भारत राज्यों का संघ
- भारत में केन्द्र तथा राज्यों की अलग-अलग सरकारें होती हैं।
- केन्द्र सरकार के 3 अंग –
- व्यवस्थापिका – संसद
- कार्यपालिका – संघीय मंत्रि-परिषद्
- न्यायपालिका – सर्वोच्च न्यायालय
संसद (व्यवस्थापिका)
- भारत में संसदीय लोकतंत्र है।
- पूरे देश के लिए कानून संसद बनाती है।
- संसद के दो सदन –
- लोकसभा (निचला सदन)
- राज्यसभा (उच्च सदन)
लोकसभा
- सदस्य बनने की अर्हताएँ –
- भारत का नागरिक
- मतदाता सूची में नाम
- आयु 25 वर्ष या अधिक
- पागल/दिवालिया घोषित न हो
- लाभ के पद पर न हो
- न्यायालय द्वारा अयोग्य घोषित न हो
- सदस्यों का चुनाव – वयस्क मताधिकार (18 वर्ष) के आधार पर
- मतदाता की योग्यताएँ – भारत का नागरिक, 18 वर्ष पूर्ण, मतदाता सूची में नाम
- राष्ट्रपति 2 एंग्लो-इंडियन सदस्य नामांकित कर सकता है (अगर चुने न जाएँ)
- कार्यकाल – 5 वर्ष
- अध्यक्ष = स्पीकर (सदन संचालन)
- उपाध्यक्ष = डिप्टी स्पीकर
राज्यसभा
- कुल सदस्य – 250
- 238 सदस्य – राज्यों की विधानसभाएँ चुनती हैं
- 12 सदस्य – राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत
- मनोनीत सदस्य – साहित्य, कला, समाजसेवा, विज्ञान आदि क्षेत्र
- सदस्य बनने की आयु – 30 वर्ष
- राज्यसभा स्थायी सदन है (भंग नहीं होती)
- कार्यकाल – 6 वर्ष
- हर 2 वर्ष में 1/3 सदस्य नए होते हैं
- उपराष्ट्रपति – राज्यसभा के पदेन सभापति
- राज्यसभा अपने बीच से उपसभापति चुनती है
संसद के कार्य व शक्तियाँ
1. कानून बनाना
- संघ सूची, समवर्ती सूची, अवशिष्ट विषयों पर कानून बनाना
2. संविधान संशोधन
- समयानुसार संविधान में योग्य संशोधन
3. मंत्रि-परिषद् पर नियंत्रण
- प्रश्न पूछना, निंदा प्रस्ताव, अविश्वास प्रस्ताव आदि से नियंत्रण
4. वित्तीय कार्य
- आय-व्यय नीति बनाना
- बजट स्वीकृति
- वित्त विधेयक लोकसभा में राष्ट्रपति अनुमति से
5. संसद का अधिवेशन
- 2 अधिवेशन अनिवार्य
- 6 माह से अधिक अंतर नहीं
6. गणपूर्ति (Quorum)
- बैठक हेतु कुल सदस्य संख्या का 1/10 उपस्थित
कानून बनने की प्रक्रिया
1. प्रथम वाचन
- विधेयक पेश
- शीर्षक पढ़ा जाता है
- प्रतियाँ सदस्यों को
- सामान्यतः बहस नहीं
2. द्वितीय वाचन
- विधेयक पर चर्चा
- संशोधन प्रस्ताव
- बहुमत से निर्णय
3. तृतीय वाचन
- संशोधन वाद पूरा
- स्वीकृति / अस्वीकृति
- फिर विधेयक दूसरे सदन में
- यहाँ भी 3 वाचन
- फिर राष्ट्रपति अनुमति→ राष्ट्रपति हस्ताक्षर के बाद विधेयक = कानून
- यदि दोनों सदन सहमत न हों या 6 माह तक लंबित रहें → राष्ट्रपति संयुक्त बैठक बुलाते हैं → संयुक्त अधिवेशन में फैसला

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