
सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम्
कवि वासुदेव-शास्त्रि-द्विवेदि रचित गीतम् — पाठ्यपुस्तकम् : शारदा
📗 हिन्दी अनुवादः
🕉️ संस्कृतमहिमा
संस्कृत सारांशः
यह पाठ कवि वासुदेव-शास्त्रि-द्विवेदि द्वारा रचित एक सुन्दर गीत है। इसमें संस्कृत भाषा की महिमा का वर्णन किया गया है।
यह पाठ कवि वासुदेव-शास्त्रि-द्विवेदि द्वारा रचित एक सुन्दर गीत है। इस गीत में कवि संस्कृत भाषा की महिमा का वर्णन करते हैं। संस्कृत भारतीयों में एकता लाने वाली है और भारतीयत्व (भारतीय होने का गुण) प्रदान करती है। यह भाषा ज्ञान के समूह का प्रकाश दिखाती है और सदा आनन्द देती है। संस्कृत सभी लोगों के मस्तिष्क को संस्कारित करती है, वाणी को शुद्ध करती है, सत्य मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है और सद्गुणों के समूह को जोड़ती है। यह भाषा विश्व-बन्धुत्व को बढ़ाती है, सभी प्राणियों में एकता का भाव जगाती है और सर्वत्र शान्ति स्थापित करती है। संस्कृत त्याग, सन्तोष और सेवा का व्रत है। यह विश्व-कल्याण में निष्ठा देती है तथा ज्ञान और विज्ञान दोनों को एक साथ जोड़ती है। संस्कृत के द्वारा धर्म, काम, अर्थ और मोक्ष — चारों पुरुषार्थ प्राप्त होते हैं। इस लोक और परलोक दोनों में संस्कृत से उन्नति मिलती है। कर्म, ज्ञान और भक्ति — तीनों मार्ग संस्कृत से सिद्ध होते हैं। इसीलिए संस्कृत सत्य, कल्याणकारी और सुन्दर है। संस्कृत शब्दों की सुन्दरता का उद्यान और मधुरता की धाराओं से भरा घर है। संस्कृत को सुनकर संसार के लोग चमत्कृत हो जाते हैं। ऐसी संस्कृत हमारे पूर्वजों की कीर्ति की स्मारक भी है।

Leave a Reply