योऽधीतविद्य: सकलः स सर्वेषां गुरुभवेत्
१. पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत –
(पूर्ण वाक्य में उत्तर लिखिए)
(क) कः सर्वेषां गुरुः भवेत्? (सबका गुरु कौन हो सकता है?)
उत्तर : यः सकलविद्याम् अधीतवान्, सः सर्वेषां गुरुः भवेत्। (जिसने समस्त विद्या का अध्ययन किया है, वही सबका गुरु हो सकता है।)
(ख) कीदृशः राजा चिरं कीर्तिम् अश्नुते? (किस प्रकार का राजा लंबे समय तक यश प्राप्त करता है?)
उत्तर : धर्मनीतिपरः राजा चिरं कीर्तिम् अश्नुते। (धर्म और नीति का पालन करने वाला राजा लंबे समय तक यश प्राप्त करता है।)
(ग) वेदाङ्गानि कानि सन्ति? (वेदों के छह अंग कौन-कौन से हैं?)
उत्तर : शिक्षा, व्याकरणम्, कल्पः, निरुक्तम्, ज्यौतिषम्, छन्दः च वेदाङ्गानि सन्ति। (शिक्षा, व्याकरण, कल्प, निरुक्त, ज्योतिष और छन्द वेदों के छह अंग हैं।)
(घ) किं कलासंज्ञकं स्मृतम्? (किसे कला कहा गया है?)
उत्तर : यत् कर्म मूकः अपि कर्तुं शक्तः भवति, तत् कलासंज्ञकं स्मृतम्। (जिस कार्य को गूँगा व्यक्ति भी कर सकता है, उसे कला कहा गया है।)
(ङ) काः संख्यातुं नैव शक्यन्ते? (किनकी गणना नहीं की जा सकती?)
उत्तर : विद्याः कलाः च अनन्ताः सन्ति, अतः ताः संख्यातुं नैव शक्यन्ते। (विद्याएँ और कलाएँ अनन्त हैं, इसलिए उनकी गणना नहीं की जा सकती।)
(च) किं कर्म विद्याभिसंज्ञकम्? (किस प्रकार का कार्य विद्या कहलाता है?)
उत्तर : यत् वाचिकं कर्म सम्यक् भवति, तत् विद्याभिसंज्ञकम्। (जो कार्य वाणी से अच्छी तरह किया जाता है, वह विद्या कहलाता है।)
२. उचितं विकल्पं चित्वा द्वयोः स्तम्भयोः मेलनं कुरुत –
(उचित विकल्प चुनकर दोनों स्तंभों का मिलान कीजिए)
| अ स्तम्भः (प्रश्न पदम्) | ब स्तम्भः (उत्तर पदम्) | हिन्दी अनुवाद |
| (क) ऋक् | (२) वेदः | ऋग्वेद – वेद |
| (ख) गान्धर्वः | (५) उपवेदः | गंधर्ववेद – उपवेद |
| (ग) व्याकरणम् | (४) वेदाङ्गम् | व्याकरण – वेदांग |
| (घ) अर्थशास्त्रम् | (१) विद्यास्थानम् | अर्थशास्त्र – विद्या का स्थान |
| (ङ) शुक्रनीतिः | (३) नीतिशास्त्रग्रन्थः | शुक्रनीति – नीतिशास्त्र ग्रंथ |
3. अधोलिखितासु पङ्क्तिषु विद्यमानानि सर्वनामानि परिचिनुत रेखाङ्कनं च कुरुत।
(नीचे दी गई पंक्तियों में उपस्थित सर्वनाम शब्दों को पहचानकर रेखांकित कीजिए।)
(क) न च जात्यानधीती यः गुरुः भवितुमर्हति।
जो बिना विद्या पढ़े केवल जाति से गुरु नहीं बन सकता|
उत्तर (संस्कृत): यः। ‘यः’ का अर्थ ‘जो’ है।
(ख) शक्तो मूकः अपि यत् कर्तुं कलासंज्ञं तु तत् स्मृतम्।
जो कर्म गूँगा व्यक्ति भी कर सके, वह कला कहा गया है|
