जहाँगीर (1605-1627 ई.)
गद्दी पर बैठना
अकबर की मृत्यु के बाद उसका पुत्र जहाँगीर 1605 ई. में सम्राट बना। वह न्यायप्रिय और कला-साहित्य प्रेमी था, परंतु अकबर जितना कुशल नहीं था। उसे अपने पुत्र खुसरो के विद्रोह का सामना करना पड़ा।
जहाँगीर के शासनकाल की प्रमुख घटनाएँ
1. मेवाड़ से सन्धि
महाराणा प्रताप की मृत्यु के बाद उसके पुत्र अमरसिंह ने मुगलों से संघर्ष जारी रखा। जहाँगीर ने उदार शर्तों पर सन्धि कर संघर्ष समाप्त किया।
2. कांगड़ा पर विजय
कांगड़ा दुर्ग राजपूतों के अधीन था। जहाँगीर ने सेना भेजकर इसे जीत लिया।
3. अहमदनगर का संघर्ष
अकबर ने अहमदनगर जीता था, पर यह फिर स्वतंत्र हो गया। जहाँगीर के समय इसका रक्षक मलिक अंबर था। शाहजादा खुर्रम (शाहजहाँ) ने उसे सन्धि करने को विवश किया और विजय पाई।
4. सिखों से शत्रुता
गुरु अर्जुनदेव ने खुसरो की मदद की थी। इस कारण जहाँगीर ने उन्हें दण्ड दिया और बाद में मृत्यु दण्ड दे दिया। इससे सिख मुगलों के विरोधी बन गए।
5. अफगानों से संघर्ष
कंधार प्रान्त ईरान के बादशाह ने जीत लिया। जहाँगीर ने पुनः प्राप्त करने की कोशिश की पर असफल रहा।
6. खुर्रम का विद्रोह
जहाँगीर के पुत्र खुर्रम ने उत्तराधिकारी बनने की आशंका से पिता के विरुद्ध विद्रोह किया, पर महाबत खान ने इसे दबा दिया।
7. पुर्तगाली और अंग्रेजों से सम्बन्ध
पुर्तगालियों ने समुद्री डकैती शुरू कर दी थी, जिससे जहाँगीर क्रोधित हुआ। इंग्लैंड के राजा ने अपने दूत सर टामस रो और कैप्टन हाकिन्स को भारत भेजा। उन्होंने व्यापार की अनुमति मांगी।
कला, साहित्य और न्याय
जहाँगीर ने अपनी आत्मकथा “तुज़ुक-ए-जहाँगीरी” लिखी। वह चित्रकला का पारखी था।उसने जनता को सीधा न्याय देने के लिए राजमहल की दीवार पर सोने की जंजीर वाली घंटी लगवाई थी।
उसका कथन:
“जब किसी को अन्याय हो, तो वह जंजीर हिलाकर अपनी फरियाद मुझ तक पहुँचा सके।”
नूरजहाँ का प्रभाव
1611 ई. में जहाँगीर ने नूरजहाँ से विवाह किया। वह सुंदर, बुद्धिमान और कुशल प्रशासिका थी।उसने दरबार के नियम बनाए, नई वेशभूषा और आभूषण चलन में लाए, तथा गुलाब के इत्र का आविष्कार किया।धीरे-धीरे वह इतनी प्रभावशाली हो गई कि शाही फरमानों और सिक्कों पर उसका नाम भी अंकित होने लगा।1627 ई. में जहाँगीर की मृत्यु हो गई।
शाहजहाँ (1628-1657 ई.)
जहाँगीर के बाद उसका तीसरा पुत्र शाहजहाँ (खुर्रम) गद्दी पर बैठा।उसके शासनकाल में कला, स्थापत्य, साहित्य और शाही वैभव का उत्कर्ष हुआ।
शाहजहाँ के शासनकाल की प्रमुख घटनाएँ
1. बुन्देलखण्ड का विद्रोह
बुन्देलखण्ड के राजा जुझारसिंह ने विद्रोह किया। सन्धि के बाद फिर आदेश न मानने पर उसे दंडित किया गया।
2. दक्षिण नीति
अहमदनगर, गोलकुण्डा और बीजापुर फिर स्वतंत्र हो गए थे। शाहजहाँ ने इन्हें पुनः वश में किया।उसने अपने पुत्र औरंगजेब को दक्षिण का सूबेदार नियुक्त किया।
3. उत्तर-पश्चिम नीति
शाहजहाँ ने बल्ख और बदख्शाँ क्षेत्रों में सेनाएँ भेजीं।उसने ईरान से कंधार पुनः लिया, पर कुछ समय बाद खो दिया।
4. पुर्तगालियों से संघर्ष
पुर्तगाली हुगली क्षेत्र से समुद्री डकैती करते थे। शाहजहाँ ने उन्हें हराकर बंगाल से निकाल दिया।
स्थापत्य कला
शाहजहाँ के समय स्थापत्य कला अपने चरम पर पहुँची।
मुख्य इमारतें:
- ताजमहल (आगरा) – मुमताज की याद में बनवाया गया।
- लाल किला (दिल्ली)
- दीवान-ए-आम और दीवान-ए-खास
- जामा मस्जिद (दिल्ली)
मयूर सिंहासन
रत्नों से जड़ा मयूर सिंहासन शाहजहाँ की शान थी, जिसमें कोहिनूर हीरा भी जड़ा था।1739 ई. में नादिरशाह इसे ईरान ले गया।
शाहजहाँ के अंतिम वर्ष
1657 ई. में शाहजहाँ बीमार पड़ा। उसके चारों पुत्रों – दारा, शुजा, औरंगजेब, मुराद – के बीच उत्तराधिकार युद्ध हुआ।औरंगजेब ने विजय पाई, अपने पिता को आगरा किले में कैद कर लिया।1666 ई. में शाहजहाँ की मृत्यु हुई।

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