सा देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेणा संस्थिता
(जो देवी सभी प्राणियों में शक्ति के रूप में स्थित हैं।)
यह पाठ अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम पर आधारित है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जिला प्रशासन अधिकारी युगंधरा और अध्यक्ष पूर्व न्यायाधीश अन्वीक्षा उपस्थित थीं। इस अवसर पर महिलाओं की शक्ति, साहस, बुद्धि और उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गया।
युगंधरा जी ने बताया कि महिलाओं के वास्तविक आभूषण बुद्धि, उत्साह, स्मृति, प्रज्ञा, कला, धैर्य और सहिष्णुता हैं। उन्होंने प्राचीन काल की वीरांगना विश्पला का उदाहरण दिया। युद्ध में विश्पला का पैर घायल होने पर भी उसका साहस कम नहीं हुआ। अश्विनीकुमारों ने उसके लिए लोहे का पैर बनाया, जिसके बाद उसने पुनः युद्ध करके विजय प्राप्त की।
इसके बाद आधुनिक युग की वीरांगना गुंजन सक्सेना का वर्णन किया गया। वे भारतीय वायुसेना की पहली महिला युद्ध पायलट बनीं। कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने घायल और संकटग्रस्त सैनिकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया तथा वीरता और धैर्य का परिचय दिया।
पाठ में बताया गया है कि यदि समाज महिलाओं को प्रोत्साहन और सहयोग दे, तो वे सफलता की ऊँचाइयों तक पहुँच सकती हैं। महिलाओं की सर्वांगीण उन्नति से परिवार में समरसता, समाज में एकता और देश का तेज विकास संभव है। अंत में महिलाओं की प्राकृतिक गुण-शक्तियों को उत्तम शिक्षा और संस्कारों के माध्यम से विकसित करने का संदेश दिया गया है।

Leave a Reply