संस्कृत • कक्षा ९ • शारदा • दशमः पाठः
णमो अरिहन्ताणम्
ऋषभदेवस्य जीवनकथा — जैनधर्मः — सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर | हिन्दी अनुवाद सहित
🏛️ गद्यम् — कथा
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🔤 समासः, सन्धिः
⭐ कक्षा ९ NCERT
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📋 विषय-सूची (Table of Contents)
प्र.१ — एकपदेन उत्तरं लिखत (One Word Answers)
निर्देश: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में लिखिए।
प्र. (क) ऋषभेण निर्मितस्य नगरस्य नाम किम्?
(ऋषभ द्वारा बनाए गए नगर का नाम क्या है?)
(ऋषभ द्वारा बनाए गए नगर का नाम क्या है?)
उ. ऋषभेण निर्मितस्य नगरस्य नाम विनिता अस्ति।
(ऋषभ द्वारा बनाए गए नगर का नाम विनिता है।)
(ऋषभ द्वारा बनाए गए नगर का नाम विनिता है।)
प्र. (ख) ऋषभस्य प्रसिद्धे द्वे कन्ये के?
(ऋषभ की दो प्रसिद्ध पुत्रियाँ कौन थीं?)
(ऋषभ की दो प्रसिद्ध पुत्रियाँ कौन थीं?)
उ. ऋषभस्य प्रसिद्धे द्वे कन्ये ब्राह्मी च सुन्दरी च आस्ताम्।
(ऋषभ की दो प्रसिद्ध पुत्रियाँ ब्राह्मी और सुन्दरी थीं।)
(ऋषभ की दो प्रसिद्ध पुत्रियाँ ब्राह्मी और सुन्दरी थीं।)
प्र. (ग) कस्यां लिप्यां नैकानि शास्त्राणि लिपिबद्धानि?
(किस लिपि में अनेक शास्त्र लिपिबद्ध हैं?)
(किस लिपि में अनेक शास्त्र लिपिबद्ध हैं?)
उ. ब्राह्मीलिप्यां नैकानि शास्त्राणि लिपिबद्धानि।
(ब्राह्मी लिपि में अनेक शास्त्र लिपिबद्ध हैं।)
(ब्राह्मी लिपि में अनेक शास्त्र लिपिबद्ध हैं।)
प्र. (घ) विनिता नामकं राज्यं ऋषभः कस्मै समर्पितवान्?
(विनिता नामक राज्य ऋषभ ने किसे सौंपा?)
(विनिता नामक राज्य ऋषभ ने किसे सौंपा?)
उ. विनिता नामकं राज्यं ऋषभः भरताय समर्पितवान्।
(विनिता नामक राज्य ऋषभ ने भरत को सौंपा।)
(विनिता नामक राज्य ऋषभ ने भरत को सौंपा।)
प्र. (ङ) ऋषभः बाहुबलिने किं राज्यं प्रदत्तवान्?
(ऋषभ ने बाहुबलि को कौन सा राज्य दिया?)
(ऋषभ ने बाहुबलि को कौन सा राज्य दिया?)
उ. ऋषभः बाहुबलिने तक्षशिला (तक्षशिलां) राज्यं प्रदत्तवान्।
(ऋषभ ने बाहुबलि को तक्षशिला राज्य दिया।)
(ऋषभ ने बाहुबलि को तक्षशिला राज्य दिया।)
प्र. (च) प्रजाः भिक्षायां कानि वस्तूनि यच्छन्ति स्म?
(प्रजाजन भिक्षा में क्या वस्तुएँ देते थे?)
(प्रजाजन भिक्षा में क्या वस्तुएँ देते थे?)
उ. प्रजाः भिक्षायां आभरणानि अनर्घवस्तूनि च यच्छन्ति स्म — भोजनपदार्थं तु न कोऽपि ददाति स्म।
(प्रजाजन भिक्षा में आभूषण और अनमोल वस्तुएँ देते थे — भोजन सामग्री तो कोई नहीं देता था।)
(प्रजाजन भिक्षा में आभूषण और अनमोल वस्तुएँ देते थे — भोजन सामग्री तो कोई नहीं देता था।)
प्र.२ — पूर्णवाक्येन प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत (Full Sentence Answers)
प्र. (क) देशे काः समस्याः सन्ति इति ऋषभदेवस्य कल्पना प्राप्ता?
(देश में क्या-क्या समस्याएँ हैं — ऋषभदेव को क्या विचार/कल्पना प्राप्त हुई?)
(देश में क्या-क्या समस्याएँ हैं — ऋषभदेव को क्या विचार/कल्पना प्राप्त हुई?)
