संस्कृत • कक्षा ९ • शारदा
सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम्
प्रथमः पाठः — सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर (Exercise Q&A with Hindi Translations)
📖 पाठ्यपुस्तक प्रश्न
✍️ सभी अभ्यास
🏛️ कक्षा ९ NCERT
⭐ हिन्दी अनुवाद सहित
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📋 विषय-सूची (Table of Contents)
- पाठ-परिचय एवं भावार्थ
- प्र.२ — एकपदेन उत्तरम् (One Word Answers)
- प्र.३ — पूर्णवाक्येन उत्तरम् (Complete Sentence Answers)
- प्र.४ — रिक्तस्थानपूर्तिः (Fill in the Blanks)
- प्र.५ — मञ्जूषा-वाक्यरचना (Sentence Formation)
- प्र.६ — समस्तपद-विग्रहः (Compound Word Analysis)
- प्र.७ — पर्यायपदानि (Synonyms)
- प्र.८ — मेलनम् (Matching)
पाठ-परिचय एवं भावार्थ
पाठ का परिचय
संस्कृतं भारतदेशस्य सम्पदस्ति। इस पाठ में कवि पण्डित वासुदेव-शास्त्रि-द्विवेदि ने संस्कृत की महिमा का गुणगान 6 श्लोकों में किया है। यह गीत बताता है कि संस्कृत के अध्ययन से मनुष्य में सुसंस्कार आते हैं और भारतीय एकता, ज्ञान, शान्ति एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है।
संस्कृतं भारतदेशस्य सम्पदस्ति। इस पाठ में कवि पण्डित वासुदेव-शास्त्रि-द्विवेदि ने संस्कृत की महिमा का गुणगान 6 श्लोकों में किया है। यह गीत बताता है कि संस्कृत के अध्ययन से मनुष्य में सुसंस्कार आते हैं और भारतीय एकता, ज्ञान, शान्ति एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है।
📖 श्लोक १ का भावार्थ
प्र. प्रथमे श्लोके संस्कृतस्य किं वर्णनम् अस्ति?
(पहले श्लोक में संस्कृत का क्या वर्णन है?)
(पहले श्लोक में संस्कृत का क्या वर्णन है?)
उ. प्रथमे श्लोके कविः कथयति यत् संस्कृतं भारतीयानाम् ऐक्यं साधयति, भारतीयत्वं सम्पादयति, ज्ञानसमूहस्य प्रभां दर्शयति, सर्वदा आनन्दस्य परम्परां जनयति च।
(पहले श्लोक में कवि कहते हैं कि संस्कृत भारतीयों में एकता लाती है, भारतीयत्व प्रदान करती है, ज्ञान के भंडार का प्रकाश दिखाती है और सदा आनंद की परम्परा उत्पन्न करती है।)
(पहले श्लोक में कवि कहते हैं कि संस्कृत भारतीयों में एकता लाती है, भारतीयत्व प्रदान करती है, ज्ञान के भंडार का प्रकाश दिखाती है और सदा आनंद की परम्परा उत्पन्न करती है।)
📖 श्लोक २ का भावार्थ
प्र. द्वितीये श्लोके संस्कृतस्य किं कार्यं वर्णितम्?
(दूसरे श्लोक में संस्कृत का क्या कार्य वर्णित है?)
(दूसरे श्लोक में संस्कृत का क्या कार्य वर्णित है?)
उ. द्वितीये श्लोके वर्णितम् अस्ति यत् संस्कृतं सर्वेषां जनानां मानसं शोधयति, वचनानि परिष्करोति, सन्मार्गं दर्शयति, सद्गुणानां समूहमेव उत्पादयति।
(दूसरे श्लोक में कहा गया है कि संस्कृत सभी लोगों के मन को शुद्ध करती है, वाणी को परिष्कृत करती है, सच्चा मार्ग दिखाती है और सद्गुणों का समूह उत्पन्न करती है।)
(दूसरे श्लोक में कहा गया है कि संस्कृत सभी लोगों के मन को शुद्ध करती है, वाणी को परिष्कृत करती है, सच्चा मार्ग दिखाती है और सद्गुणों का समूह उत्पन्न करती है।)
📖 श्लोक ३ का भावार्थ
प्र. तृतीये श्लोके संस्कृतेन किं किं साध्यते?
