अहम् अस्मि भारतस्य संविधानम् (मैं भारत का संविधान हूँ।)
इस पाठ में विद्यार्थियों को भारत के संविधान-सदन के केंद्रीय कक्ष में दिखाया गया है। वहाँ विद्यार्थी संविधान के बारे में चर्चा करते हैं। इसके बाद संविधान स्वयं अपने बारे में बताता है।
संविधान स्वयं को भारत की आत्मा, राष्ट्र की नियम-संहिता और जीवन का मार्गदर्शक बताता है। वह न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता इन चार आधार-स्तंभों के द्वारा भारत के लोकतंत्र को मजबूत करता है। राष्ट्र की एकता, अखंडता, न्याय और शांति की स्थापना उसका मुख्य लक्ष्य है।
संविधान के तीन अंग बताए गए हैं—विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका। विधायिका नीतियों का निर्माण करती है, कार्यपालिका उन नीतियों को लागू करती है और न्यायपालिका जनता को न्याय तथा उनके अधिकारों की रक्षा करती है।
संविधान के अनुसार सभी भारतीय समान हैं। यह सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, उपासना-पद्धति को स्वीकार करने की स्वतंत्रता और समान अवसर की भावना को महत्व देता है। व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्रीय एकता भी इसके महत्वपूर्ण भाव हैं।
संविधान नागरिकों को मौलिक अधिकारों के बारे में बताता है और उनके अधिकारों की रक्षा करता है। साथ ही, यह नागरिकों के कर्तव्यों को भी बताता है। इनमें संविधान का आदर, आदर्शों का सम्मान, देश की एकता और अखंडता, देश की रक्षा, भ्रातृत्व की भावना, सांस्कृतिक महत्व, पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा और उत्कृष्टता के लिए प्रयास आदि शामिल हैं।
पाठ में प्राचीन भारतीय ग्रंथों के कुछ विचारों को भी संविधान की भावना से जोड़ा गया है। “संगच्छध्वं संवदध्वम्” मिलकर चलने और मिलकर बोलने की भावना को व्यक्त करता है। “उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्” सभी की उन्नति की भावना को दर्शाता है। “आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः” अच्छे विचारों को स्वीकार करने की भावना बताता है।
पाठ में यह भी बताया गया है कि संविधान समय, संदर्भ और आवश्यकताओं के अनुसार संशोधनों द्वारा नित्य नवीन होता रहता है। वह केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को अधिकार प्रदान करता है तथा संसदीय शासन-पद्धति को प्रवर्तित करता है। इसमें जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनकर संसद में भेजती है, इसलिए जनमत का विशेष महत्व है।
अंत में संविधान सभी नागरिकों के सुख, स्वास्थ्य और कल्याण की कामना करता है। विद्यार्थी “जयतु भारतम्! जयतु संविधानम्!” कहकर पाठ का समापन करते हैं।

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