आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः
तृतीयः पाठः | अभ्यास-प्रश्नोत्तराणि (Complete Exercise Q&A)
🙏 नामदेवमहाराजः
📝 व्याकरणम्
💡 उपपदविभक्तयः
- पाठ परिचय — Story Introduction
- १. संस्कृतभाषया प्रश्नोत्तराणि
- २. भूतकालपरिवर्तनम् — Past Tense Conversion
- ३. कः/का — कं/कां प्रति — Who says to Whom
- ४. रेखाङ्कितपद-प्रश्ननिर्माणम् — Form Questions
- ५. घटनाक्रमः — Sequence of Events
- ६. उचितविभक्ति-अनुच्छेदः — Fill with Correct Case
- ७. क्तवतुप्रत्यय-परिवर्तनम् — Convert to क्तवतु
- ८. समस्तपदानि — Find Compound Words
- शब्दार्थाः — Word Meanings
पाठ परिचय — Chapter Introduction
कपिल और माधवी अवकाश में मामा के घर गए। वहाँ उन्होंने एक कुत्ते को देखा और पत्थर लेकर उसे मारने दौड़े। नानी ने यह देखा और उन्हें बुलाकर नामदेव महाराज की कहानी सुनाई — कैसे नामदेव ने भगवान को अर्पित रोटी चुराकर भागते भूखे कुत्ते के पीछे घी का पात्र लेकर दौड़े, क्योंकि उन्हें उसमें भी भगवान दिखे। इस पाठ का मुख्य संदेश है — “आत्मवत् सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः” — जो सभी प्राणियों में अपने जैसा देखता है, वही पंडित है।
‘आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति स पण्डितः।’
(जो सभी प्राणियों में स्वयं को देखता है, वही सच्चा पंडित है।)
१. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत
👉 निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संस्कृत भाषा में लिखिए।
(नानी ने किसकी कहानी सुनाई?)
उत्तरम् — मातामही नामदेवमहाराजस्य कथां श्रावितवती।
(हिन्दी: नानी ने नामदेव महाराज की कहानी सुनाई।)
(नामदेव के गुरु ने नामदेव को क्या पढ़ाया?)
उत्तरम् — नामदेवस्य गुरुः विसोबा नामदेवम् अध्यापितवान् यत् — ‘ईश्वरः न केवलं मन्दिरे भवति, अपि तु सर्वेषु भूतेषु तस्य निवासो भवति। अतः तस्य सर्वात्मकस्य ईश्वरस्य पूजनं कुरु।’
(हिन्दी: गुरु विसोबा ने बताया — ईश्वर केवल मंदिर में नहीं रहते, बल्कि सभी प्राणियों में उनका निवास है। अतः उस सर्वात्मक ईश्वर की पूजा करो।)
(नामदेव किस भावना से दौड़े?)
उत्तरम् — नामदेवः करुणया (दयाभावनया) धावनं कृतवान्। सः घृतपात्रम् आधृत्य धावितवान् यतः तस्य चिन्ता आसीत् यत् यदि शुनकः शुष्करोटिकां खादेत् तर्हि तस्य उदरवेदना भवेत्।
(हिन्दी: नामदेव दया की भावना से दौड़े। उन्होंने घी का पात्र लेकर दौड़े क्योंकि उन्हें चिंता थी कि यदि कुत्ता सूखी रोटी खाएगा तो उसे पेट में दर्द होगा।)
(दोनों बच्चों के चेहरे क्यों मुरझा गए?)
उत्तरम् — बालकयोः मुखे अपराधभावनया म्लाने संजाते। यतः तौ पूर्वं शुनकं ताडितवन्तौ, परन्तु नामदेवः तु शुनकस्य पीडायाः चिन्तां करुणया करोति स्म। अतः तयोः हृदये लज्जा जाता।
(हिन्दी: दोनों के चेहरे अपराध-बोध से मुरझा गए। क्योंकि उन्होंने पहले कुत्ते को मारने की कोशिश की थी, जबकि नामदेव उसी कुत्ते की देखभाल करुणापूर्वक कर रहे थे।)
(कपिल और माधवी ने क्या संकल्प लिया?)