(तीसरे श्लोक में संस्कृत से क्या-क्या प्राप्त होता है?)
(तीसरे श्लोक में संस्कृत से क्या-क्या प्राप्त होता है?)
उ. तृतीये श्लोके उक्तम् यत् संस्कृतं विश्वबन्धुत्वं वर्धयति, सर्वेषां प्राणिनाम् ऐक्यं बोधयति, सर्वत्र शान्तिं प्रतिष्ठापयति, पञ्चशीलानाम् रीतिं गमयति च।
(तीसरे श्लोक में कहा है कि संस्कृत विश्वबन्धुत्व बढ़ाती है, सभी प्राणियों में एकता की भावना जगाती है, सर्वत्र शान्ति स्थापित करती है और पंचशील के मार्ग पर चलाती है।)
(तीसरे श्लोक में कहा है कि संस्कृत विश्वबन्धुत्व बढ़ाती है, सभी प्राणियों में एकता की भावना जगाती है, सर्वत्र शान्ति स्थापित करती है और पंचशील के मार्ग पर चलाती है।)
📖 श्लोक ४-५-६ का भावार्थ
प्र. चतुर्थ-पञ्चम-षष्ठश्लोकेषु संस्कृतस्य किं महत्त्वम् उक्तम्?
(चौथे-पाँचवें-छठे श्लोक में संस्कृत का क्या महत्त्व बताया गया है?)
(चौथे-पाँचवें-छठे श्लोक में संस्कृत का क्या महत्त्व बताया गया है?)
उ. एतेषु श्लोकेषु उक्तम् यत् संस्कृतेन त्याग, सन्तोष, सेवा का व्रत मिलता है। धर्म, काम, अर्थ, मोक्ष की प्राप्ति होती है। ज्ञान और विज्ञान का संगम होता है। संस्कृत शब्दों की लीलावन है, माधुर्य की धारागृह है और पूर्वजों के यश का स्मारक है।
(इन श्लोकों में बताया है कि संस्कृत से त्याग, संतोष और सेवा का भाव मिलता है; धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है; यह शब्दों का उद्यान है, माधुर्य का घर है और पूर्वजों की कीर्ति का स्मारक है।)
(इन श्लोकों में बताया है कि संस्कृत से त्याग, संतोष और सेवा का भाव मिलता है; धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है; यह शब्दों का उद्यान है, माधुर्य का घर है और पूर्वजों की कीर्ति का स्मारक है।)
प्र.२ — एकपदेन उत्तरं लिखत (One Word Answers)
निर्देश
यथा — ज्ञानपुञ्जप्रभादर्शकं किम्? उत्तरम् — संस्कृतम्
(उदाहरण: ज्ञान के भंडार का प्रकाश दिखाने वाला क्या है? — संस्कृत)
यथा — ज्ञानपुञ्जप्रभादर्शकं किम्? उत्तरम् — संस्कृतम्
(उदाहरण: ज्ञान के भंडार का प्रकाश दिखाने वाला क्या है? — संस्कृत)
प्र. (क) संस्कृतं कस्याः साधकम्?
(संस्कृत किसका साधन करने वाली है?)
(संस्कृत किसका साधन करने वाली है?)
उ. संस्कृतं भारतीयैकतायाः साधकम्।
(संस्कृत भारतीय एकता का साधन करने वाली है।)
(संस्कृत भारतीय एकता का साधन करने वाली है।)
प्र. (ख) सर्वदा संस्कृतं कस्य सन्दोहदम्?
(संस्कृत सर्वदा किसका समूह देने वाली है?)
(संस्कृत सर्वदा किसका समूह देने वाली है?)
उ. सर्वदा संस्कृतं आनन्दस्य सन्दोहदम्।
(संस्कृत सर्वदा आनन्द का समूह देने वाली है।)
(संस्कृत सर्वदा आनन्द का समूह देने वाली है।)
प्र. (ग) संस्कृतं कस्य प्रेरणादायकम्?