उ. ऋषभदेवस्य एषा कल्पना प्राप्ता यत् जनानाम् आलस्यं, कृषिकार्ये न्यूनता, उत्पादनक्षमतायाः अभावः च — एताः मूलसमस्याः सन्ति।
(ऋषभदेव को यह विचार आया कि लोगों का आलस्य, कृषि में कमी और उत्पादन क्षमता का अभाव — ये ही मूल समस्याएँ हैं।)
(ऋषभदेव को यह विचार आया कि लोगों का आलस्य, कृषि में कमी और उत्पादन क्षमता का अभाव — ये ही मूल समस्याएँ हैं।)
प्र. (ख) महाराजः केषु कार्येषु प्रजाः प्रशिक्षितवान्?
(महाराज ने किन-किन कार्यों में प्रजा को प्रशिक्षित किया?)
(महाराज ने किन-किन कार्यों में प्रजा को प्रशिक्षित किया?)
उ. महाराजः ऋषभः प्रजाः कृषिकार्ये, भोजननिर्माणे, वस्त्रनिर्माणे, पशुपालने, गृहनिर्माणे च प्रशिक्षितवान्।
(महाराज ऋषभ ने प्रजा को खेती, भोजन बनाना, वस्त्र बनाना, पशुपालन और गृहनिर्माण आदि में प्रशिक्षित किया।)
(महाराज ऋषभ ने प्रजा को खेती, भोजन बनाना, वस्त्र बनाना, पशुपालन और गृहनिर्माण आदि में प्रशिक्षित किया।)
प्र. (ग) ऋषभदेवस्य जीवनपरिवर्तिनी घटना का आसीत्?
(ऋषभदेव के जीवन को बदलने वाली घटना कौन सी थी?)
(ऋषभदेव के जीवन को बदलने वाली घटना कौन सी थी?)
उ. राजप्रासादे नृत्यकलाप्रदर्शने काचित् नर्तकी नृत्यं कुर्वती सहसा भूमौ पतित्वा मृता — एषा घटना ऋषभदेवस्य जीवनपरिवर्तिनी आसीत्।
(राजमहल में नृत्य प्रदर्शन के दौरान एक नर्तकी नृत्य करते-करते अचानक गिरकर मर गई — यही घटना ऋषभदेव के जीवन को बदलने वाली थी।)
(राजमहल में नृत्य प्रदर्शन के दौरान एक नर्तकी नृत्य करते-करते अचानक गिरकर मर गई — यही घटना ऋषभदेव के जीवन को बदलने वाली थी।)
प्र. (घ) ऋषभदेवस्य दीर्घकालिकस्य उपवासस्य समाप्तिः कथम् अभवत्?
(ऋषभदेव का दीर्घकालिक उपवास कैसे समाप्त हुआ?)
(ऋषभदेव का दीर्घकालिक उपवास कैसे समाप्त हुआ?)
उ. ऋषभदेवस्य प्रपौत्रः श्रेयांसः हस्तिनापुरे इक्षुरसं दत्तवान् — तेन वैशाखमासस्य अक्षयतृतीयायां दिने दीर्घकालिकः उपवासः समाप्तः।
(ऋषभदेव के प्रपौत्र श्रेयांस ने हस्तिनापुर में गन्ने का रस दिया — इससे वैशाख माह की अक्षयतृतीया को दीर्घकालिक उपवास समाप्त हुआ।)
(ऋषभदेव के प्रपौत्र श्रेयांस ने हस्तिनापुर में गन्ने का रस दिया — इससे वैशाख माह की अक्षयतृतीया को दीर्घकालिक उपवास समाप्त हुआ।)
प्र. (ङ) ऋषभदेवः कदा कुत्र च केवलज्ञानं प्राप्तवान्?
(ऋषभदेव ने कब और कहाँ केवलज्ञान प्राप्त किया?)
(ऋषभदेव ने कब और कहाँ केवलज्ञान प्राप्त किया?)
उ. ऋषभदेवः फाल्गुनमासस्य कृष्णपक्षे एकादश्यां, प्रयागराजे, अक्षयवटवृक्षस्य अधः केवलज्ञानं प्राप्तवान्।
(ऋषभदेव ने फाल्गुन माह के कृष्णपक्ष की एकादशी को, प्रयागराज में, अक्षयवट वृक्ष के नीचे केवलज्ञान प्राप्त किया।)
(ऋषभदेव ने फाल्गुन माह के कृष्णपक्ष की एकादशी को, प्रयागराज में, अक्षयवट वृक्ष के नीचे केवलज्ञान प्राप्त किया।)
प्र. (च) जनानां मार्गदर्शनार्थं कं क्रमं रचितवान्?
(लोगों के मार्गदर्शन के लिए कौन सी व्यवस्था बनाई?)
