सा देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेणा संस्थिता
1. पाठ का प्रसंग
यह पाठ अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस समारोह के प्रसंग पर आधारित है। समारोह 8 मार्च 2026 को आयोजित किया गया है। इसमें स्वयंप्रभा महिला संघ की ओर से कार्यक्रम आयोजित किया गया है। कार्यक्रम में प्रमुख अतिथि के रूप में जनपद प्रशासनाधिकारिणी युगन्धरा महोदया तथा अध्यक्ष के रूप में उच्चन्यायालय की भूतपूर्व न्यायाधीश अन्वीक्षा महोदया उपस्थित हैं।
2. अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस
युगन्धरा महोदया बताती हैं कि मार्च मास की 8 तारीख को विश्व में सर्वत्र महिलादिवस के रूप में मनाया जाता है।
वे नारी के वास्तविक आभूषणों के विषय में विचार प्रस्तुत करती हैं। उनके अनुसार केवल महँगे सोने-चाँदी के हार-कुण्डल ही नारी के वास्तविक आभूषण नहीं हैं।
नारी के वास्तविक आभूषण
श्लोक में नारी के निम्न आभूषण बताए गए हैं—
बुद्धि, उत्साह, स्मृति, प्रज्ञा, कला, धृति और सहिष्णुता।
श्लोक—
बुद्ध्युत्साहस्मृतिप्रज्ञाकलाधृतिसहिष्णुताः।
नारीणां भूषणान्येवं न मात्रं रूपचारुता।।
भावार्थ
नारी के आभूषण केवल उसका रूप-सौन्दर्य नहीं हैं। बुद्धि, उत्साह, स्मृति, प्रज्ञा, विभिन्न कलाएँ, धैर्य और सहिष्णुता भी नारी के महत्वपूर्ण आभूषण हैं।
3. वीरांगना विश्वपला
पाठ में वैदिक युग की वीरांगना विश्वपला का वर्णन किया गया है।
विश्वपला का परिचय
- वैदिक युग में एक राजा थे।
- वे खेलों में बहुत कुशल थे।
- इसी कारण उनका नाम खेल प्रसिद्ध हुआ।
- खेलराज की पत्नी विश्वपला युद्ध में निपुण और वीरांगना थीं।
युद्ध में विश्वपला का पराक्रम
जब देश में युद्ध आरम्भ हुआ, तब विश्वपला भी देश की रक्षा के लिए युद्धभूमि में गईं। वे पराक्रम से युद्ध कर रही थीं। शत्रुओं ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया और उनके पैर पर शत्रुओं के शस्त्रों से प्रहार हुआ।
उनका पैर घायल होने के बाद भी उनका उत्साह और दृढ़ निश्चय समाप्त नहीं हुआ। वे युद्ध जारी रखना और शत्रुओं को पराजित करना चाहती थीं।
4. अगस्त्य और अश्विनीकुमार
विश्वपला के मनोबल, धैर्य और वीरोचित भाव को देखकर महर्षि अगस्त्य आश्चर्यचकित हुए। उन्होंने उसी रात देवचिकित्सक अश्विनीकुमारों को बुलाया।
अश्विनीकुमारों ने विश्वपला के पैर का उपचार किया। उसके अक्षय निश्चय को देखकर उन्होंने उसके लिए लोहे का पैर बनाया।
इसके बाद विश्वपला नवीन उत्साह के साथ फिर युद्धभूमि में गईं और विजय प्राप्त की। कृत्रिम पैर होने पर भी उन्होंने युद्ध में अद्भुत पराक्रम दिखाया।
विश्वपला का महत्व
विश्वपला भारतीय महिलाओं में इच्छाशक्ति का प्रतिरूप बनकर प्रेरणा देती हैं। पाठ में उन्हें वेदकालीन महिलाओं की उज्ज्वल श्रेणी में विशेष स्थान दिया गया है।
5. वेदकालीन महिलाओं का उल्लेख
पाठ में वेदकालीन महिलाओं में निम्न नामों का उल्लेख है—
