1. घूर्णन गति
- पृथ्वी अपनी धुरी पर पश्चिम से पूर्व दिशा में घूमती है।
- पृथ्वी को अपनी धुरी पर एक चक्कर लगाने में 24 घंटे (एक दिन और एक रात) लगते हैं।
- इसीलिए इसे दैनिक गति भी कहा जाता है।
- इस गति के कारण दिन और रात बनते हैं।
उदाहरण:जैसे एक लट्टू अपनी कील पर घूमता है, वैसे ही पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है।
2. परिक्रमण गति
- पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमने के साथ-साथ सूर्य के चारों ओर अण्डाकार पथ में चक्कर लगाती है।
- इसे परिक्रमण गति कहा जाता है।
- पृथ्वी को सूर्य के चारों ओर एक चक्कर लगाने में 365¼ दिन (एक वर्ष) लगते हैं।
- इसलिए इसे वार्षिक गति भी कहते हैं।
- इस गति के कारण ऋतुओं में परिवर्तन होता है।
पृथ्वी की गतियों का प्रभाव
- घूर्णन गति के कारण – दिन और रात होते हैं।
- परिक्रमण गति के कारण – ऋतुओं का परिवर्तन होता है।
- हमें सूर्य चलता हुआ दिखाई देता है, जबकि वास्तव में पृथ्वी घूम रही होती है।
उदाहरण:जैसे रेलगाड़ी में बैठकर हमें बाहर के पेड़-पौधे पीछे भागते हुए दिखते हैं, वैसे ही पृथ्वी के घूमने से हमें सूर्य चलता हुआ लगता है।
दिन और रात का होना
- पृथ्वी की दैनिक गति (घूर्णन) के कारण दिन और रात बनते हैं।
- पृथ्वी का वह भाग जहाँ सूर्य की किरणें सीधे पड़ती हैं, वहाँ दिन होता है।
- जो भाग सूर्य से विपरीत दिशा में होता है, वहाँ रात होती है।
- पृथ्वी 24 घंटे में एक बार घूम जाती है, इसलिए हर स्थान पर दिन और रात होते हैं।
गतिविधि:एक ग्लोब पर टॉर्च की रोशनी डालकर जब उसे पश्चिम से पूर्व की ओर घुमाएँ तो दिन और रात की स्थिति स्पष्ट दिखाई देती है।
ऋतु परिवर्तन
- वर्ष का वह समय जब मौसम लगभग समान रहता है, उसे ऋतु कहते हैं।
- पृथ्वी के अक्ष पर झुकाव और सूर्य की परिक्रमा के कारण ऋतु परिवर्तन होता है।
- पृथ्वी का अक्ष अपने तल से 66½° का कोण बनाता है और यह 23½° झुका हुआ है।
- पृथ्वी के झुकाव और परिक्रमण के कारण सूर्य की किरणें हर समय समान नहीं पड़तीं, इसलिए ऋतुएँ बदलती रहती हैं।
प्रमुख स्थितियाँ और ऋतु परिवर्तन
1. 22 दिसम्बर की स्थिति
- सूर्य की सीधी किरणें दक्षिणी गोलार्द्ध पर पड़ती हैं।
- दक्षिणी गोलार्द्ध में ग्रीष्म ऋतु,और उत्तरी गोलार्द्ध (भारत) में शीत ऋतु होती है।
2. 21 जून की स्थिति
- सूर्य की सीधी किरणें उत्तरी गोलार्द्ध पर पड़ती हैं।
- उत्तरी गोलार्द्ध में ग्रीष्म ऋतु,और दक्षिणी गोलार्द्ध में शीत ऋतु होती है।
3. 21 मार्च और 23 सितम्बर की स्थिति
- सूर्य विषुवत रेखा पर सीधी किरणें डालता है।
- दोनों गोलार्द्धों में दिन और रात समान होते हैं।
- 21 मार्च को – उत्तरी गोलार्द्ध में बसंत ऋतु,दक्षिणी गोलार्द्ध में शरद ऋतु होती है।
- 23 सितम्बर को – उत्तरी गोलार्द्ध में शरद ऋतु,दक्षिणी गोलार्द्ध में बसंत ऋतु होती है।

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