(लोगों के मार्गदर्शन के लिए कौन सी व्यवस्था बनाई?)
उ. ऋषभदेवः जनानां मार्गदर्शनार्थं भिक्षुः, भिक्षुणी, श्रावकः, श्राविका — इति चतुर्विधं क्रमं रचितवान्, सः एव जैनसङ्घः इति प्रसिद्धः।
(ऋषभदेव ने लोगों के मार्गदर्शन के लिए भिक्षु, भिक्षुणी, श्रावक और श्राविका — इस चतुर्विध व्यवस्था बनाई, जो जैनसङ्घ नाम से प्रसिद्ध है।)
(ऋषभदेव ने लोगों के मार्गदर्शन के लिए भिक्षु, भिक्षुणी, श्रावक और श्राविका — इस चतुर्विध व्यवस्था बनाई, जो जैनसङ्घ नाम से प्रसिद्ध है।)
प्र.३ — समस्तपदानि लिखत (Write Compound Words)
निर्देश: विग्रहवाक्य दिया है, उससे समस्तपद बनाइए।
| विग्रहवाक्यम् | समस्तपदम् | समास-नाम | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|---|
| (क) महान् च असौ राजा च | महाराजः | कर्मधारयः | महान राजा |
| (ख) प्रजानां सुखम् | प्रजासुखम् | षष्ठी-तत्पुरुषः | प्रजा का सुख |
| (ग) मूलाः समस्याः | मूलसमस्याः | कर्मधारयः | मूल समस्याएँ |
| (घ) भोजनस्य निर्माणम् | भोजननिर्माणम् | षष्ठी-तत्पुरुषः | भोजन का निर्माण |
| (ङ) आर्थिकी स्थितिः | आर्थिकस्थितिः | कर्मधारयः | आर्थिक स्थिति |
| (च) प्राप्तः आनन्दः येन सः | प्राप्तानन्दः | बहुव्रीहिः | जिसने आनन्द प्राप्त किया |
| (छ) विधिना लिखितम् | विधिलिखितम् | तृतीया-तत्पुरुषः | विधि द्वारा लिखा हुआ / नियतिनिर्धारित |
| (ज) गृहं गृहं प्रति | प्रतिगृहम् | अव्ययीभावः | घर-घर / हर घर में |
| (झ) ब्राह्मीनामा लिपिः | ब्राह्मीलिपिः | मध्यपदलोपी कर्मधारयः | ब्राह्मी नाम की लिपि |
प्र.४ — वाक्यानि उदाहरणानुसारं परिवर्तयत (Karmavachya → Kartrivachya)
उदाहरणम्:
कर्मवाच्यम्: जनैः स्वयमेव निर्माणकार्यम् आरब्धम्।
कर्तृवाच्यम्: जनाः स्वयमेव निर्माणकार्यम् आरब्धवन्तः।नियमः: कर्मवाच्ये — कर्तरि तृतीया विभक्तिः, क्रिया कृदन्तरूपे (क्त-प्रत्ययः)।
कर्तृवाच्ये — कर्तरि प्रथमा, क्रिया कर्त्रनुसारिणी (क्तवतु-प्रत्ययः)।
कर्मवाच्यम्: जनैः स्वयमेव निर्माणकार्यम् आरब्धम्।
कर्तृवाच्यम्: जनाः स्वयमेव निर्माणकार्यम् आरब्धवन्तः।नियमः: कर्मवाच्ये — कर्तरि तृतीया विभक्तिः, क्रिया कृदन्तरूपे (क्त-प्रत्ययः)।
कर्तृवाच्ये — कर्तरि प्रथमा, क्रिया कर्त्रनुसारिणी (क्तवतु-प्रत्ययः)।
| कर्मवाच्यम् | कर्तृवाच्यम् | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| यथा — जनैः स्वयमेव निर्माणकार्यम् आरब्धम्। | जनाः स्वयमेव निर्माणकार्यम् आरब्धवन्तः। | लोगों ने स्वयं ही निर्माण कार्य आरम्भ किया। |
| (क) महाराजेन राज्यं समर्पितम्। | महाराजः राज्यं समर्पितवान्। | महाराज ने राज्य सौंपा। |
| (ख) केनापि तत् न चिन्तितम्। | कोऽपि तत् न चिन्तितवान्। | किसी ने भी वह नहीं सोचा। |
| (ग) ऋषभदेवेन दीर्घकालिकः उपवासः कृतः। | ऋषभदेवः दीर्घकालिकम् उपवासं कृतवान्। | ऋषभदेव ने दीर्घकालिक उपवास किया। |
| (घ) जनैः जीवनपद्धतिः परिवर्तिता। | जनाः जीवनपद्धतिं परिवर्तितवन्तः। | लोगों ने जीवनशैली बदली। |
| (ङ) ऋषभेण योजना कृता। | ऋषभः योजनां कृतवान्। | ऋषभ ने योजना बनाई। |
