काव्य – खंड Chapter 1 पद Chapter 2 राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद Chapter 3 आत्मकथा Chapter 4 उत्साह और अट नहीं रही Chapter 5 यह दंतुरहित मुस्कान और फसल Chapter 6 संगतकार गद्य – खंड Chapter 7 नेताजी का चश्मा Chapter 8 बालगोबिन भगत Chapter 9 लखनवी अंदाज़ Chapter 10 एक कहानी यह भी Chapter 11 नौबतखाने […]
Short Questions प्रश्न 1. जल का नवीकरण किसके द्वारा होता है? उत्तर: जल का नवीकरण जलीय चक्र द्वारा होता है। प्रश्न 2. जल दुर्लभता का मुख्य कारण क्या है? उत्तर: जल का अतिशोषण और असमान वितरण। प्रश्न 3. भारत में कुल विद्युत का लगभग कितना प्रतिशत जल विद्युत से प्राप्त होता है? उत्तर: लगभग 22 […]
कारतूस अध्याय – कारतूस (हबीब तनवीर) : सारांश हबीब तनवीर (1923–2009) भारत के प्रसिद्ध नाटककार, निर्देशक और अभिनेता थे। उन्होंने लोकनाट्य को आधुनिक रंगमंच से जोड़कर नया स्वरूप दिया। उनके नाटकों में यथार्थ, ऐतिहासिकता और लोकजीवन की गहरी झलक मिलती है। प्रस्तुत एकांकी “कारतूस” सन् 1799 की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिसमें अवध के बहादुर […]
Short Questions प्रश्न 1. जैव विविधता से क्या अभिप्राय है? उत्तर: पौधों, पशुओं और सूक्ष्म जीवों की विभिन्नता को जैव विविधता कहते हैं। प्रश्न 2. भारत में विश्व की कुल जैव उपजातियों का लगभग कितना प्रतिशत पाया जाता है? उत्तर: लगभग 8 प्रतिशत। प्रश्न 3. भारतीय वन्यजीवन (रक्षण) अधिनियम कब लागू हुआ? उत्तर: वर्ष 1972 […]
पतझर में टूटी पत्तियाँ अध्याय – पतझर में टूटी पत्तियाँ (रवींद्र केलेकर) : सारांश रवींद्र केलेकर (1925–2010) कोंकणी और मराठी के प्रसिद्ध लेखक थे। वे गांधीवादी चिंतक और समाज सुधारक के रूप में भी जाने जाते हैं। उनकी रचनाओं में सरल भाषा, मौलिक विचार और जीवन के गहरे सत्य मिलते हैं। प्रस्तुत पाठ “पतझर में […]
अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले अध्याय – अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले (निदा फ़ाज़ली) : सारांश निदा फ़ाज़ली (1938–2016) उर्दू साहित्य के प्रसिद्ध कवि और गद्यकार थे। उनकी विशेषता यह थी कि वे आम बोलचाल की भाषा में गहरी बातें बहुत सरलता से कह देते थे। प्रस्तुत […]
तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र अध्याय – तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र (प्रहलाद अग्रवाल) : सारांश प्रहलाद अग्रवाल ने इस पाठ में कवि और गीतकार शैलेंद्र के फ़िल्म निर्माण से जुड़े योगदान को विस्तार से बताया है। शैलेंद्र मूलतः कवि और गीतकार थे, जिन्होंने अनेक लोकप्रिय गीत लिखे, परंतु उन्होंने जब फणीश्वरनाथ रेणु की प्रसिद्ध […]
तताँरा-वामीरो कथा अध्याय – तताँरा–वामीरो कथा (लीलाधर मंडलोई) : सारांश लीलाधर मंडलोई मूलतः कवि हैं, जिनकी रचनाओं में लोकजीवन और लोककथाओं का गहरा प्रभाव दिखाई देता है। प्रस्तुत पाठ “तताँरा–वामीरो कथा” अंदमान-निकोबार द्वीपसमूह की एक लोककथा पर आधारित है, जिसमें प्रेम, परंपरा और त्याग की मार्मिक गाथा प्रस्तुत की गई है। निकोबारियों का विश्वास है […]
