बालक और बालक)। |
| शास्त्रप्रवीणः | शास्त्रे प्रवीणः | सप्तमी तत्पुरुष | शास्त्र में प्रवीण (निपुण)। |
| नरसिंहः | नरः सिंह इव | कर्मधारय | सिंह के समान पुरुष (नर)। |
| प्रत्यक्षम् | अक्ष्णोः प्रति | अव्ययीभाव | आँखों के सामने। |
| दशाननः | दश आननानि यस्य सः | बहुब्रीहि | दस मुख हैं जिसके वह (रावण)। |
प्र. 4. अधोलिखितवाक्येषु समस्तपदं चित्वा तस्य विग्रहं लिखत-
(दिए गए वाक्यों के समस्तपदों और उनके विग्रहों का संस्कृत के साथ हिंदी अर्थ दिया गया है:)
| क्र.सं. | वाक्य और समस्तपद | विग्रह (संस्कृत) | हिंदी अर्थ (Hindi Meaning) |
| i) | विष्णुः पीताम्बरं धारयति। | पीतम् अम्बरम् | विष्णु पीले वस्त्र (पीताम्बर) धारण करते हैं। |
| ii) | भवतः कार्यं निर्विघ्नं समापयेत्। | विघ्नानाम् अभावः | आपका कार्य बाधाओं के बिना (निर्विघ्न) समाप्त हो। |
| iii) | दुर्गासप्तशती पठितव्या। | दुर्गायाः सप्तशती | दुर्गा की सात सौ (श्लोकों वाली पुस्तक) पढ़नी चाहिए। |
| iv) | शरविद्धः हंसः भूमौ पतितः। | शरेण विद्धः | बाण से बिंधा हुआ हंस भूमि पर गिर गया। |
| v) | वृद्धः पुत्रपौत्रम् दृष्ट्वा प्रसीदति। | पुत्राश्च पौत्राश्च | वृद्ध पुत्र और पोतों (के समूह) को देखकर प्रसन्न होता है। |
| vi) | विष्णुः चक्रपाणिः कथ्यते। | चक्रं पाणौ यस्य सः | विष्णु चक्रपाणि (जिनके हाथ में चक्र है) कहे जाते हैं। |

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