उत्तरम् — कपिलः अवदत् — “अद्य अहं ज्ञातवान् यत् सर्वेषु जीवेषु ईश्वरः निवसति, अतः कमपि न पीडयिष्यामि।” माधवी च अवदत् — “अहमपि कदापि कस्यापि पीडां न जनयिष्यामि।”
(हिन्दी: कपिल ने कहा — अब मैं जानता हूँ कि सब प्राणियों में ईश्वर हैं, अतः किसी को नहीं सताऊँगा। माधवी ने भी कहा — मैं भी कभी किसी को कष्ट नहीं दूँगी।)
(इस वाक्य में ‘तम्’ सर्वनाम किसके लिए प्रयुक्त है?)
उत्तरम् — ‘तम्’ इति सर्वनामशब्दः शुनकस्य (कुत्ते के) कृते प्रयुक्तः।
(हिन्दी: ‘तम्’ सर्वनाम कुत्ते के लिए प्रयुक्त है।)
(कपिल और माधवी कहाँ गए थे?)
उत्तरम् — कपिलः माधवी च अवकाशकाले मातुलगृहं गतवन्तौ।
(हिन्दी: कपिल और माधवी छुट्टी में मामा के घर गए थे।)
(इस वाक्य में ‘तौ’ किस विभक्ति में है?)
उत्तरम् — ‘तौ’ इति शब्दः द्वितीया विभक्तौ, द्विवचने अस्ति। (तौ = कपिलं माधवीं च — दोनों को, कर्म)
(हिन्दी: ‘तौ’ शब्द द्वितीया विभक्ति, द्विवचन में है। इसका अर्थ है — उन दोनों को।)
२. अधोलिखितानि वाक्यानि भूतकालेन परिवर्त्य पुनः लिखत
वर्तमानकाल की क्रिया को भूतकाल में बदलने के लिए क्तवतु-प्रत्यय का प्रयोग होता है।
यथा: गच्छति → गतवान् (पुं. एकवचन) | गच्छतः → गतवन्तौ (द्विवचन)
नामदेवः स्थालिकां स्वीकृत्य मन्दिरं गच्छति →
नामदेवः स्थालिकां स्वीकृत्य मन्दिरं गतवान्।
(इस वाक्य को भूतकाल में बदलिए)
उत्तरम् — नैवेद्यं विग्रहस्य पुरतः स्थापितवान्।
(हिन्दी: उसने प्रसाद की थाली मूर्ति के सामने रखी।)
(भूतकाल में बदलिए)
उत्तरम् — नेत्रे निमील्य प्रार्थनायाः आरम्भं कृतवान्।
(हिन्दी: उसने आँखें बंद करके प्रार्थना शुरू की।)
(भूतकाल में बदलिए)
उत्तरम् — गुरुः विसोबा तम् अध्यापितवान्।
(हिन्दी: गुरु विसोबा ने उसे पढ़ाया / सिखाया।)
(भूतकाल में बदलिए)
उत्तरम् — अहं शृतवान्। (स्त्रीलिङ्गे — शृतवती।)
(हिन्दी: मैंने सुना।)
(भूतकाल में बदलिए)
उत्तरम् — सत्पुरुषाः स्वकर्तृत्वेन जन्म सार्थकं कृतवन्तः।
(हिन्दी: सज्जन पुरुषों ने अपने कर्मों से अपना जन्म सार्थक किया।)
(भूतकाल में बदलिए)
उत्तरम् — नामदेवः शुनकस्य पृष्ठे अनुधावितवान्।
(हिन्दी: नामदेव कुत्ते के पीछे दौड़े।)
३. कः/का — कं/कां च प्रति कथयति — Who Says to Whom
👉 प्रत्येक कथन के लिए वक्ता और श्रोता बताइए।
“हे देव ! शुष्कां रोटिकां न खादतु, घृतमपि स्वीकरोतु।”
→ वक्ता: नामदेवः | श्रोता: शुनकम्
(कौन किससे कह रहा है?)
