पञ्च शीलानि आचरेम, आदर्शसमाजं रचयेम
प्रश्न 1. एकपदेन उत्तरं लिखत।
(क) जातककथासु बुद्धस्य नाम किमासीत्? (जातक कथाओं में बुद्ध का नाम क्या था?)
उत्तर : बोधिसत्त्वः। (बोधिसत्त्व)
(ख) का बुभुक्षिता आसीत्? (कौन भूखी थी?)
उत्तर : व्याघ्री। (बाघिन)
(ग) बोधिसत्त्वः कथं प्राणान् अत्यजत्? (बोधिसत्त्व ने किस प्रकार प्राण त्यागे?)
उत्तर : योगबलेन। (योगबल से)
(घ) बौद्धधर्मस्य प्रवर्तकः कः? (बौद्ध धर्म के प्रवर्तक कौन हैं?)
उत्तर : गौतमबुद्धः। (गौतम बुद्ध)
(ङ) बौद्धधर्मस्य प्रचाराय कस्याः भाषायाः उपयोगः जातः? (बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए किस भाषा का उपयोग हुआ?)
उत्तर : पालिभाषायाः। (पालि भाषा का।)
प्रश्न 2. पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत।
(क) हिंस्रकाः जन्तवः कथं चरन्ति स्म? (हिंसक जीव किस प्रकार रहते थे?)
उत्तर : बोधिसत्त्वस्य स्नेहकरुणादिभावनाभिः हिंस्रकाः अपि जन्तवः कलहेन विना स्नेहेन चरन्ति स्म।
(बोधिसत्त्व के प्रेम और करुणा आदि भावों के कारण हिंसक जीव भी बिना झगड़े के प्रेमपूर्वक रहते थे।)
(ख) बोधिसत्त्वेन व्याघ्री कदा अवलोकिता? (बोधिसत्त्व ने बाघिन को कब देखा?)
उत्तर : एकदा स्वशिष्येण अजितेन सह वनप्रान्ते भ्रमता बोधिसत्त्वेन व्याघ्री अवलोकिता।
(एक बार अपने शिष्य अजित के साथ वन के किनारे घूमते हुए बोधिसत्त्व ने बाघिन को देखा।)
(ग) बोधिसत्त्वः किं निश्चित्य योगबलेन प्राणान् अत्यजत्? (बोधिसत्त्व ने क्या निश्चय करके योगबल से प्राण त्यागे?)
उत्तर : स्वप्राणरहितेन गात्रेण पुत्रवधरूपात् पापात् व्याघ्र्याः संरक्षणं करोमि इति निश्चित्य बोधिसत्त्वः योगबलेन प्राणान् अत्यजत्।
(यह निश्चय करके कि अपने प्राण त्यागकर वह बाघिन को अपने बच्चों की हत्या जैसे पाप से बचाएगा, बोधिसत्त्व ने योगबल से प्राण त्याग दिए।)
(घ) जनानां दुःखनिवारणाय किम् उपदिष्टवान्? (लोगों के दुःख दूर करने के लिए क्या उपदेश दिया?)
उत्तर : भगवान् बुद्धः जनानां दुःखनिवारणाय चत्वारि आर्यसत्यानि अष्टाङ्गमार्गं च उपदिष्टवान्।
(भगवान बुद्ध ने लोगों के दुःख दूर करने के लिए चार आर्य सत्य और अष्टांग मार्ग का उपदेश दिया।)
(ङ) पञ्चशीलानि किमर्थम् उपदिष्टवान्? (पाँच शीलों का उपदेश किसलिए दिया?)
