स्वाध्यायाय्ना प्रमदः
1. अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखत —
पूर्ण वाक्य में उत्तर लिखिए-
(क) आचार्यः कम् अनुशास्ति? (आचार्य किसे उपदेश देते हैं?)
उत्तर : आचार्यः अन्तेवासिनम् अनुशास्ति।
(आचार्य शिष्य को उपदेश देते हैं।)
(ख) किं कृत्वा आचार्यः अन्तेवासिनम् अनुशास्ति? (क्या करके आचार्य शिष्य को उपदेश देते हैं?)
उत्तर : वेदम् अनुच्य आचार्यः अन्तेवासिनम् अनुशास्ति।
(वेद पढ़ाकर आचार्य शिष्य को उपदेश देते हैं।)
(ग) कानि सेवितव्यानि? (किनका पालन करना चाहिए?)
उत्तर : अनवद्यानि कर्माणि सेवितव्यानि।
(निन्दारहित अर्थात् प्रशंसनीय कर्मों का पालन करना चाहिए।)
(घ) के अस्मच्छ्रेयांसः भवन्ति? (हमसे श्रेष्ठ कौन होते हैं?)
उत्तर : ब्रह्मविदः विद्वांसः अस्मच्छ्रेयांसः भवन्ति।
(ब्रह्म को जानने वाले विद्वान हमसे श्रेष्ठ होते हैं।)
(ङ) कथम् अदेयम्? (किस प्रकार नहीं देना चाहिए?)
उत्तर : अश्रद्धया अदेयम्।
(बिना श्रद्धा और आदर के दान नहीं देना चाहिए।)
२. समस्तपदानि पठितविषयात् निरूपयत-
(पठित विषय से समस्त पद लिखिए)
(क) माता एव देवः यस्य सः ___________ (जिसके लिए माता ही देवता है_______)
उत्तर : मातृदेवः।
(माता को देवता मानने वाला।)
(ख) पिता एव देवः यस्य सः __________ (जिसके लिए पिता ही देवता है________)
उत्तर : पितृदेवः।
(पिता को देवता मानने वाला।)
(ग) न अवद्यानि ________ (जो निन्दनीय नहीं हैं___________)
उत्तर : अनवद्यानि।
(निन्दारहित कर्म।)
(घ) न श्रद्धा, तया ___________ (श्रद्धा के बिना_______)
उत्तर : अश्रद्धया।
(बिना श्रद्धा के।)
(ङ) सुष्ठु शोभनानि चरितानि ______ (सुंदर और उत्तम आचरण ______)
उत्तर : सुचरितानि।
(अच्छे कर्म अथवा सदाचरण।)
३. स्तम्भमेलनं कुरुत-
(मेल कीजिए)
(क) सुचरितानि — सेवितव्यानि
(अच्छे आचरणों का पालन करना चाहिए।)
(ख) संविदा — देयम्
(मित्रतापूर्ण भावना से देना चाहिए।)
(ग) एषा — वेदोपनिषत्
(यह वेदों का रहस्य है।)
(घ) अनवद्यानि कर्माणि — उपास्यानि
(निन्दारहित कर्मों का अनुसरण करना चाहिए।)
(ङ) आसनेन — प्रश्वसितव्यम्
(आसन आदि की व्यवस्था करके थकान दूर करने में सहायता करनी चाहिए।)
४. रेखाङ्कितपदानाम् आधारेण प्रश्ननिर्माणं कुरुत-
(रेखांकित पदों के आधार पर प्रश्न निर्माण कीजिए)
(क) तानि सेवितव्यानि। (उन (नियमों) का पालन करना चाहिए)
प्रश्नः — कानि सेवितव्यानि? (कौन से (कर्म) सेवन करने योग्य हैं?)
(ख) अश्रद्धया अदेयम्। (श्रद्धा के बिना (अनादर भाव से) नहीं देना चाहिए।)
प्रश्नः — कथम् अदेयम्? (किस प्रकार नहीं देना चाहिए?)
(ग) धर्मात् न प्रमदितव्यम्। (धर्म से विचलित नहीं होना चाहिए।)
प्रश्नः — कस्मात् न प्रमदितव्यम्? (किससे विचलित (प्रमाद) नहीं होना चाहिए?)
(घ) एतत् अनुशासनम्। (यह अनुशासन है।)
प्रश्नः — किम् अनुशासनम्? (क्या अनुशासन है?)
(ङ) एषः उपदेशः। (यह उपदेश है।)
प्रश्नः — कः उपदेशः? (कौन सा उपदेश है?)
5. अधस्तनानि पदानि व्यवहृत्य वाक्यानि रचयत —
(निम्नलिखित पदों का प्रयोग करके वाक्य बनाइए)
(क) इतराणि (अन्य)
उत्तर : इतराणि कर्माणि न सेवितव्यानि।
(अन्य कर्मों का पालन नहीं करना चाहिए।)
(ख) प्रमदितव्यम् (लापरवाही)
उत्तर : स्वाध्यायात् न प्रमदितव्यम्।
(स्वाध्याय के प्रति लापरवाही नहीं करनी चाहिए।)
(ग) भिया (भय से)
उत्तर : भिया देयम्।
(भय का ध्यान रखते हुए देना चाहिए।)
(घ) सुचरितानि (अच्छे आचरण)
उत्तर : अस्माभिः सुचरितानि सेवितव्यानि।
(हमें अच्छे आचरणों का पालन करना चाहिए।)
(ङ) त्वया (तुम्हारे द्वारा)
उत्तर : त्वया सत्यं वक्तव्यम्।
(तुम्हें सत्य बोलना चाहिए।)
6. विषयानुसारं शुद्धम् उत्तरं चिनुत —
(विषय के अनुसार सही उत्तर चुनिए)
(क) कम् अनुच्य आचार्यः अन्तेवासिनम् अनुशास्ति? (किसे पढ़ाकर आचार्य शिष्य को उपदेश देते हैं?)
उत्तर : (iii) वेदम्।
(वेद को।)
(ख) कस्मात् न प्रमदितव्यम्? (किसके प्रति लापरवाही नहीं करनी चाहिए?)
उत्तर : (iii) स्वाध्यायात्।
(स्वाध्याय के प्रति।)
(ग) मातृदेवः इत्यस्य कोऽर्थः? (मातृदेवः का क्या अर्थ है?)
उत्तर : (ii) माता एव देवः यस्य सः।
(जिसके लिए माता ही देवता है।)
(घ) कानि सेवितव्यानि? (किनका पालन करना चाहिए?)
उत्तर : (i) अनवद्यानि कर्माणि।
(निन्दारहित और प्रशंसनीय कर्मों का।)
(ङ) ह्रिया इत्यस्य कोऽर्थः? (ह्रिया का क्या अर्थ है?)
उत्तर : (ii) लज्जया।
(लज्जा से।)


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