वायुमण्डल का परिचय
- पृथ्वी के चारों ओर फैले वायु के आवरण को वायुमण्डल कहते हैं।
- यह समुद्र तल से लगभग 1600 किलोमीटर की ऊँचाई तक फैला हुआ है।
- वायुमण्डल का घनत्व ऊँचाई बढ़ने पर घटता जाता है।
- वायु का लगभग 97% भाग धरातल से 30 किलोमीटर की ऊँचाई तक पाया जाता है।
- पृथ्वी से ऊपर जाने पर वायु विरल (पतली) हो जाती है।
वायुमण्डल का महत्व
वायुमण्डल पृथ्वी पर जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसके प्रमुख महत्व निम्नलिखित हैं-
- यह सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से जीवों की रक्षा करता है।
- यह तापमान का सन्तुलन बनाए रखता है जिससे पृथ्वी न अधिक गर्म और न अधिक ठंडी होती है।
- ध्वनि तरंगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने में सहायता करता है।
- वायुयान की उड़ानें वायुमण्डल की उपस्थिति के कारण संभव हैं।
- मौसमी परिवर्तन जैसे वर्षा, हवा का प्रवाह, ताप-संतुलन आदि वायुमण्डल के कारण ही संभव हैं।
वायुमण्डल की संरचना
तापमान और उसकी भिन्नता के आधार पर वायुमण्डल को पाँच परतों में बाँटा गया है –
1. क्षोभमण्डल
- ध्रुवों पर ऊँचाई: 8 कि.मी., विषुवत रेखा पर: 18 कि.मी.
- इसमें सभी मौसम संबंधी घटनाएँ होती हैं – बादल, वर्षा, तूफान आदि।
- यही परत जीव-जंतुओं और मनुष्यों के जीवन का क्षेत्र है।
- ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान घटता है (प्रति 165 मीटर पर 1°C)।
- इसे परिवर्तन मण्डल भी कहते हैं।
2. समतापमण्डल
- क्षोभमण्डल के ऊपर स्थित है।
- लगभग 20 किलोमीटर ऊँचाई तक तापमान समान रहता है, उसके बाद बढ़ने लगता है।
- यह परत वायुयान की उड़ान के लिए उपयुक्त होती है।
3. मध्यमण्डल
- ऊँचाई: 50 से 80 किलोमीटर।
- इसमें जलवाष्प और धूलकण कम होते हैं।
- तापमान बहुत कम होता है और हवा तेज़ गति से बहती है।
4. ऊष्मामण्डल
- आरंभ: 80 कि.मी. से ऊपर।
- वायु का घनत्व बहुत कम होता है।
- ऊँचाई बढ़ने पर तापमान बढ़ता है।
इस मण्डल में दो विशेष परतें होती हैं –
1. ओजोन परत
- ऊँचाई 32 से 80 कि.मी. तक।
- सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों को रोकती है।
2. आयन परत
- ऊँचाई 80 से 400 कि.मी. तक।
- विद्युत कणों से बनी होती है जो रेडियो तरंगों को वापस पृथ्वी पर लौटा देती है।
- इसके कारण ध्रुवीय प्रकाश (Aurora) दिखाई देता है।
3. बाह्यमण्डल
- यह वायुमण्डल की सबसे ऊपरी परत है।
- इसकी ऊपरी सीमा निश्चित नहीं है।
- यहाँ वायु अत्यंत विरल होती है और घनत्व सबसे कम होता है।
इसमें जीवन के लिए आवश्यक प्राणदायी (ऑक्सीजन) और रक्षक (ओजोन) गैसें होती हैं।

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