उत्तर : भगवान् बुद्धः गृहस्थानां नैतिकजीवनस्य निर्वाहणाय पञ्चशीलानि उपदिष्टवान्। (भगवान बुद्ध ने गृहस्थों के नैतिक जीवन के पालन के लिए पाँच शीलों का उपदेश दिया।)
३. कोष्ठकस्य पदानि उपयुज्य घोषवाक्यानि रचयत-
(कोष्ठक के पदों का उपयोग करके घोषवाक्य बनाइए)
(व्यायामः, भीतिः, साधनम्, आहारः, सृष्टिः)
(क) सम्यक् दृष्टिः – सम्यक् सृष्टिः
हिन्दी अनुवाद: सही दृष्टि से सुंदर सृष्टि का निर्माण होता है।
(ख) शुद्धः आहारः –सर्वहितविचारः
हिन्दी अनुवाद: शुद्ध आहार से सबका हित करने वाले विचार आते हैं।
(ग) सम्यक् स्मृतिः –भीतिः परीक्षायां नश्यति
सही स्मरण/याद रखने से परीक्षा में डर नष्ट हो जाता है।
(घ) सत्यं वचनम् –दृढतायाः साधनम्
सत्य बोलना चरित्र की दृढ़ता का साधन है।
(ङ) सम्यक् व्यायामः – स्वास्थ्यरक्षानियमः
उचित व्यायाम स्वास्थ्य की रक्षा का नियम है।
४. रेखाङ्कितं पदम् आदाय प्रश्ननिर्माणं कुरुत-
(रेखांकित पद के आधार पर प्रश्न निर्माण करें)
(क) अहं जीवस्य वधं न करिष्यामि। (मैं किसी जीव का वध नहीं करूँगा।)
उत्तरम् : अहं कस्य वधं न करिष्यामि ? (मैं किसका वध नहीं करूँगा?)
(ख) छात्रः चौर्यं न करिष्यति। (छात्र चोरी नहीं करेगा।)
उत्तरम् : कः चौर्यं न करिष्यति ? (कौन चोरी नहीं करेगा?)
(ग) सामाजिकः व्यभिचारं न करिष्यति। (समाज का व्यक्ति व्यभिचार नहीं करेगा।)
उत्तरम् : सामाजिकः किम् न करिष्यति ? (समाज का व्यक्ति क्या नहीं करेगा?)
(घ) शिशवः असत्यं न वदिष्यन्ति। (बच्चे असत्य (झूठ) नहीं बोलेंगे।)
उत्तरम् : के असत्यं न वदिष्यन्ति ? (कौन असत्य (झूठ) नहीं बोलेंगे?)
(ङ) अहं मद्य-मादक द्रव्याणां प्रमादसाधनानां च सेवनं न करिष्यामि। (मैं मद्य, मादक द्रव्यों और प्रमाद के साधनों का सेवन नहीं करूँगा।)
उत्तरम् : अहं केषाम् च सेवनं न करिष्यामि ? (मैं किनका सेवन नहीं करूँगा?)
५. सन्धिविच्छेदं कुरुत-
(सन्धि-विच्छेद कीजिए)
(क) अधुनापि – अधुना + अपि
(अब भी)
(ख) आधुनिककालेऽपि – आधुनिककाले + अपि
(आधुनिक काल में भी)
(ग) परोपकारार्थम् – परम + उपकार + अर्थम्
(परोपकार के लिए)
(घ) सदाचारः – सत् + आचारः
(अच्छा आचरण)
(ङ) अत्रैव – अत्र + एव
(यहीं पर)
६. समस्तपदस्य विग्रहं लिखत-
(समस्त पद का विग्रह लिखिए)
(क) मधुरव्यवहारः – मधुरः व्यवहारः (कर्मधारयः समासः)
हिन्दी अनुवाद: मीठा या अच्छा व्यवहार
(ख) धर्मसम्मतः – धर्मेण सम्मतः (तृतीयातत्पुरुषः समासः)
हिन्दी अनुवाद: धर्म से सम्मत या अनुकूल
(ग) असत्यम् – न सत्यम् (नञ् तत्पुरुषः समासः)
हिन्दी अनुवाद: जो सत्य न हो (झूठ)
(घ) कृतप्रव्रज्यापरिचयः – कृतः प्रव्रज्यापरिचयः येन सः (बहुव्रीहिः समासः)
हिन्दी अनुवाद: जिसने संन्यास का परिचय प्राप्त कर लिया है
(ङ) परोपकारार्थम् – परोपकारस्य अर्थम् (षष्ठीतत्पुरुषः समासः)
हिन्दी अनुवाद: परोपकार के लिए


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