वक्ता — मातामही | श्रोतारौ — कपिलं माधवीं च
(हिन्दी: नानी ने कपिल और माधवी से पूछा — “क्या कहानी सुनना चाहते हो?”)
(कौन किससे कह रहा है?)
वक्ता — माधवी | श्रोत्री — मातामहीम्
(हिन्दी: माधवी ने नानी से कहा।)
(कौन किससे कह रहा है?)
वक्ता — कपिलः | श्रोत्री — मातामहीम्
(हिन्दी: कपिल ने नानी से पूछा — “क्या भगवान के साथ भी मित्रता हो सकती है?”)
(कौन किससे कह रहा है?)
वक्ता — विसोबा (गुरुः) | श्रोता — नामदेवम्
(हिन्दी: गुरु विसोबा ने नामदेव को उपदेश दिया।)
(कौन किससे कह रहा है?)
वक्ता — नामदेवः | श्रोता — देवम् (पाण्डुरङ्गम्)
(हिन्दी: नामदेव ने भगवान पाण्डुरंग से प्रार्थना की।)
(कौन किससे कह रहा है?)
वक्ता — कपिलः | श्रोत्री — मातामहीम्
(हिन्दी: कपिल ने नानी से कहा — “धिक्कार है उस कुत्ते को।”)
(कौन किससे कह रहा है?)
वक्ता — माधवी | श्रोता — कपिलम् / मातामहीम्
(हिन्दी: माधवी ने कपिल को / नानी को कहा।)
(कौन किससे कह रहा है?)
वक्ता — उभौ (कपिलः माधवी च) | श्रोत्री — मातामहीम्
(हिन्दी: दोनों ने नानी से पूछा — “क्या, घी का पात्र लेकर?”)
(कौन किससे कह रहा है?)
वक्ता — कपिलः | श्रोत्री — मातामहीम्
(हिन्दी: कपिल ने नानी से कहा — “आज मुझे ज्ञात हुआ कि सब में ईश्वर रहते हैं।”)
(कौन किससे कह रहा है?)
वक्ता — पाण्डुरङ्गः | श्रोता — नामदेवम्
(हिन्दी: भगवान पाण्डुरंग ने नामदेव से कहा — “आप परीक्षा में उत्तीर्ण हो गए।”)
४. रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
👉 रेखांकित शब्दों के लिए प्रश्न बनाइए।
पाण्डुरङ्गः नामदेवस्य मित्रम् आसीत्।
→ पाण्डुरङ्गः कस्य मित्रम् आसीत्?
(रेखांकित शब्द के लिए प्रश्न बनाइए)
प्रश्नः — देवः कं परितः भवति स्म?
(हिन्दी: देव किसके आसपास रहते थे?)
(रेखांकित शब्दों के लिए प्रश्न बनाइए)
प्रश्नः — ईश्वरः कुत्र / केषु निवसति?
(हिन्दी: ईश्वर कहाँ / किन-किन में निवास करते हैं?)
(रेखांकित शब्द के लिए प्रश्न)
प्रश्नः — शुनकः आगत्य कुत्र / कस्मिन् रोटिकां धृत्वा धावितवान्?
(हिन्दी: कुत्ता आकर रोटी कहाँ लेकर भागा?)
(रेखांकित शब्द के लिए प्रश्न)
प्रश्नः — शुनकस्य स्थाने कः आविर्भूतवान्?
(हिन्दी: कुत्ते के स्थान पर कौन प्रकट हुए?)
(रेखांकित शब्दों के लिए प्रश्न)
प्रश्नः — आत्मवत् सर्वभूतेषु यः पश्यति सः कः?
(हिन्दी: जो सभी प्राणियों में अपने जैसा देखता है, वह कौन है?)