- गार्गी
- मैत्रेयी
- लोपामुद्रा
- अपाला
- विश्वपला
इनमें विश्वपला को माणिक्य के समान शोभायमान स्त्रीरत्न बताया गया है।
6. वीरांगना गुंजन सक्सेना
पाठ में आधुनिक समय की वीरांगना के रूप में गुंजन सक्सेना का उल्लेख किया गया है।
गुंजन सक्सेना का वर्णन
- वे उत्तरप्रदेश के लखनऊ की निवासी थीं।
- उन्होंने भारतीय वायुसेना का वैमानिक प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया।
- वे प्रथम महिला युद्धवैमानिकी बनीं।
- कारगिल युद्ध के समय उन्होंने युद्धविमान उड़ाया।
- उन्होंने घायल और आपद्ग्रस्त सैनिकों को सुरक्षित स्थान तक पहुँचाया।
- उन्होंने युद्धरत सैनिकों के लिए विमान द्वारा आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी की।
युद्धक्षेत्र में उनके शौर्य और धैर्य को देखकर भारत सरकार ने उन्हें शौर्यचक्र पुरस्कार देकर सम्मानित किया।
7. गुंजन सक्सेना का देशसेवा भाव
भारतीय वायुसेना में प्रवेश और प्रशिक्षण उनके लिए सरल नहीं था। फिर भी उन्होंने सभी विघ्नों की परवाह न करते हुए निर्भय होकर युद्धक्षेत्र में प्रवेश किया और देशसेवा की।
पाठ में विश्वपला और गुंजन सक्सेना दोनों की महान इच्छाशक्ति का उल्लेख किया गया है। उनके लक्ष्य की प्राप्ति में सहयोग करने वाले लोगों को भी प्रशंसनीय बताया गया है।
8. महिलाओं को प्रेरणा और सहयोग
पाठ में कहा गया है कि यदि हम अपने आसपास की महिलाओं को प्रेरित करें और अपनी क्षमता के अनुसार उनका सहयोग करें, तो वे भी यशस्विनी बन सकती हैं।
ऐसे विचारों में परिवर्तन होने से—
- परिवारों में समरसता बढ़ेगी।
- समाज में एकता बढ़ेगी।
- देश का विकास तेज होगा।
9. स्त्री-पुरुष की समान उन्नति
पाठ में कहा गया है—
पुरुषाणामिव स्त्रीणां सर्वाङ्गीणा समुन्नतिः।
यत्र स्यात् तत्र राष्ट्रे हि स्वर्गः प्रावतरिष्यति।।
भावार्थ
जिस राष्ट्र में पुरुषों के समान महिलाओं की भी सर्वांगीण उन्नति होती है, वहाँ उस राष्ट्र का विकास होता है और वह राष्ट्र सुख-समृद्धि की ओर बढ़ता है।
10. अन्वीक्षा महोदया का अध्यक्षीय भाषण
कार्यक्रम की अध्यक्ष न्यायमूर्ति अन्वीक्षा महोदया अपने भाषण में अनेक वन्दनीय नारियों को स्मरण करती हैं। पाठ में निम्न नाम दिए गए हैं—
- राज्ञी लक्ष्मीबाई
- जिजाबाई
- अहल्यादेवी
- चेन्नमा
- रुद्रमाम्बा
- भगिनी निवेदिता
- शारदादेवी
- सावित्री
इन सभी नारियों को पुण्यश्लोका और जगद्विख्याता नारियाँ बताया गया है।
11. महिलाओं की गौरवशाली परम्परा
अध्यक्ष महोदया सभी से संकल्प लेने के लिए कहती हैं कि वे इस गौरवशालिनी परम्परा का समर्थ रूप से निर्वहन करेंगी।
श्लोक—
महिलागुणशक्तीनां प्राकृतानां विकासनम्।
सुशिक्षितैः सुसंस्कारैर्भूयो भवतु भारते।।
भावार्थ
भारत में महिलाओं में विद्यमान प्राकृतिक गुणों और शक्तियों का विकास उत्तम शिक्षा और अच्छे संस्कारों के द्वारा अधिक से अधिक हो।


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