भारतीय संविधान में सूचियाँ
देश के शासन के लिए संविधान में कुछ विषय-सूचियाँ बनाई गई हैं –
1. संघ सूची (Union List) –
- इसमें 97 विषय हैं।
- इन पर केवल केंद्र सरकार कानून बना सकती है।
- ये राष्ट्रीय महत्व के विषय हैं।
2. राज्य सूची (State List) –
- इसमें 62 विषय हैं।
- इन पर केवल राज्य विधानमंडल कानून बना सकता है।
- संसद इन पर कानून नहीं बनाती।
3. समवर्ती सूची (Concurrent List) –
- इसमें 52 विषय हैं।
- केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं।
- लेकिन यदि मतभेद हो, तो केंद्र का कानून लागू होता है।
4. अवशिष्ट विषय (Residuary Subjects) –
- इनकी संख्या निश्चित नहीं है।
- जो विषय संविधान बनते समय तय नहीं हुए (जैसे – कंप्यूटर, मोबाइल, टीवी आदि),उन पर कानून बनाने का अधिकार केंद्र सरकार को है।
राज्य विधानमंडल
राज्य सूची के विषयों पर कानून बनाने का अधिकार राज्य विधानमंडल के पास होता है।यह दो प्रकार का हो सकता है –
- विधानसभा (Legislative Assembly)
- विधान परिषद् (Legislative Council)
कुछ राज्यों में केवल एक सदन (विधानसभा) है जैसे मध्यप्रदेश, जबकिकुछ राज्यों में दो सदन हैं जैसे बिहार, कर्नाटक, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र आदि।
मध्यप्रदेश की विधानसभा
- मध्यप्रदेश में एक ही सदन है – विधानसभा।
- विधानसभा के सदस्यों की संख्या 230 है।
- पहले (छत्तीसगढ़ बनने से पूर्व) यह संख्या 320 थी।
- अनुसूचित जाति व जनजाति के लिए कुछ सीटें आरक्षित होती हैं।
- विधानसभा के सदस्य को विधायक (MLA) कहा जाता है।
विधायक बनने की अर्हताएँ
विधानसभा सदस्य (विधायक) बनने के लिए आवश्यक योग्यताएँ –
- भारत का नागरिक हो।
- 25 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो।
- भारत या राज्य सरकार के अधीन किसी लाभ के पद पर न हो।
- दिवालिया या पागल न हो।
विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया
- स्थान निर्धारण – जनसंख्या के अनुसार विधानसभा की 230 सीटें तय की जाती हैं।
- नामांकन – प्रत्याशी (Candidate) नामांकन फार्म भरते हैं।
- मतदान और मतगणना – चुनाव आयोग तिथियाँ तय करता है और प्रक्रिया की देखरेख करता है।
- विधानसभा गठन – परिणाम घोषित होने पर विधानसभा गठित मानी जाती है।
- विवाद निपटान – चुनाव विवाद होने पर मामला उच्च न्यायालय में जाता है।
- उच्चतम न्यायालय का निर्णय अंतिम होता है।
विधानसभा का कार्यकाल
- विधानसभा का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है।
- किसी आपातकालीन स्थिति में राज्यपाल, राष्ट्रपति को विधानसभा भंग करने की अनुशंसा कर सकते हैं।
- मंत्रीपरिषद भी राज्यपाल को भंग करने की सलाह दे सकती है।
विधानसभा के पदाधिकारी
- अध्यक्ष (Speaker) –
- विधानसभा की कार्यवाही का संचालन करते हैं।
- अनुशासन बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी होती है।
- उपाध्यक्ष (Deputy Speaker) –
- अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उनके कार्य करते हैं।
विधानसभा के कार्य और शक्तियाँ
🔹 1. कानून बनाना
- विधानसभा को राज्य सूची के 62 विषयों पर कानून बनाने का अधिकार है।
- किसी विषय पर विधेयक (Bill) प्रस्तुत किया जाता है।
- चर्चा व विचार के बाद विधेयक पारित होता है।
- फिर राज्यपाल की स्वीकृति मिलती है।
- यदि आवश्यक हो, राज्यपाल विधेयक को राष्ट्रपति के पास भेज सकते हैं।
- राज्यपाल या राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद वह कानून (अधिनियम) बन जाता है।
🔹 2. वित्तीय कार्य (Budget)
- राज्य की आय-व्यय का पूरा विवरण बजट कहलाता है।
- इसे हर वर्ष वित्त मंत्री विधानसभा में प्रस्तुत करते हैं।
- विधानसभा इसे स्वीकृति देती है, फिर राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद वित्तीय कार्य संचालित होते हैं।
🔹 3. नियंत्रण और जनहित कार्य
- विधानसभा सरकार के कार्यों पर नियंत्रण रखती है ताकि सरकार जनता के खिलाफ न जाए।
- विधायक प्रश्न पूछकर, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, काम रोको प्रस्ताव आदि के माध्यम से सरकार से जानकारी लेते हैं।
- आवश्यक होने पर अविश्वास प्रस्ताव (No Confidence Motion) भी लाया जा सकता है।
विधान परिषद्
1. जिन राज्यों में विधानमंडल के दो सदन हैं, वहाँ ये तीन भाग होते हैं –
- राज्यपाल
- विधानसभा
- विधान परिषद्
- वर्तमान में जिन राज्यों में विधान परिषद् है –बिहार, उत्तरप्रदेश, कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र।
- विधानसभा को प्रथम (निम्न) सदन और विधान परिषद् को द्वितीय (उच्च) सदन कहा जाता है।

Leave a Reply