५. घटनाक्रमानुसारं लिखत — Arrange Events in Order
👉 नामदेव महाराज की घटनाओं को सही क्रम में लिखिए।
सही क्रम — Correct Order:
- (च) नामदेवः मन्दिरं गतवान्।
- (ग) नामदेवः नैवेद्यस्थालिकां विग्रहस्य पुरतः स्थापितवान्।
- (क) नामदेवः मन्त्रम् उच्चार्य श्रद्धया प्रणम्य नेत्रे उद्घाटितवान्।
- (घ) शुनकः शुष्करोटिकाम् अपहृत्य पलायितवान्।
- (ख) नामदेवः घृतपात्रम् आधृत्य अनुधावितवान्।
- (ङ) शुनकस्य स्थाने पाण्डुरङ्गः आविर्भूतवान्।
कथाक्रमः — Story Sequence (विस्तारेण)
- नामदेव प्रतिदिन श्रद्धा और भक्ति से नैवेद्य की थाली लेकर मंदिर जाते थे।
- उन्होंने थाली विग्रह के सामने रखी और प्रार्थना की।
- आँखें खोलने पर रोटी नहीं मिली — एक भूखे कुत्ते ने उठाकर भाग लिया था।
- नामदेव को कुत्ते की पीड़ा की चिंता हुई — उन्होंने घी का पात्र लेकर करुणा से कुत्ते के पीछे दौड़े।
- कुत्ते के स्थान पर स्वयं भगवान पाण्डुरंग प्रकट हुए और बोले — “आप परीक्षा में उत्तीर्ण हो गए।”
६. कोष्ठकेषु दत्तानां पदानाम् उचितां विभक्तिं योजयित्वा अनुच्छेदं पूरयत
👉 “आगच्छन्तु, पायसं कुर्मः” — अनुच्छेद में उचित विभक्ति भरिए।
उचित विभक्तियाँ (Correct Case Forms):
- क्षीरेण (क्षीर + तृतीया) — क्षीरेण सह तण्डुलाः पक्वाः।
- शर्करया (शर्करा + तृतीया) — शर्करया विना कथं शक्यते।
- आपणं (आपण + द्वितीया) — आपणं प्रति गत्वा शर्कराम् आनयतु।
- आपणं (आपण + द्वितीया) — आपणं निकषा वाहनानि तिष्ठन्ति।
- शर्करां (शर्करा + द्वितीया) — शर्करां परितः पिपीलिकाः आगताः।
- मधुरेण (मधुर + तृतीया) — मधुरेण विना पायसं रुचिकरं न भवति।
- पायसं (पायस + द्वितीया) — पायसं परितः बालक-बालिकावृन्दं तिष्ठति।
- अन्यान् मधुरपदार्थान् (द्वितीया) — धिक् अन्यान् मधुरपदार्थान्।
- तेन (तत् + तृतीया) — तेन विना जीवनम् अपूर्णम्।
- पायसेन (पायस + तृतीया) — पायसेन सह एव भोजनं सरसम्।
प्रति + द्वितीया | विना + द्वितीया / तृतीया | निकषा + द्वितीया | परितः + द्वितीया | सह + तृतीया | धिक् + द्वितीया
७. क्तवतुप्रत्ययान्तरूपं योजयित्वा पुनः लिखत
👉 स्थूलाक्षर क्रियापदों को क्तवतु-प्रत्यय के रूप में बदलिए।
| मूलक्रिया (Original) | क्तवतुरूपम् (क्तवतु Form) | हिन्दी अर्थः |
|---|---|---|
| अददात् | दत्तवती | दी / दिया करती थी |
| अजीवन् | जीवितवन्तः | जीए / जीवन जिया |
| अकरोत् | कृतवान् | की / किया |
| अकुर्वन् | कृतवन्तः | किए |
| अपूजयन् | पूजितवन्तः | पूजा की |
| अक्षिपत् | क्षिप्तवान् | फेंका |
| अक्षिपन् | क्षिप्तवन्तः | फेंके |
| अम्रियन्त | मृतवन्तः | मर गए |
| अभवन् | भूतवन्तः | हो गए |
| अवदत् | उक्तवती | बोली / कहा |
| अरोपयत् | रोपितवती | लगाया / रोपित किया |
| अकुर्वन् | कृतवन्तः | किए |
| अशोधयन् | शोधितवन्तः | साफ किया |
| अददात् | दत्तवती | दी |
| अपूजयन् | पूजितवन्तः | पूजा की |
