संसदीय शासन प्रणाली
भारत में संसदीय शासन प्रणाली है। इसमें दो प्रकार की कार्यपालिका होती हैं –
1. नाममात्र की कार्यपालिका –
- इसमें देश का प्रधान (राष्ट्रपति) केवल संवैधानिक प्रधान होता है।
- वास्तविक कार्य मंत्रि-परिषद् करती है।
- उदाहरण: भारत और इंग्लैंड।
2. वास्तविक कार्यपालिका –
- देश का मुखिया स्वयं शक्तियों का प्रयोग करता है।
- उदाहरण: अमेरिका का राष्ट्रपति।
राष्ट्रपति
भारत के शासन का प्रमुख राष्ट्रपति होता है।सरकार का सारा कार्य राष्ट्रपति के नाम से किया जाता है।
1. राष्ट्रपति बनने की अर्हताएँ
- भारत का नागरिक हो।
- 35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो।
- लोकसभा सदस्य चुने जाने की योग्यता रखता हो।
- किसी सरकारी लाभ के पद पर कार्यरत न हो।
2. राष्ट्रपति का चुनाव
- राज्यों की विधानसभा, विधान परिषद् और संसद के निर्वाचित सदस्य मिलकर राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं।
- यह चुनाव अप्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली से होता है।
राष्ट्रपति की भूमिका और शक्तियाँ
1. विधायी शक्तियाँ
- कोई भी विधेयक तब तक कानून नहीं बनता जब तक उस पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर न हों।
- राष्ट्रपति चाहे तो विधेयक को पुनः विचार के लिए सदन को लौटा सकते हैं।
- यदि संसद दोबारा वही विधेयक पारित करती है, तो राष्ट्रपति को उसे स्वीकृति देनी ही पड़ती है।
2. नियुक्ति सम्बन्धी शक्तियाँ
- राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की नियुक्ति करते हैं।
- प्रधानमंत्री की सलाह पर अन्य मंत्रियों की नियुक्ति भी करते हैं।
- राज्यों के राज्यपाल, सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति करते हैं।
- राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति भी राष्ट्रपति करते हैं।
3. अध्यादेश जारी करने की शक्ति
- जब संसद की बैठक न हो रही हो और किसी विषय पर कानून बनाना आवश्यक हो, तो राष्ट्रपति अध्यादेश जारी कर सकते हैं।
- अध्यादेश को कानून के समान मान्यता होती है।
4. क्षमादान का अधिकार
- राष्ट्रपति को क्षमादान का अधिकार प्राप्त है।
- वे किसी दोषी की सजा माफ कर सकते हैं या मृत्युदण्ड को आजीवन कारावास में बदल सकते हैं।
5. कार्यकाल और पद से हटाना
- राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है।
- यदि राष्ट्रपति संविधान का उल्लंघन करते हैं, तो महाभियोग द्वारा पद से हटाए जा सकते हैं।
उपराष्ट्रपति
कार्य और भूमिका
- यदि राष्ट्रपति किसी कारणवश कार्य नहीं कर पा रहे हों, तो उपराष्ट्रपति उनके कार्यों का दायित्व निभाते हैं।
अर्हताएँ
- राष्ट्रपति के समान ही योग्यताएँ होती हैं।
- कार्यकाल 5 वर्ष का होता है।
चुनाव
- उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्यों द्वारा गुप्त मतदान से किया जाता है।
पद
- उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं।
- वे राज्यसभा की बैठकों की अध्यक्षता करते हैं, परन्तु मतदान में भाग नहीं लेते क्योंकि वे निर्वाचित सदस्य नहीं होते।
प्रधानमंत्री एवं संघीय मंत्रि-परिषद्
गठन
- राष्ट्रपति की सहायता के लिए मंत्रि-परिषद् की व्यवस्था की गई है।
- इसका मुखिया प्रधानमंत्री होता है।
- लोकसभा में जिस दल को बहुमत प्राप्त होता है, उसके नेता को राष्ट्रपति सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं।
- प्रधानमंत्री और अन्य मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ राष्ट्रपति दिलाते हैं।
मंत्रि-परिषद् के सदस्य
- जो व्यक्ति संसद के किसी सदन के सदस्य हों, वही मंत्री बन सकते हैं।
- यदि कोई व्यक्ति मंत्री बनते समय सदस्य नहीं है, तो उसे 6 माह के भीतर किसी सदन का सदस्य बनना आवश्यक है।
प्रधानमंत्री और मंत्रि-परिषद् के कार्य
- प्रधानमंत्री मंत्रि-परिषद् का गठन करता है और कार्यों का बँटवारा करता है।
- प्रधानमंत्री मंत्रिमण्डल का प्रधान होता है।
- प्रधानमंत्री के त्यागपत्र देने पर पूरा मंत्रिमंडल भंग हो जाता है।
- संसद द्वारा बनाए गए कानूनों और नीतियों को लागू करने की जिम्मेदारी मंत्रि-परिषद् की होती है।
- मंत्रिमंडल देश के प्रशासन, आर्थिक सुधार, सुरक्षा तथा विदेशी संबंधों से जुड़ी नीतियाँ बनाता है।
- मंत्रि-परिषद् के कई मंत्रालय होते हैं –
- गृह मंत्रालय
- वित्त मंत्रालय
- रक्षा मंत्रालय
- विदेश मंत्रालय आदि।

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