1. प्रशासनिक व्यवस्था
- सुल्तान सर्वोच्च शासक होता था और उसे ईश्वर का प्रतिनिधि माना जाता था।
- सुल्तान के नाम से खुतबा पढ़ा जाता और सिक्के जारी किए जाते थे।
- प्रशासन में वजीर, उलेमा (धर्मगुरु) और अमीर उसका सहयोग करते थे।
मुख्य चार विभाग
- राजस्व और लोक प्रशासन – अधिकारी : दीवान-ए-विजारत
- सैन्य विभाग – अधिकारी : दीवान-ए-अर्ज
- राजकीय पत्र व्यवहार – अधिकारी : दीवान-ए-इंशा
- शिक्षा और अनुदान विभाग – अधिकारी : दीवान-ए-रिसालत
प्रशासनिक विभाजन
राज्य → सूबे → शिक → परगने
- सूबे का प्रमुख : वली या मुफ्ती
- शिक का प्रमुख : शिकदार
- परगने का प्रमुख : आमिल
3. इक्ता प्रणाली
- तेरहवीं शताब्दी में सुल्तानों ने राज्य को सैनिक क्षेत्रों में बाँटा, जिन्हें इक्ता कहा गया।
- इक्तादार इसका अधिकारी होता था।
- इस प्रणाली की शुरुआत इल्तुतमिश ने की।
2. सामाजिक जीवन
- समाज में मुख्यतः हिन्दू और मुस्लिम लोग रहते थे।
- उच्च वर्ग (अमीर और सरदार) विलासिता का जीवन जीते थे।
- ब्राह्मण और उलेमा को समाज में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त था।
- जाति व्यवस्था कठोर थी, स्त्रियों की स्वतंत्रता सीमित थी।
- पर्दा प्रथा, बाल विवाह, बहुविवाह और सती प्रथा प्रचलित थीं।
- दास प्रथा (गुलाम प्रथा) प्रचलित थी – कहा जाता है कि फिरोजशाह तुगलक के पास 1,80,000 गुलाम थे।
- यात्री इब्नबतूता ने हिन्दुओं के आतिथ्य सत्कार की प्रशंसा की थी।
3. आर्थिक व्यवस्था
- गाँवों में कृषि मुख्य व्यवसाय था।
- नगरों में व्यापार का विकास हुआ – भड़ौच, खंभात, मुल्तान, लखनौती, सुनारगाँव प्रमुख व्यापारिक नगर थे।
- शिल्पकार अपने-अपने व्यवसाय के अनुसार बस्तियों में रहते थे।
- वस्तुओं का क्रय-विक्रय हाट-बाजारों से होता था, दिल्ली व्यापार का मुख्य केन्द्र थी।
- विदेशी व्यापार जल और थल दोनों मार्गों से होता था।
- निर्यात की वस्तुएँ: सूती व रेशमी कपड़े, धातु के बर्तन, हाथीदाँत की वस्तुएँ, जड़ी-बूटियाँ।
- आयात की वस्तुएँ: काँच के बर्तन और घोड़े।
- राज्य की आय के स्रोत:
- भूमि कर (उपज का 1/2 या 1/3 भाग), चुंगी, सिंचाई कर, खनिज कर, मकान कर, तीर्थ कर आदि।
- हिन्दुओं से जजिया कर, मुसलमानों से जकात लिया जाता था।
- मुद्रा प्रणाली: चाँदी का टंका और ताँबे का दरहम प्रचलित था।
- इब्नबतूता के अनुसार दिल्ली उस समय का सबसे सुंदर नगर था।
4. भाषा, साहित्य और विज्ञान
- प्राथमिक शिक्षा मंदिरों और मस्जिदों में दी जाती थी।
- उच्च शिक्षा के लिए टोल और मदरसों की स्थापना की गई।
- फारसी भाषा प्रशासन की भाषा बनी, जिससे भारतीय भाषाओं में फारसी शब्दों का प्रयोग बढ़ा।
- हिन्दी और फारसी के मिश्रण से “उर्दू भाषा” का जन्म हुआ।
- क्षेत्रीय भाषाओं (जैसे हिन्दी, संस्कृत, मैथिली) का विकास हुआ।
कागज के प्रचलन से प्राचीन ग्रंथों का पुनर्लेखन हुआ
चिकित्सा और विज्ञान:
- प्रसिद्ध चिकित्सक – मौलाना बदरूद्दीन, सदरूद्दीन, अजीमुद्दीन।
- शल्य चिकित्सा विशेषज्ञ – वैद्य मच्छेन्द्र और जोग।
- बर्नी ने “तारीख-ए-फीरोजशाही” में चिकित्सकों और खगोलविदों की सूची दी।
5. वास्तुकला, चित्रकला और संगीत
वास्तुकला
- फारस और मध्य एशिया की शैली के मेल से नई वास्तुकला विकसित हुई।
- मुख्य विशेषताएँ: नुकीले मेहराब, गुम्बद, ऊँची मीनारें।
- प्रमुख निर्माण कार्य:
- कुतुबमीनार (दिल्ली)
- फिरोजशाह कोटला
- अलाई दरवाजा
- तुगलकाबाद किला
- लोदी मकबरे (खपरैल सजावट सहित)
- गोल गुम्बद (बीजापुर)
मांडू के महल, विजयनगर के मंदिर
6. धार्मिक और सामाजिक आन्दोलन
भक्ति आन्दोलन
- समाज में जाति भेद और धार्मिक आडम्बरों के विरोध में प्रारंभ हुआ।
- इसका उद्देश्य था – प्रेमपूर्वक भक्ति, ईश्वर की एकता, समाज में सद्भावना।
- भक्ति आन्दोलन के प्रमुख संतों ने स्थानीय भाषा में उपदेश दिए जिससे यह जनप्रिय हुआ।
- प्रमुख संत: रामानंद, कबीर, चैतन्य महाप्रभु, नामदेव, तुकाराम, ज्ञानेश्वर, वल्लभाचार्य, गुरुनानक।
प्रमुख विचार:
- कर्मकाण्ड और पाखंड का विरोध।
- सभी धर्मों और जातियों की समानता।
- प्रेम और भक्ति को सर्वोच्च माना गया।
सूफी सम्प्रदाय
- मुस्लिम संतों का समुदाय, जिन्होंने सच्ची भक्ति, प्रेम, और उदारता का संदेश दिया।
- आडम्बर और कट्टरवाद का विरोध किया।
- स्थानीय भाषाओं में भक्ति गीत गाए।
भक्ति आन्दोलन का प्रभाव
- हिन्दू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा मिला।
- समाज से अनेक कुरीतियाँ और आडम्बर कम हुए।
- धार्मिक सहिष्णुता और मानवता की भावना फैली।

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