समथेन कृषिः कार्या लोकानां हितकाम्यया
१. अधः प्रदत्तानां प्रश्नानां पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत-
(नीचे दिए गए प्रश्नों के पूर्ण वाक्य में उत्तर लिखिए)
(क) तुष्टचेतसः के भवन्ति ? (संतुष्ट चित्त वाले कौन होते हैं?)
उत्तरम् : कृषिकार्ये संलग्नाः जनाः तुष्टचेतसः भवन्ति।
(कृषि कार्य में संलग्न (लगे हुए) लोग संतुष्ट चित्त वाले होते हैं।)
(ख) अन्नोपजीविनः के ? (अन्न पर जीवन निर्वाह करने वाले कौन हैं?)
उत्तरम् : देवासुरमनुष्याः सर्वे च अन्नोपजीविनः सन्ति।
(देवता, असुर और मनुष्य—ये सभी अन्न पर जीवन निर्वाह करने वाले हैं।)
(ग) कृष्या विना किं भवति ? (कृषि के बिना क्या होता है?)
उत्तरम् : कृष्या विना धान्यं न भवति।
(कृषि के बिना धान्य (अनाज) उत्पन्न नहीं होता है।)
(घ) सर्वं परित्यज्य किं कारयेत् ? (सब कुछ त्यागकर क्या कराना (करना) चाहिए?)
उत्तरम् : सर्वं परित्यज्य यत्नेन कृषिं कारयेत्।
(सब कुछ त्यागकर प्रयत्नपूर्वक कृषि (खेती) करनी चाहिए।)
(ङ) मानवः भिक्षां कदा प्राप्नोति ? (मनुष्य भिक्षा कब प्राप्त करता है?)
उत्तरम् : यदा मानवः कृषौ असमर्थः भवति, तदा सः भिक्षां प्राप्नोति।
(जब मनुष्य खेती करने में असमर्थ होता है, तब वह भिक्षा प्राप्त करता है।)
(च) माणिक्यादिभिः पूरिताः जनाः भक्ततृष्णया कान् प्रार्थयन्ति ? (मणियों आदि से संपन्न लोग भोजन की इच्छा (भूख) से किनकी प्रार्थना करते हैं?)
उत्तरम् : माणिक्यादिभिः पूरिताः जनाः भक्ततृष्णया कृषकान् प्रार्थयन्ति।
(मणियों आदि से संपन्न लोग भोजन की इच्छा से कृषकों की ही प्रार्थना करते हैं।)
२. रेखाङ्कितानि पदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत-
(रेखांकित पदों के आधार पर प्रश्न निर्माण कीजिए)
(क) अन्नं सर्वार्थसाधनं भवति। (अन्न सभी उद्देश्यों का साधक होता है।)
उत्तरम् : किम् सर्वार्थसाधनं भवति ? (क्या सभी उद्देश्यों का साधक होता है?)
(ख) सर्वं परित्यज्य कृषिं यत्नेन कारयेत्। (सब कुछ त्यागकर कृषि को प्रयत्नपूर्वक कराना चाहिए।)
उत्तरम् : सर्वं परित्यज्य किम् यत्नेन कारयेत् ? (सब कुछ त्यागकर किसे प्रयत्नपूर्वक कराना चाहिए?)
(ग) कृषिकार्ये रताः पुरुषाः गोभूमिदेवभक्ताः भवन्ति। (कृषि कार्य में लगे पुरुष गाय, भूमि और देवताओं के भक्त होते हैं।)
उत्तरम् : कृषिकार्ये रताः के गोभूमिदेवभक्ताः भवन्ति ? (कृषि कार्य में लगे कौन गाय, भूमि और देवताओं के भक्त होते हैं?)
(घ) कृष्या विना धान्यं न भवति। (कृषि के बिना धान्य (अनाज) नहीं होता है।)
उत्तरम् : कया विना धान्यं न भवति ? (किसके बिना धान्य (अनाज) नहीं होता है?)
३. मञ्जूषातः पदानि चित्वा भावार्थेषु रिक्तस्थानानि पूरयत-
(मंजूषा से पद चुनकर भावार्थ के रिक्त स्थान भरिए)
(आघ्राय, विना, परित्यज्य, समर्थन, तुष्टचेतसः, क्षिप्त्वा)
| प्रश्न | संस्कृत में पूर्ण उत्तर | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| (क) कृषिकार्ये रताः जनाः …….. भवन्ति। | कृषिकार्ये रताः जनाः तुष्टचेतसः भवन्ति। | कृषि कार्य में लगे लोग प्रसन्नचित्त होते हैं। |
| (ख) सर्वं …….. कृषिं यत्नेन कारयेत्। | सर्वं परित्यज्य कृषिं यत्नेन कारयेत्। | सब कुछ छोड़कर प्रयत्नपूर्वक खेती करवानी चाहिए। |
| (ग) धान्यं कृष्या …….. न भवति। | धान्यं कृष्या विना न भवति। | कृषि के बिना अनाज उत्पन्न नहीं होता। |
| (घ) लोकानां हितकाम्यया …….. कृषिः कार्या। | लोकानां हितकाम्यया समर्थेन कृषिः कार्या। | लोगों के कल्याण के लिए योग्य व्यक्ति द्वारा खेती की जानी चाहिए। |
| (ङ) कृषकः पात्रस्थसलिले मृत्तिकाम् …….. मृदं परीक्षते। | कृषकः पात्रस्थसलिले मृत्तिकाम् आघ्राय मृदं परीक्षते। | किसान मिट्टी को सूँघकर उसकी जाँच करता है। |
| (च) कृषकः मृत्तिकाम् …….. कृषिभूमिं परीक्षते। | कृषकः मृत्तिकाम् क्षिप्त्वा कृषिभूमिं परीक्षते। | किसान मिट्टी डालकर कृषि-भूमि की जाँच करता है। |
प्रश्न 4. रेखाङ्कित-पदानां सन्धिविच्छेदं कुरुत।
रेखांकित पदों का संधि-विच्छेद कीजिए।
(क) सर्वे चान्नोपजीविनः।
उत्तर: च + अन्नोपजीविनः
(अन्न पर जीवन-निर्वाह करने वाले)
(ख) प्रार्थको नैव जायते।
उत्तर: न + एव
(नहीं ही)
(ग) गोभूमिदेवभक्ताश्च नितरां सत्यवादिनः।
उत्तर: गोभूमिदेवभक्ताः + च।
(गाय, भूमि और देवताओं के भक्त भी।)
(घ) मृदं तोलयित्वाऽपि वा क्वचित्।
उत्तर: तोलयित्वा + अपि।
(तौलकर भी।)
(ङ) घना स्निग्धा च भूरपि।
उत्तर: भूः + अपि।
(भूमि भी।)


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