(संस्कृत किसकी प्रेरणा देने वाली है?)
(संस्कृत किसकी प्रेरणा देने वाली है?)
उ. संस्कृतं सत्पथस्य प्रेरणादायकम्।
(संस्कृत सत्मार्ग की प्रेरणा देने वाली है।)
(संस्कृत सत्मार्ग की प्रेरणा देने वाली है।)
प्र. (घ) संस्कृतं कासां परिष्कारकम्?
(संस्कृत किनका परिष्कार करने वाली है?)
(संस्कृत किनका परिष्कार करने वाली है?)
उ. संस्कृतं सर्ववाणीनाम् परिष्कारकम्।
(संस्कृत सभी वाणियों का परिष्कार करने वाली है।)
(संस्कृत सभी वाणियों का परिष्कार करने वाली है।)
प्र. (ङ) कस्य विस्तारकं संस्कृतम्?
(किसका विस्तार करने वाली है संस्कृत?)
(किसका विस्तार करने वाली है संस्कृत?)
उ. विश्वबन्धुत्वस्य विस्तारकं संस्कृतम्।
(विश्वबन्धुत्व का विस्तार करने वाली है संस्कृत।)
(विश्वबन्धुत्व का विस्तार करने वाली है संस्कृत।)
प्र.३ — पूर्णवाक्येन उत्तरम् (Full Sentence Answers)
प्र. (क) सर्वतः कस्याः संस्थापकं संस्कृतम्?
(सर्वत्र किसकी स्थापना करने वाली है संस्कृत?)
(सर्वत्र किसकी स्थापना करने वाली है संस्कृत?)
उ. सर्वतः शान्तेः संस्थापकं संस्कृतम्।
(संस्कृत सर्वत्र शान्ति की स्थापना करने वाली है।)
(संस्कृत सर्वत्र शान्ति की स्थापना करने वाली है।)
प्र. (ख) कीदृशं व्रतं संस्कृतम्?
(संस्कृत कैसे व्रत वाली है?)
(संस्कृत कैसे व्रत वाली है?)
उ. संस्कृतं त्यागसन्तोषसेवाव्रतम् अस्ति।
(संस्कृत त्याग, सन्तोष और सेवा के व्रत वाली है।)
(संस्कृत त्याग, सन्तोष और सेवा के व्रत वाली है।)
प्र. (ग) कयोः सम्मेलनं संस्कृतम्?
(किन दोनों का सम्मेलन है संस्कृत?)
(किन दोनों का सम्मेलन है संस्कृत?)
उ. ज्ञानविज्ञानयोः सम्मेलनं संस्कृतम्।
(ज्ञान और विज्ञान दोनों का सम्मेलन है संस्कृत।)
(ज्ञान और विज्ञान दोनों का सम्मेलन है संस्कृत।)
प्र. (घ) संस्कृतं कस्य चमत्कारकम्?
(संस्कृत किसको चमत्कृत करने वाली है?)
(संस्कृत किसको चमत्कृत करने वाली है?)
उ. संस्कृतं विश्वचेतसः चमत्कारकम्।
(संस्कृत विश्व के चित्त / मन को चमत्कृत करने वाली है।)
(संस्कृत विश्व के चित्त / मन को चमत्कृत करने वाली है।)
प्र. (ङ) केषां यशः स्मारकं संस्कृतम्?
(किनके यश का स्मारक है संस्कृत?)
(किनके यश का स्मारक है संस्कृत?)
