कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः
यह पाठ महाभारत की प्रसिद्ध कथा “बकासुर वध” पर आधारित है। इसे महामहोपाध्याय श्रीरंगनाथ शर्मा ने “एकचक्रम्” नामक छोटे नाटक (रूपक) में लिखा है। पाठ का मुख्य संदेश यह है कि “किया हुआ उपकार का बदला अवश्य करना चाहिए। यही सनातन धर्म है।” (कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः)
कहानी इस प्रकार है:
पाण्डव भाई अपनी माता कुन्ती के साथ एकचक्र नामक नगर में छिपकर रह रहे थे। वे एक गरीब ब्राह्मण के घर में मेहमान थे। एक दिन कुन्ती ने उस ब्राह्मण परिवार के रोने की आवाज सुनी। जब उन्होंने कारण पूछा तो पता चला कि शहर के पास एक पहाड़ी पर बक नाम का भयंकर राक्षस रहता था। राक्षस ने नगरवालों से समझौता किया था कि हर रोज एक व्यक्ति स्वेच्छा से उसका भोजन बनेगा। उस दिन ब्राह्मण परिवार की बारी थी। ब्राह्मण के पास एक छोटा बच्चा था, इसलिए पूरा परिवार बहुत दुखी और रो रहा था।
कुन्ती ने ब्राह्मण को आश्वासन दिया कि वह अपना एक पुत्र राक्षस के पास भेज देगी। यह सुनकर भीम बहुत प्रसन्न हुआ। उसने कहा कि हम बहुत दिनों से इस ब्राह्मण की मेहमानदारी खा रहे हैं। अब समय आ गया है कि हम उनका उपकार चुकाएँ। भीम ने अपनी माता कुन्ती से कहा —
“भैक्षप्रदानेन चिरं परैरुपकृता वयम्। कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः॥”
अर्थात् — “हम बहुत समय से इन ब्राह्मणों की भिक्षा (मेहमानदारी) से पले हैं। अब उनका किया उपकार का बदला करना चाहिए। यही सनातन धर्म है।”
भीम ने ब्राह्मण से स्वादिष्ट भोजन (मृष्टान्न) से भरा एक शकट (गाड़ी) भरवाया और बकासुर के पास जाने को तैयार हो गया। युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल और सहदेव ने भीम को रोकने की कोशिश की क्योंकि बकासुर बहुत बलवान और मानुषभोजी (मनुष्य खाने वाला) राक्षस था। लेकिन भीम ने कहा कि माता की आज्ञा का पालन करना जरूरी है और क्षत्रिय का धर्म है कि वह दुर्बलों की रक्षा करे। अर्जुन साथ चलने को तैयार हुआ, लेकिन भीम ने कहा कि सिंह को छोटे जानवर के लिए सहायता की जरूरत नहीं होती। उसके अपने दो मजबूत बाहू ही काफी हैं।
भीम शकट लेकर बकासुर के पास पहुँचा। राक्षस ने भूखा होकर चिल्लाया, “हे नीच मानव! मुझे भोजन परोसो।” भीम ने शांत लेकिन दृढ़ स्वर में कहा, “सारा भोजन मैंने अपने पेट में रहने वाले अग्निदेव को चढ़ा दिया है। मैं तुम्हें मारने आया हूँ क्योंकि तुम निर्दोष लोगों को खाते हो।”
बकासुर ने कहा कि मनुष्य खाना राक्षसों का स्वाभाविक धर्म है। भीम ने जवाब दिया — “मनुष्यों की रक्षा करना क्षत्रियों का धर्म है।” फिर दोनों में भयंकर मल्लयुद्ध (कुश्ती) शुरू हो गया। भीम ने अपने शक्तिशाली बाहुओं से बकासुर को पकड़कर मार डाला। इस प्रकार भीम ने ब्राह्मण परिवार की जान बचाई और उपकार का बदला चुकाया।
पाठ का मुख्य संदेश:
- उपकार का बदला (प्रतिकृत) करना चाहिए।
- क्षत्रिय का धर्म है कि वह कमजोरों और साधु लोगों की रक्षा करे।
- माता की आज्ञा का पालन और भाई-बहनों का सहयोग बहुत महत्वपूर्ण है।
- बलवान व्यक्ति को अपने बल का उपयोग सही कार्य के लिए करना चाहिए।
यह पाठ हमें सिखाता है कि कृतज्ञता (उपकार मानना) और प्रत्युपकार (उपकार का बदला चुकाना) जीवन का सबसे बड़ा गुण है। भीम की वीरता, माता कुन्ती का निर्णय और पाण्डवों का आपसी प्रेम इस कहानी को प्रेरणादायक बनाते हैं।


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