| अकुर्वन् | कृतवन्तः | किए |
८. एतेषां समस्तपदानि पाठात् चित्वा लिखत — Find Compound Words
👉 नीचे दिए विग्रहों के समास-पद पाठ से ढूँढकर लिखिए।
| विग्रहः (Expansion) | समस्तपदम् (Compound Word) | हिन्दी |
|---|---|---|
| यथा — महान् आत्मा, तेषाम् | महात्मनाम् | महात्माओं का |
| (क) घृतस्य पात्रम्, तत् | घृतपात्रम् | घी का पात्र |
| (ख) पाषाणस्य खण्डः, तम् | पाषाणखण्डम् | पत्थर का टुकड़ा |
| (ग) प्रियः सुहृद् | प्रियसुहृत् | प्रिय मित्र |
| (घ) उदरे वेदना | उदरवेदना | पेट का दर्द |
| (ङ) स्वीयः व्यवहारः | स्वीयव्यवहारेण | अपने व्यवहार से |
| (च) जीवनस्य मूल्यानि | जीवनमूल्यानि | जीवन-मूल्य |
| (छ) मातुलस्य गृहम्, तत् | मातुलगृहम् | मामा का घर |
| (ज) नरेषु रत्नानि इव, तेषाम् | नररत्नानाम् | नर-रत्नों का |
| (झ) स्वीयं कर्तृत्वम्, तेन | स्वकर्तृत्वेन | अपने कर्तृत्व से |
| (ञ) अपराधस्य भावना, तया | अपराधभावनया | अपराध-बोध से |
| (ट) गुरोः उपदेशः, तम् | गुरूपदेशम् | गुरु का उपदेश |
| (ठ) दिने दिने | प्रतिदिनम् | प्रतिदिन |
| (ड) राजा ऋषिः इव, तेषाम् | राजर्षीणाम् | राजर्षियों का |
शब्दार्थाः — Word Meanings (सर्वं शब्देन भासते)
| संस्कृत शब्दः | संस्कृत अर्थः | हिन्दी | English |
|---|---|---|---|
| अनुधावितवान् | पृष्ठतः अधावत् | पीछे दौड़ा | Chased |
| अनुपालितवान् | अनुसरणम् अकरोत् | पालन किया | Followed |
| अपहृत्य | चोरयित्वा | चुराकर | Having stolen |
| आविर्भूतवान् | प्रत्यक्षीभूतः | प्रकट हुए | Appeared |
| आलिङ्गनं कृतवन्तौ | आश्लिष्टौ | दोनों गले मिले | Hugged |
| ऋजुता | सरलता | सीधापन | Simplicity |
| करुणया | दयया | दया से | With mercy |
| कायः | देहः | शरीर | Body |
| घृतम् | हविः | घी | Clarified butter |
| दण्डितवन्तौ | दण्डं दत्तवन्तौ | दण्ड दिया | Punished |
| नैवेद्यम् | देवाय समर्पितः पदार्थः | भोग/प्रसाद | Offering to God |
| निकषा | समीपे | पास में | Near |
| निमील्य | पिधाय | बंद करके | Having closed |
| पाषाणखण्डम् | शिलाखण्डम् | पत्थर का टुकड़ा | Piece of stone |
| पुण्यश्लोकः | पवित्र चरित्रवाला | पुण्य-चरित्र | Virtuous character |
| प्रसवित्री | जनयित्री | जन्म देने वाली | One who gives birth |
| ब्रह्मर्षीणाम् | ब्रह्मज्ञानिनाम् ऋषीणाम् | ब्रह्मज्ञानी ऋषियों का | Of Seers of Brahman |
| बुभुक्षितः | क्षुधार्तः | भूखा | Hungry |
| भक्षितवान् | खादितवान् | खाया | Ate |
| मातुलः | मातुः भ्राता | मामा | Maternal uncle |
| म्लाने | कान्तिहीने | कुम्हलाया हुआ | Withered |
| लगुडम् | दण्डम् | लाठी | Stick |
| शिक्षाप्रदा | शिक्षां प्रददाति इति | सीख देने वाली | Which imparts education |
| सुहृत् | सखा | मित्र | Friend |

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