Short Questions प्रश्न 1. संसाधन कितने प्रकार के होते हैं उत्पत्ति के आधार पर? उत्तर: दो प्रकार के – जैव और अजैव। प्रश्न 2. काली मृदा को और किस नाम से जाना जाता है? उत्तर: रेगर मृदा या कपास मृदा। प्रश्न 3. लेटराइट शब्द किस भाषा से लिया गया है और इसका अर्थ क्या है? […]
डायरी का एक पन्ना अध्याय – डायरी का एक पन्ना (सीताराम सेकसरिया) : सारांश सीताराम सेकसरिया (1892–1982) स्वतंत्रता आंदोलन के सक्रिय कार्यकर्ता और समाजसेवी थे। उन्होंने विद्यालयी शिक्षा नहीं पाई, लेकिन स्वाध्याय से ज्ञान अर्जित किया। वे अनेक साहित्यिक, सांस्कृतिक और नारी-शिक्षण संस्थाओं से जुड़े रहे तथा महात्मा गांधी, रवींद्रनाथ ठाकुर और नेताजी सुभाषचंद्र बोस […]
बड़े भाई साहब अध्याय – बड़े भाई साहब (प्रेमचंद) : सारांश मुंशी प्रेमचंद हिंदी के महान यथार्थवादी कथाकार थे। उनकी कहानियों में आम आदमी का जीवन, दुख-दर्द और वास्तविकता बहुत सजीव रूप में मिलती है। प्रस्तुत कहानी “बड़े भाई साहब” में लेखक ने दो भाइयों के आपसी रिश्ते, पढ़ाई और जीवन के अनुभवों को बहुत […]
आत्मत्राण अध्याय – आत्मत्राण (रवींद्रनाथ ठाकुर) : सारांश रवींद्रनाथ ठाकुर (1861–1941) का जन्म बंगाल के एक समृद्ध परिवार में हुआ। वे भारत के पहले साहित्यकार थे जिन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होंने कविताएँ, कहानियाँ, उपन्यास, निबंध और गीत लिखे तथा शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में शांति निकेतन जैसी अनूठी संस्था की स्थापना […]
कर चले हम फ़िदा अध्याय – कर चले हम फ़िदा (कैफ़ी आज़मी) : सारांश कैफ़ी आज़मी (1919–2002) प्रगतिशील उर्दू कवियों की पहली पंक्ति में गिने जाते हैं। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ ज़िले के मजमां गाँव में हुआ था। वे अपनी कविताओं में सामाजिक चेतना, राजनीतिक दृष्टि और मानवीय संवेदनाओं का सुंदर संगम प्रस्तुत […]
तोप अध्याय – कर चले हम फ़िदा (कैफ़ी आज़मी) : सारांश कैफ़ी आज़मी (1919–2002) प्रगतिशील उर्दू कवियों की पहली पंक्ति में गिने जाते हैं। उनकी कविताओं में सामाजिक चेतना, राजनीतिक दृष्टि और गहरी संवेदनशीलता का अद्भुत मेल मिलता है। प्रस्तुत कविता “कर चले हम फ़िदा” फ़िल्म हकीकत (1962 के भारत-चीन युद्ध की पृष्ठभूमि) के लिए […]
पर्वत प्रदेश में पावस अध्याय – पर्वत प्रदेश में पावस (सुमित्रानंदन पंत) : सारांश सुमित्रानंदन पंत छायावाद के प्रमुख कवि हैं। उनकी कविताओं में प्रकृति-सौंदर्य, मानवता और कोमल भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। प्रस्तुत कविता “पर्वत प्रदेश में पावस” में उन्होंने वर्षा ऋतु के समय पहाड़ी अंचल का अत्यंत मनोहारी और सजीव […]
मनुष्यता अध्याय – मनुष्यता (मैथिलीशरण गुप्त) : सारांश मैथिलीशरण गुप्त का जन्म 1886 ई. में झाँसी के पास चिरगाँव में हुआ था। वे राष्ट्रकवि के रूप में प्रसिद्ध हुए। उनकी कविताओं में भारतीय संस्कृति, इतिहास और आदर्श जीवन मूल्यों का चित्रण मिलता है। प्रस्तुत कविता “मनुष्यता” में कवि ने सच्चे मनुष्य की पहचान और जीवन […]
पद अध्याय – मीरा : सारांश मीराबाई का जन्म सन् 1503 में जोधपुर जिले के कुड़की गाँव में हुआ था। 13 वर्ष की आयु में उनका विवाह मेवाड़ के महाराणा सांगा के पुत्र भोजराज से हुआ। विवाह के कुछ ही वर्षों बाद पति, पिता और श्वसुर का निधन हो गया। इन दुखद घटनाओं ने उनके […]
