अहमस्मि भारतस्य संविधानम् (मैं भारत का संविधान हूँ।)
1. पाठ का परिचय
इस पाठ में भारतीय संविधान को स्वयं बोलते हुए प्रस्तुत किया गया है। संविधान अपने महत्व, उद्देश्य, मूल भावनाओं, नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों तथा शासन के तीन अंगों के बारे में बताता है।
2. संविधान का स्वरूप
संविधान स्वयं को भारत की आत्मा, राष्ट्र की नियमसंहिता और जीवन का मार्गदर्शक कहता है। इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्र की एकता, अखण्डता, न्याय और शान्ति बनाए रखना है।
3. संविधान के चार प्रमुख आधार
संविधान के चार प्रमुख आधार हैं—
- न्याय
- स्वातन्त्रता
- समता
- बन्धुता
इनके माध्यम से सभी नागरिकों के कल्याण और राष्ट्र की उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
4. शासन के तीन अंग
भारतीय शासन व्यवस्था के तीन प्रमुख अंग बताए गए हैं—
- विधायिका – नीतियों और कानूनों का निर्माण करती है।
- कार्यपालिका – बनाई गई नीतियों और कानूनों को लागू करती है।
- न्यायपालिका – नागरिकों के न्याय और अधिकारों की रक्षा करती है।
न्यायपालिका में जनपद न्यायालय, उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय का उल्लेख किया गया है।
5. समानता और स्वतंत्रता
संविधान सभी नागरिकों को विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा अपनी उपासना का चुनाव करने की स्वतंत्रता देता है। सभी नागरिकों की गरिमा और अवसर की समानता पर भी बल दिया गया है।
6. मौलिक अधिकार और उपचार
संविधान नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करता है। अधिकारों के संरक्षण के लिए वैधानिक-उपचाराधिकार का भी उल्लेख किया गया है।
7. लोकतन्त्र और जनमत
संविधान संसदीय प्रणाली को बढ़ावा देता है। जनता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करती है और जनता को सर्वोच्च माना गया है। इसलिए जनमत का विशेष महत्व है।
8. मौलिक कर्तव्य
अनुच्छेद 51A में नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख है। इनमें संविधान का सम्मान, देश की एकता-अखण्डता की रक्षा, भ्रातृत्व की भावना, पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा आदि शामिल हैं।
9. संविधान में संशोधन
समय, परिस्थिति और आवश्यकता के अनुसार संविधान में संशोधन किया जा सकता है। इससे संविधान को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप बनाए रखने की भावना दिखाई देती है।
महत्वपूर्ण शब्दार्थ
- संविधानम् – संविधान
- नियमसंहिता – नियमों की संहिता
- लोकतन्त्रम् – लोकतंत्र
- समाहिताः – अंतर्निहित / समाविष्ट
- विधायिका – विधि बनाने वाली सभा
- न्यायपालिका – न्याय की रक्षा करने वाली परिषद्
- संशोधनैः – संशोधनों द्वारा
- नागरिकाणाम् – नागरिकों का


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