1. वायु और पवन
- पृथ्वी के चारों ओर वायु का आवरण है।
- जब वायु क्षैतिज दिशा में चलती है तो उसे पवन (Wind) कहते हैं।
- जब वायु स्थिर हो या ऊर्ध्वाधर (ऊपर-नीचे) दिशा में चले, तो वह केवल वायु कहलाती है।
- पछुआ हवाएँ और मानसून हवाएँ पवन के उदाहरण हैं।
2. वायुदाब
- वायु विभिन्न गैसों का मिश्रण है और उसका अपना भार होता है।
- पृथ्वी की सतह पर वायुमण्डल अपने भार के कारण जो दबाव डालता है, उसे वायुदाब कहते हैं।
- वायुदाब की माप की इकाई मिलीबार (Millibar) होती है।
- समुद्र तल पर सामान्य वायुदाब 1013 मिलीबार होता है।
- वायुदाब मापने का यंत्र वायुदाबमापी (Barometer) कहलाता है।
3. वायुदाब को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक
समुद्र सतह से ऊँचाई
- समुद्र तल पर वायुमण्डलीय भार सर्वाधिक होता है।
- ऊँचाई बढ़ने पर वायु का घनत्व और वायुदाब कम हो जाता है।
- इसलिए पर्वतारोहियों को साँस लेने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर की आवश्यकता पड़ती है।
तापमान (Temperature)
- तापमान बढ़ने पर वायु फैलकर हल्की हो जाती है, जिससे वायुदाब कम हो जाता है।
- तापमान घटने पर वायु संकुचित और भारी हो जाती है, जिससे वायुदाब बढ़ जाता है।
पृथ्वी का घूर्णन और जलवाष्प भी वायुदाब को प्रभावित करते हैं।
4. पवन
- हवा जब क्षैतिज दिशा में चलती है तो वह पवन कहलाती है।
- पवन हमेशा अधिक दाब से कम दाब वाले क्षेत्रों की ओर चलती है।
- पवन की गति मापने का यंत्र – पवन वेगमापी (Anemometer)।
- पवन की दिशा बताने वाला यंत्र – दिक् सूचक (Wind Vane)।
5. फैरल का नियम (Ferrel’s Law)
वैज्ञानिक फैरल के अनुसार –
“पृथ्वी की घूर्णन गति के कारण हवाएँ तथा समुद्री धाराएँउत्तरी गोलार्द्ध में अपनी दाहिनी ओर और दक्षिणी गोलार्द्ध में बायीं ओर मुड़ जाती हैं।”
6. पवनों के प्रकार
पृथ्वी पर बहने वाली पवनों को चार प्रमुख भागों में बाँटा गया है –
- स्थायी पवनें (Permanent Winds)
- सामयिक पवनें (Seasonal Winds)
- स्थानीय पवनें (Local Winds)
अन्य पवनें (Other Winds)
7. सामयिक पवनें
- ये पवनें वर्ष के किसी निश्चित समय या ऋतु में चलती हैं।
- प्रमुख उदाहरण – मानसूनी पवनें (Monsoon Winds)।
- “मानसून” शब्द अरबी भाषा के ‘मौसिम’ शब्द से बना है, जिसका अर्थ “मौसम” है।
मानसून पवनों के दो प्रकार:
- ग्रीष्मकालीन मानसून – समुद्र से स्थल की ओर चलती हैं।
- शीतकालीन मानसून – स्थल से समुद्र की ओर चलती हैं।
8. स्थानीय पवनें
किसी विशेष क्षेत्र में चलने वाली पवनें स्थानीय पवनें कहलाती हैं।
- उदाहरण – जल समीर, थल समीर, लू
(क) जल समीर (Sea Breeze)
- दिन में स्थल भाग जल्दी गर्म हो जाता है, जिससे वहाँ निम्न वायुदाब बनता है।
- पवन समुद्र से स्थल की ओर चलती है।
(ख) थल समीर (Land Breeze)
- रात्रि में स्थल भाग जल्दी ठंडा हो जाता है।
- पवन स्थल से समुद्र की ओर चलती है।
(ग) लू (Loo)
- उत्तरी भारत में गर्मियों की दोपहर में चलने वाली गर्म और शुष्क हवा है।
- यह शरीर पर हानिकारक प्रभाव डालती है।
9. अन्य पवनें
(क) चक्रवात (Cyclone)
- जब कोई क्षेत्र कम वायुदाब का केन्द्र बन जाता है, तो उसके चारों ओर से हवाएँ केन्द्र की ओर आती हैं।
- इससे तेज़ वर्षा और जन-धन की हानि होती है।
(ख) प्रतिचक्रवात (Anticyclone)
- इसमें केन्द्र में अधिक वायुदाब होता है और हवाएँ केन्द्र से बाहर की ओर चलती हैं।
- इनकी गति धीमी होती है और वर्षा नहीं होती।

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