उ. पूर्वजानाम् यशः स्मारकं संस्कृतम्।
(पूर्वजों (पुरखों) के यश का स्मारक है संस्कृत।)
(पूर्वजों (पुरखों) के यश का स्मारक है संस्कृत।)
प्र.४ — रिक्तस्थानानि पूरयन्तु (Fill in the Blanks)
यथा (उदाहरण)
सर्वभूतैकता-कारकं संस्कृतम्।
(उदाहरण — सर्वभूतैकता-कारकं संस्कृतम्।)
सर्वभूतैकता-कारकं संस्कृतम्।
(उदाहरण — सर्वभूतैकता-कारकं संस्कृतम्।)
प्र. (क) ……………… सम्पादकं संस्कृतम्।
(________ सम्पादक संस्कृत है।)
(________ सम्पादक संस्कृत है।)
उ. भारतीयत्वसम्पादकं संस्कृतम्।
(भारतीयत्व सम्पादक संस्कृत है।)
(भारतीयत्व सम्पादक संस्कृत है।)
प्र. (ख) ……………… दर्शकं संस्कृतम्।
(________ दर्शक संस्कृत है।)
(________ दर्शक संस्कृत है।)
उ. ज्ञानपुञ्जप्रभादर्शकं संस्कृतम्।
(ज्ञानपुञ्जप्रभादर्शक संस्कृत है।)
(ज्ञानपुञ्जप्रभादर्शक संस्कृत है।)
प्र. (ग) ……………… संस्कारकं संस्कृतम्।
(________ संस्कारक संस्कृत है।)
(________ संस्कारक संस्कृत है।)
उ. सर्वमस्तिष्कसंस्कारकं संस्कृतम्।
(सर्वमस्तिष्कसंस्कारक संस्कृत है।)
(सर्वमस्तिष्कसंस्कारक संस्कृत है।)
प्र. (घ) कर्मदं ……………… भक्तिदं संस्कृतम्।
(कर्मद ________ भक्तिद संस्कृत है।)
(कर्मद ________ भक्तिद संस्कृत है।)
उ. कर्मदं ज्ञानदं भक्तिदं संस्कृतम्।
(कर्मद ज्ञानद भक्तिद संस्कृत है।)
(कर्मद ज्ञानद भक्तिद संस्कृत है।)
प्र. (ङ) सत्यनिष्ठं ……………… संस्कृतम्।
(सत्यनिष्ठ ________ संस्कृत है।)
(सत्यनिष्ठ ________ संस्कृत है।)
उ. सत्यनिष्ठं शिवं सुन्दरं संस्कृतम्।
(सत्यनिष्ठ शिव और सुन्दर है संस्कृत।)
(सत्यनिष्ठ शिव और सुन्दर है संस्कृत।)
प्र. (च) शब्दलालित्य ……………… संस्कृतम्।
(शब्दलालित्य ________ संस्कृत है।)
(शब्दलालित्य ________ संस्कृत है।)
उ. शब्दलालित्यलीलावनं संस्कृतम्।
(शब्दलालित्य की क्रीडावन है संस्कृत।)
(शब्दलालित्य की क्रीडावन है संस्कृत।)
प्र.५ — मञ्जूषा-वाक्यरचना (Sentence Formation from Word Box)
मञ्जूषा (Word Box): वाणीपरिष्कारिका, एकता, सर्वतः, सेवा, सुन्दरम्, पूर्वजानाम्, सत्पथे प्रेरयितुम्, विश्वकल्याणाय, त्यागस्य, सन्तोषस्य, विश्वबन्धुत्वविस्तारकम्
यथा (उदाहरण): वाणीपरिष्कारिका संस्कृत-भाषा भवति।
(उदाहरण: संस्कृत भाषा वाणी को परिष्कृत करने वाली होती है।)
(उदाहरण: संस्कृत भाषा वाणी को परिष्कृत करने वाली होती है।)
प्र. (क) ‘एकता’ पदेन वाक्यं रचयत।
(‘एकता’ शब्द से वाक्य बनाइए।)
(‘एकता’ शब्द से वाक्य बनाइए।)
उ. संस्कृतं भारतीयानाम् एकतासाधकं भवति।
(संस्कृत भारतीयों की एकता साधने वाली होती है।)
(संस्कृत भारतीयों की एकता साधने वाली होती है।)
प्र. (ख) ‘सर्वतः’ पदेन वाक्यं रचयत।
(‘सर्वतः’ शब्द से वाक्य बनाइए।)