साखी अध्याय – कबीर की साखियाँ : सारांश कबीर का जन्म सन् 1398 में काशी में हुआ माना जाता है। वे संत रामानंद के शिष्य थे और लगभग 120 वर्ष तक जीवित रहे। अपने जीवन के अंतिम समय में वे मगहर में रहे और वहीं देहत्याग किया। कबीर ऐसे समय में प्रकट हुए जब समाज […]
टोपी शुक्ला अध्याय – टोपी शुक्ला : सारांश “टोपी शुक्ला” उपन्यास का यह अंश समाज में पनप रही संकीर्ण मानसिकता, धार्मिक भेदभाव और पारिवारिक उपेक्षा को उजागर करता है। कहानी का नायक बलभद्र नारायण शुक्ला (टोपी) है, जिसका पहला और सबसे गहरा दोस्त इफ़्फ़न (सय्यद जरगाम मुरतुजा) था। दोनों अलग-अलग धर्म और परिवार से थे, […]
सपनों के-से दिन अध्याय – सपनों के-से दिन : सारांश इस आत्मकथात्मक संस्मरण में लेखक ने अपने बचपन और स्कूली दिनों की यादों को बड़े सहज और मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया है। वे बताते हैं कि उनके साथ खेलने वाले ज़्यादातर बच्चे गरीब परिवारों से थे। सब नंगे पाँव, फटे-पुराने कपड़े पहने रहते, खेलते […]
हरिहर काका अध्याय – हरिहर काका : सारांश यह कहानी समाज में हो रहे स्वार्थ, छल और धर्म के नाम पर होने वाले शोषण को उजागर करती है। हरिहर काका गाँव के एक सरल, ईमानदार और धर्मनिष्ठ किसान हैं। उनके कोई संतान नहीं है, इसलिए वे भाइयों के परिवार के साथ रहते हैं। जीवन भर […]
मैं क्यों लिखता हूँ? अध्याय – मैं क्यों लिखता हूँ? : सारांश अज्ञेय इस निबंध में लेखक के लेखन की वास्तविक प्रेरणा और उसके पीछे की आंतरिक विवशता को स्पष्ट करते हैं। वे कहते हैं कि “मैं क्यों लिखता हूँ?” यह प्रश्न सरल लगने पर भी अत्यंत कठिन है, क्योंकि इसका उत्तर लेखक के भीतरी […]
साना-साना हाथ जोड़ि अध्याय – साना-साना हाथ जोड़ि : सारांश इस पाठ में लेखिका मधु कांकरिया ने सिक्किम यात्रा का आत्मीय और भावनात्मक वृत्तांत प्रस्तुत किया है। गंगटोक से यूमथांग और कटाओ तक के सफ़र में उन्होंने प्रकृति की अलौकिक सुंदरता, वहाँ के जनजीवन और कठिन परिस्थितियों का सजीव चित्रण किया है। लेखिका गंगटोक शहर […]
माता का आँचल अध्याय – माता का अँचल : सारांश प्रस्तुत अंश शिवपूजन सहाय के उपन्यास ‘देवरानी जेठानी’ से लिया गया है। इसमें लेखक ने अपने बचपन की मार्मिक स्मृतियों को आत्मकथात्मक शैली में प्रस्तुत किया है। कथा का मुख्य पात्र छोटा बालक भोलानाथ (तारकेश्वरनाथ) है, जो अपने पिता के साथ अधिक समय बिताता है। […]
संस्कृति अध्याय – संस्कृति : सारांश भदंत आनंद कौसल्यायन का जन्म सन् 1905 में पंजाब के अंबाला जिले के सोहाना गाँव में हुआ। उनका बचपन का नाम हरनाम दास था। वे बौद्ध भिक्षु बने और आजीवन बौद्ध धर्म तथा हिंदी भाषा-साहित्य के प्रचार-प्रसार में लगे रहे। उन्होंने अनेक देशों की यात्राएँ कीं और बीस से […]
नौबतखाने में इबादत अध्याय – नौबतखाने में इबादत : सारांश यह पाठ प्रसिद्ध शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ के जीवन और साधना पर आधारित है। लेखक यतींद्र मिश्र ने बड़े भावपूर्ण ढंग से खाँ साहब के व्यक्तित्व, उनके संगीत प्रेम और उनकी सादगी का चित्रण किया है। बिस्मिल्ला खाँ का जन्म सन् 1916 में बिहार […]