प्र.५ — सन्धिं कुरुत (Apply Sandhi Rules)
निर्देश: दिए गए पदों में सन्धि करके एक पद बनाइए।
| पद-१ | + | पद-२ | सन्धिपदम् | सन्धि-नाम | हिन्दी |
|---|---|---|---|---|---|
| (क) इति | + | अतः | इत्यतः | यण्-सन्धिः (इ+अ=य) | इसलिए |
| (ख) च | + | इति | चेति | वृद्धि-सन्धिः (अ+इ=ए) | और यह |
| (ग) देवस्य | + | अपि | देवस्यापि | दीर्घ-सन्धिः (अ+अ=आ) | देव का भी |
| (घ) तथा | + | एव | तथैव | वृद्धि-सन्धिः (आ+ए=ऐ) | उसी प्रकार |
| (ङ) इति | + | एतादृशाः | इत्येतादृशाः | यण्-सन्धिः (इ+ए=ये) | इस प्रकार की |
| (च) ब्राह्मीद्वारा | + | एव | ब्राह्मीद्वारैव | वृद्धि-सन्धिः (आ+ए=ऐ) | ब्राह्मी लिपि से ही |
| (छ) प्रस्थितः | + | अयम् | प्रस्थितोऽयम् | विसर्ग-सन्धिः (ः+अ=ो+ऽ) | यह प्रस्थित हुआ |
शब्दार्थाः — सर्वं शब्देन भासते (Key Word Meanings)
| संस्कृत शब्दः | अर्थः | हिन्दी | English |
|---|---|---|---|
| अचिन्तयत् | चिन्तितवान् | विचार किया | Considered |
| अधीतविद्यः | अधीता विद्या येन | पढ़ा-लिखा | Learned |
| अनर्घवस्तूनि | अनर्घाणि वस्तूनि | अनमोल वस्तुएँ | Precious items |
| अनुयायिनः | अनुगामिनः | अनुयायी | Followers |
| अनेकान्तवादः | सत्यस्य बहुपक्षवादः | अनेकान्तवाद | Doctrine of multiplicity |
| अपरिग्रहः | न परिग्रहः | आवश्यकता से अधिक न लेना | Non-possession |
| अरिहन्ताणम् | जितशत्रूणाम् | अरिहन्तों का | Conquerors of enemies |
| आलस्यम् | प्रमादः | आलस्य | Laziness |
| इक्षुक्षेत्रम् | इक्षोः क्षेत्रम् | गन्ने का खेत | Sugarcane field |
| उत्पादनक्षमता | उत्पादनस्य क्षमता | उत्पादन की क्षमता | Productivity |
| उपवासः | निराहारव्रतम् | उपवास | Fasting |
| करुणाशालिनी | दयायुक्ता | दयालु | Compassionate |
| केवलज्ञानम् | कैवल्यस्य ज्ञानम् | केवलज्ञान | Absolute knowledge |
| तीर्थङ्करः | धर्ममार्गप्रदर्शकः | तीर्थंकर | Tirthankara |
| दुर्भिक्षम् | भिक्षायाः अभावः | अकाल | Famine |
| दैवाधीनम् | दैवस्य अधीनम् | भाग्य के अधीन | Dependent on fate |
| नवकारमन्त्रः | जैनप्रार्थनामन्त्रः | नवकार मन्त्र | Navkar mantra |
| निराहारम् | भोजनरहितम् | निराहार / बिना भोजन के | Without food |
| न्यायिकव्यवस्था | न्यायसंबन्धिनी व्यवस्था | न्याय व्यवस्था | Judicial system |
| परित्यज्य | त्यक्त्वा | त्यागकर | Abandoning |
| परिष्काराय | निवारणाय | समाधान के लिए | For rectification |
| ब्राह्मीलिपिः | ब्राह्मीनाम्नी लिपिः | ब्राह्मी लिपि | Brahmi script |
| विक्षुब्धम् | उद्विग्नम् | विचलित | Agitated |
| विधिलिखितम् | विधिना लिखितम् | नियति-निर्धारित | Predestined |
| विद्वेषः | वैरम् | द्वेष | Hatred |
| शाश्वतम् | नित्यम् | शाश्वत / स्थायी | Eternal |
| सम्भ्रान्ताः | किंकर्तव्यमूढाः | घबराए हुए | Perplexed |
| सुप्रतिष्ठितम् | दृढरूपेण स्थापितम् | अच्छी तरह स्थापित | Well established |

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