(‘सर्वतः’ शब्द से वाक्य बनाइए।)
उ. संस्कृतं सर्वतः शान्तिसंस्थापकं भवति।
(संस्कृत सर्वत्र शान्ति स्थापित करने वाली होती है।)
(संस्कृत सर्वत्र शान्ति स्थापित करने वाली होती है।)
प्र. (ग) ‘सेवा’ पदेन वाक्यं रचयत।
(‘सेवा’ शब्द से वाक्य बनाइए।)
(‘सेवा’ शब्द से वाक्य बनाइए।)
उ. संस्कृतं त्याग-सन्तोष-सेवाव्रतं भवति।
(संस्कृत त्याग, सन्तोष और सेवा के व्रत वाली होती है।)
(संस्कृत त्याग, सन्तोष और सेवा के व्रत वाली होती है।)
प्र. (घ) ‘विश्वकल्याणाय’ पदेन वाक्यं रचयत।
(‘विश्वकल्याणाय’ शब्द से वाक्य बनाइए।)
(‘विश्वकल्याणाय’ शब्द से वाक्य बनाइए।)
उ. संस्कृतं विश्वकल्याणाय निष्ठायुतं भवति।
(संस्कृत विश्व के कल्याण के लिए निष्ठावान होती है।)
(संस्कृत विश्व के कल्याण के लिए निष्ठावान होती है।)
प्र. (ङ) ‘पूर्वजानाम्’ पदेन वाक्यं रचयत।
(‘पूर्वजानाम्’ शब्द से वाक्य बनाइए।)
(‘पूर्वजानाम्’ शब्द से वाक्य बनाइए।)
उ. संस्कृतं पूर्वजानाम् यशःस्मारकं भवति।
(संस्कृत पूर्वजों के यश का स्मारक होती है।)
(संस्कृत पूर्वजों के यश का स्मारक होती है।)
प्र. (च) ‘विश्वबन्धुत्वविस्तारकम्’ पदेन वाक्यं रचयत।
(‘विश्वबन्धुत्वविस्तारकम्’ शब्द से वाक्य बनाइए।)
(‘विश्वबन्धुत्वविस्तारकम्’ शब्द से वाक्य बनाइए।)
उ. संस्कृतं विश्वबन्धुत्वविस्तारकम् अस्ति।
(संस्कृत विश्वबन्धुत्व का विस्तार करने वाली है।)
(संस्कृत विश्वबन्धुत्व का विस्तार करने वाली है।)
प्र.६ — समस्तपद-विग्रहः (Compound Word Analysis)
परीक्षा-युक्ति
यथा (उदाहरण): भारतीयैकतासाधकम् → भारतीयैकतायाः साधकम्
विग्रह में समस्त पद के अंगों को अलग-अलग करके विभक्ति (षष्ठी आदि) लगाई जाती है।
यथा (उदाहरण): भारतीयैकतासाधकम् → भारतीयैकतायाः साधकम्
विग्रह में समस्त पद के अंगों को अलग-अलग करके विभक्ति (षष्ठी आदि) लगाई जाती है।
| समस्तपदम् | विग्रहः | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| यथा — भारतीयैकतासाधकम् | भारतीयैकतायाः साधकम् | भारतीय एकता का साधन करने वाला |
| (क) ज्ञानपुञ्जप्रभादर्शकम् | ज्ञानपुञ्जप्रभायाः दर्शकम् | ज्ञान के भंडार की प्रभा दिखाने वाला |
| (ख) सर्ववाणीपरिष्कारकम् | सर्ववाणीनाम् परिष्कारकम् | सभी वाणियों का परिष्कार करने वाला |
| (ग) विश्वबन्धुत्वविस्तारकम् | विश्वबन्धुत्वस्य विस्तारकम् | विश्वबन्धुत्व का विस्तार करने वाला |
| (घ) सर्वभूतैकताकारकम् | सर्वभूतानाम् एकताकारकम् | सभी प्राणियों में एकता करने वाला |
| (ङ) शान्तिसंस्थापकम् | शान्तेः संस्थापकम् | शान्ति की स्थापना करने वाला |
| (च) ज्ञानविज्ञानसम्मेलनम् | ज्ञानस्य विज्ञानस्य च सम्मेलनम् | ज्ञान और विज्ञान दोनों का सम्मेलन |