उत्तर (संस्कृत): यत्, तत्। ‘यत्’ का अर्थ ‘जो’ और ‘तत्’ का अर्थ ‘वह’ है।
(ग) देशादिधर्मा द्वात्रिंशत् एताः विद्याभिसंज्ञिताः।
देश आदि से संबंधित ये बत्तीस विद्याएँ कहलाती हैं।।
उत्तर (संस्कृत): एताः। ‘एताः’ का अर्थ ‘ये’ है।
(घ) स्वस्वधर्मपरो लोको यस्य राष्ट्रे प्रवर्तते।
जिस राष्ट्र में लोग अपने-अपने धर्म का पालन करते हैं।
उत्तर (संस्कृत): यस्य। ‘यस्य’ का अर्थ ‘जिसका’ है।
(ङ) धर्मनीतिपरो राजा चिरं कीर्तिं स: चाश्नुते।
धर्म और नीति का पालन करने वाला राजा लंबे समय तक यश प्राप्त करता है।
उत्तर (संस्कृत): सः। ‘सः’ का अर्थ ‘वह’ है।
(च) भूमौ यावद् यस्य कीर्तिस्ततावत् स्वर्गे स तिष्ठति।
जिस व्यक्ति की कीर्ति पृथ्वी पर जितनी दूर तक फैली होती है, वह स्वर्ग में उतने ही समय तक रहता है।
उत्तर (संस्कृत): यावत्, यस्य, ततावत्, सः।
हिन्दी अर्थ:
यावत् — जितनी देर / जितना
यस्य — जिसका
ततावत् — उतनी देर / उतना
सः — वह
४. अधोलिखितेषु उदाहरणेषु सन्धिविच्छेदं कुरुत –
(नीचे दिए गए उदाहरणों में सन्धि-विच्छेद कीजिए)
(क) योऽधीतविद्यः (जिसने विद्या का अध्ययन किया है।)
उत्तर: यः + अधीतविद्यः
(ख) स चाश्नुते (और वह प्राप्त करता है।)
उत्तर: सः + च + अश्नुते
(ग) वेदान्तो योग एव (वेदान्त और योग ही।)
उत्तर: वेदान्तः + योगः + एव
(घ) लोको यस्य (जिसका संसार।)
उत्तर: लोकः + यस्य
(ङ) कीर्तिस्ततावत् (तब तक कीर्ति।)
उत्तर: कीर्तिः + ततावत्
(च) स तिष्ठति (वह रहता है।)
उत्तर: सः + तिष्ठति
(छ) पृथगुच्यते (अलग कहा जाता है।)
उत्तर: पृथक् + उच्यते
5. उदाहरणानुसारं विग्रहवाक्यानां समस्तपदानि पाठात् चित्वा लिखत –
(उदाहरण के अनुसार विग्रह-वाक्यों के समस्त पद पाठ से चुनकर लिखिए)
(क)
विग्रहवाक्यम् (संस्कृत): स्वधर्मे परः
समस्तपदम् (संस्कृत): स्वधर्मपरः
हिन्दी अनुवाद: अपने धर्म/कर्तव्य में तत्पर = स्वधर्मपरः
(ख)
विग्रहवाक्यम् (संस्कृत): देशादीनां धर्माः
समस्तपदम् (संस्कृत): देशादिधर्माः
हिन्दी अनुवाद: देश आदि के धर्म/नियम = देशादिधर्माः
(ग)
विग्रहवाक्यम् (संस्कृत): मीमांसा च तर्कः च साङ्ख्यं च
समस्तपदम् (संस्कृत): मीमांसातर्कसांख्यानि
हिन्दी अनुवाद: मीमांसा, तर्क और सांख्य = मीमांसातर्कसांख्यानि
(घ)
विग्रहवाक्यम् (संस्कृत): विद्या अभिसंज्ञा यस्य तत्
- समस्तपदम् (संस्कृत): विद्याभिसंज्ञकम्
हिन्दी अनुवाद: जिसकी नाम या पहचान ‘विद्या’ हो = विद्याभिसंज्ञकम्
(ङ)
विग्रहवाक्यम् (संस्कृत): देशस्य भाषा
- समस्तपदम् (संस्कृत): देशभाषा
हिन्दी अनुवाद: देश की भाषा = देशभाषा


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