एक कहानी यह भी अध्याय – एक कहानी यह भी (मन्नू भंडारी) : सारांश मन्नू भंडारी का जन्म सन् 1931 में मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के भानपुरा गाँव में हुआ था। वे स्वातंत्र्योत्तर हिंदी कथा साहित्य की प्रमुख हस्ताक्षर रहीं। उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में आपका बंटी और महाभोज उपन्यास, मैं हार गई और त्रिशंकु […]
लखनवी अंदाज़ अध्याय – लखनवी अंदाज़ : सारांश यशपाल का जन्म सन् 1903 में फीरोज़पुर (पंजाब) में हुआ था। वे स्वतंत्रता संग्राम की क्रांतिकारी धारा से जुड़े और भगत सिंह व सुखदेव के सहकर्मी रहे। उनकी रचनाओं में आम आदमी की समस्याएँ, सामाजिक विषमता और राजनीतिक पाखंड पर तीखा प्रहार मिलता है। उनकी भाषा सहज […]
बालगोबिन भगत अध्याय – बालगोबिन भगत : सारांश रामवृक्ष बेनीपुरी का जन्म सन् 1899 में बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के बेनीपुर गाँव में हुआ था। उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा और वे राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन से भी जुड़े। उन्हें ‘कलम का जादूगर’ कहा जाता है। प्रस्तुत पाठ उनका प्रसिद्ध रेखाचित्र “बालगोबिन भगत” है, जिसमें […]
नेताजी का चश्मा अध्याय – नेताजी का चश्मा : सारांश स्वयं प्रकाश का जन्म सन् 1947 में इंदौर (मध्यप्रदेश) में हुआ था। इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने नौकरी की, परंतु बाद में वे साहित्य से जुड़े। वे समकालीन कहानी के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर रहे और उनकी कहानियों में मध्यवर्गीय जीवन, सामाजिक भेदभाव और वर्ग-शोषण […]
संगतकार अध्याय – मंगलेश डबराल : सारांश मंगलेश डबराल का जन्म सन् 1948 में उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले के काफलपानी गाँव में हुआ। उनकी शिक्षा देहरादून में हुई। साहित्य और पत्रकारिता दोनों क्षेत्रों में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने हिंदी पेट्रियट, प्रतिपक्ष, आसपास जैसे पत्रों में काम किया, फिर पूर्वग्रह पत्रिका के सहायक संपादक […]
यह दंतुरहित मुस्कान और फसल अध्याय – नागार्जुन : सारांश नागार्जुन का जन्म सन् 1911 में बिहार के दरभंगा जिले के सतलखा गाँव में हुआ। उनका वास्तविक नाम वैद्यनाथ मिश्र था। प्रारंभिक शिक्षा संस्कृत पाठशाला में हुई, बाद में वे बनारस और कलकत्ता पढ़ने गए। सन् 1936 में वे श्रीलंका गए और बौद्ध धर्म में […]
उत्साह और अट नहीं रही अध्याय – सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ : सारांश सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का जन्म सन् 1899 में बंगाल के महिषादल में हुआ था, उनका मूल निवास उन्नाव (उत्तर प्रदेश) का गढ़ाकोला गाँव था। उनकी शिक्षा नौवीं तक ही हो पाई, परंतु स्वाध्याय से उन्होंने संस्कृत, बांग्ला और अंग्रेज़ी का गहन अध्ययन किया। […]
आत्मकथ्य अध्याय – जयशंकर प्रसाद : सारांश जयशंकर प्रसाद का जन्म सन् 1889 में वाराणसी में हुआ। उन्होंने क्वींस कॉलेज, काशी में पढ़ाई शुरू की लेकिन परिस्थितियाँ अनुकूल न होने से आठवीं से आगे नहीं पढ़ सके। बाद में उन्होंने घर पर ही संस्कृत, हिंदी और फ़ारसी का अध्ययन किया। वे छायावादी काव्य प्रवृत्ति के […]