प्र.७ — पर्यायपदानि (Synonyms — Fill in the Blanks)
मञ्जूषा: उल्लासः, किरणः, जगत्, अनुपमा, तेजोराशयः, मानम्
प्र. (क) विद्वांसः ……………… भवन्ति।
(विद्वान ________ होते हैं।)
(विद्वान ________ होते हैं।)
उ. विद्वांसः तेजोराशयः भवन्ति।
(विद्वान तेजोराशि (ज्ञान के भंडार) होते हैं।)
📌 तेजोराशयः = प्रकाश का समूह / ज्ञान का भंडार
प्र. (ख) सूर्यस्य ……………… सर्वेषां प्राणिनां कृते हितकरः भवति।
(सूर्य की ________ सभी प्राणियों के लिए हितकारी होती है।)
(सूर्य की ________ सभी प्राणियों के लिए हितकारी होती है।)
उ. सूर्यस्य किरणः सर्वेषां प्राणिनां कृते हितकरः भवति।
(सूर्य की किरण सभी प्राणियों के लिए हितकारी होती है।)
(सूर्य की किरण सभी प्राणियों के लिए हितकारी होती है।)
प्र. (ग) ईश्वरं स्मृत्वा ……………… उपजायते।
(ईश्वर का स्मरण करने से ________ उत्पन्न होता है।)
(ईश्वर का स्मरण करने से ________ उत्पन्न होता है।)
उ. ईश्वरं स्मृत्वा उल्लासः उपजायते।
(ईश्वर का स्मरण करने से उल्लास / आनन्द उत्पन्न होता है।)
(ईश्वर का स्मरण करने से उल्लास / आनन्द उत्पन्न होता है।)
प्र. (घ) विद्यायाः ……………… अजरं भवति।
(विद्या का ________ अमर होता है।)
(विद्या का ________ अमर होता है।)
उ. विद्यायाः मानम् अजरं भवति।
(विद्या का मान / सम्मान अमर होता है।)
(विद्या का मान / सम्मान अमर होता है।)
प्र. (ङ) प्रकृतेः शोभा ……………… विद्यते।
(प्रकृति की शोभा ________ में है।)
(प्रकृति की शोभा ________ में है।)
उ. प्रकृतेः शोभा अनुपमा विद्यते।
(प्रकृति की शोभा अनुपमा / अतुलनीय है।)
(प्रकृति की शोभा अनुपमा / अतुलनीय है।)
प्र. (च) यत्र ……………… एकनीडं भवति।
(जहाँ ________ वहाँ एक घोंसला / एक परिवार होता है।)
(जहाँ ________ वहाँ एक घोंसला / एक परिवार होता है।)
उ. यत्र जगत् एकनीडं भवति।
(जहाँ संसार एक घोंसला / एक परिवार होता है।)
(जहाँ संसार एक घोंसला / एक परिवार होता है।)
प्र.८ — मेलनम् (Matching)
| स्तम्भ-क (Column A) | स्तम्भ-ख (Column B) | सही मेल (Correct Match) |
|---|---|---|
| (क) भारतीयैकतायाः | १. विस्तारकम् | (क) → २. साधकम् भारतीय एकता का साधन करने वाला |
| (ख) सत्पथे | २. साधकम् | (ख) → ४. प्रेरणादायकम् सत्मार्ग की प्रेरणा देने वाला |
| (ग) त्यागसन्तोषसेवारूपम् | ३. दर्शकम् | (ग) → ५. व्रतम् त्याग-सन्तोष-सेवा रूपी व्रत |
| (घ) ज्ञानपुञ्जप्रभायाः | ४. प्रेरणादायकम् | (घ) → ३. दर्शकम् ज्ञान के भंडार की प्रभा दिखाने वाला |
| (ङ) विश्वबन्धुत्वस्य | ५. व्रतम् | (ङ) → १. विस्तारकम् विश्वबन्धुत्व का विस्तार करने वाला |

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