प्रश्न 1. अधः प्रदत्तानां प्रश्नानां पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत्।
नीचे दिए गए प्रश्नों के पूर्ण वाक्य में उत्तर लिखिए।
(क) विद्या कस्य मित्रं भवति? (विद्या किसकी मित्र होती है?)
उत्तर : विद्या प्रवसतः मित्रं भवति।
(विद्या विदेश में रहने वाले व्यक्ति की मित्र होती है।)
(ख) कीदृशः पुरुषः मृतः? (कैसा पुरुष मृतक के समान होता है?)
उत्तर : दरिद्रः पुरुषः मृतः भवति।
(निर्धन पुरुष मृतक के समान होता है।)
(ग) तपसः किं लक्षणं प्रोक्तम्? (तप का क्या लक्षण बताया गया है?)
उत्तर : स्वधर्मवर्तित्वं तपसः लक्षणं प्रोक्तम्।
(अपने धर्म का पालन करना तप का लक्षण बताया गया है।)
(घ) कः शमः प्रकीर्तितः? (शम किसे कहा गया है?)
उत्तर : चित्तप्रशान्तता शमः प्रकीर्तितः।
(मन की शान्ति को शम कहा गया है।)
(ङ) कः पुंसां दुर्जयः शत्रुः? (मनुष्यों का कठिनाई से जीता जाने वाला शत्रु कौन है?)
उत्तर : क्रोधः पुंसां दुर्जयः शत्रुः।
(क्रोध मनुष्यों का कठिनाई से जीता जाने वाला शत्रु है।)
(च) धर्मज्ञः पण्डितः ज्ञेयः? (धर्म को जानने वाले व्यक्ति को क्या समझना चाहिए?)
उत्तर : धर्मज्ञः पण्डितः ज्ञेयः।
(धर्म को जानने वाले व्यक्ति को विद्वान समझना चाहिए।)
(छ) भूतानि कुत्र गच्छन्ति? (प्राणी कहाँ जाते हैं?)
उत्तर : भूतानि यमालयं गच्छन्ति।
(प्राणी यमलोक में जाते हैं।)
2. रेखाङ्कितानि पदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत-
रेखांकित पदों के आधार पर प्रश्न बनाइए।
(क) भार्या मित्रं गृहे सतः। (घर में रहने वाले व्यक्ति की पत्नी उसकी मित्र होती है।)
उत्तर: कः मित्रं गृहे सतः। (कौन घर में (स्थित) मित्र है?)
(ख) मनसो दमनं दमः। (मन को वश में करना दम कहलाता है।)
उत्तर: कस्य दमनं दमः। (किसका दमन ‘दम’ (आत्मनियंत्रण) कहलाता है?)
(ग) शमः चित्तप्रशान्तता। (मन की शान्ति शम कहलाती है।)
उत्तर: कः चित्तप्रशान्तता। (क्या चित्त की शांति है?)
(घ) गृहे शाकं पचति। (वह घर में सब्जी पकाता है।)
उत्तर: कुत्र शाकं पचति। (कहाँ साग पकता है?)
(ङ) शेषाः जीवितुम् इच्छन्ति। (शेष लोग जीवित रहना चाहते हैं।)
उत्तर: के जीवितुम् इच्छन्ति। (कौन जीना चाहते हैं?)
३. अधोलिखितं श्लोकं पठित्वा प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत।
नीचे दिए गए श्लोक को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर लिखिए।
क्रोधः सुदुर्जयः शत्रुर्लोभो व्याधिरनन्तकः ।
सर्वभूतहितः साधुरसाधुर्निर्दयः स्मृतः ॥
(क) कः शत्रुः? (शत्रु कौन है?)
उत्तर : क्रोधः शत्रुः। (क्रोध शत्रु है।)
(ख) कः व्याधिः? (रोग क्या है?)
उत्तर : लोभः व्याधिः। (लोभ रोग है।)
(ग) कः सर्वभूतहितः? (सभी प्राणियों का हित करने वाला कौन है?)
उत्तर : साधुः सर्वभूतहितः। (सज्जन सभी प्राणियों का हित करने वाला है।)
(घ) कः निर्दयः स्मृतः? (निर्दयी किसे माना गया है?)
उत्तर : असाधुः निर्दयः स्मृतः। (दुर्जन को निर्दयी माना गया है।)
(ङ) क्रोधः कीदृशः शत्रुः? (क्रोध कैसा शत्रु है?)
उत्तर : क्रोधः सुदुर्जयः शत्रुः। (क्रोध कठिनाई से जीता जाने वाला शत्रु है।)
(च) लोभः कीदृशः व्याधिः? (लोभ कैसा रोग है?)
उत्तर : लोभः अनन्तकः व्याधिः। (लोभ कभी समाप्त न होने वाला रोग है।)
(छ) साधुः कीदृशः? (सज्जन कैसा होता है?)
उत्तर : साधुः सर्वभूतहितः। (सज्जन सभी प्राणियों का हित करने वाला होता है।)
४. रेखाङ्कितानां पदानां सन्धिविच्छेदं कुरुत-
रेखांकित पदों का संधि-विच्छेद कीजिए।
(क) आतुरस्य भिषङ्गित्रम्
(रोगी (बीमार) का वैद्य (डॉक्टर) मित्र होता है।)
भिषक् + मित्रम्
(ख) मृतं राष्ट्रमराजकम्
(राजा (शासन) के बिना राष्ट्र मृत के समान होता है।)
राष्ट्रम् + अराजकम्
(ग) तपसः किं लक्षणं प्रोक्तम्
(तपस्या का क्या लक्षण कहा गया है।)
प्र + उक्तम्
(घ) कश्च व्याधिरनन्तकः ?
(और कौन सा रोग कभी समाप्त न होने वाला है?)
कः + च
(ङ) साधुरसाधुः कीदृशः स्मृतः ?
(सज्जन और दुर्जन (असाधु) कैसे कहे गए हैं?)
साधुः + असाधुः
(च) शत्रुर्लोभो व्याधिरनन्तकः
(लोभ कभी न समाप्त होने वाला रोग है।)
व्याधिः + अनन्तकः
(छ) पञ्चमेऽहनि षष्ठे वा
(पाँचवें या छठे दिन (संदर्भ: गृहस्थ भोजन से)।)
पञ्चमे + अहनि
५. समस्तपदानि पाठात् चित्वा लिखत-
पाठ से समस्त पदों को चुनकर लिखिए।
| विग्रहवाक्यानि (विग्रह) | समस्तपदानि (समस्त पद) | हिन्दी अर्थ |
अकार्यात् निवर्तनम् | अकार्यनिवर्त्तनम् | बुरे कार्यों से दूर रहना |
(क) तत्त्वार्थस्य सम्बोधः | तत्त्वार्थसम्बोधः | यथार्थ सत्य का ज्ञान |
(ख) चित्तस्य प्रशान्तता | चित्तप्रशान्तता | मन की शांति |
(ग) सर्वेषां सुखैषित्वम् | सर्वसुखैषित्वम् | सभी के लिए सुख की कामना |
(घ) निर्गता दया यस्मात् सः | निर्दयः | जो दया से रहित हो (निर्दयी) |


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