इतिहास का काल विभाजन
1. इतिहास को तीन भागों में बाँटा गया है –
- प्राचीन काल
- मध्यकाल
- आधुनिक काल
2. यह विभाजन आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तनों के आधार पर किया गया है।
3. भारत में मध्यकाल का आरंभ आठवीं शताब्दी से माना जाता है।
4. यूरोप में मध्यकाल का आरंभ पाँचवीं शताब्दी से हुआ।
मध्यकाल का विभाजन
1. भारत के मध्यकाल को दो भागों में बाँटा गया है –
- पूर्व मध्यकाल (8वीं से 12वीं शताब्दी)
- उत्तर मध्यकाल (13वीं से 18वीं शताब्दी)
मध्यकालीन भारत की विशेषताएँ
- भारतीयों का संपर्क अन्य धार्मिक मतों के अनुयायियों से हुआ।
- नई भाषाएँ, वस्त्र और खाद्य पदार्थ प्रचलित हुए।
- समाज और संस्कृति में कई परिवर्तन आए।
- इस काल के इतिहास के अधिक स्रोत उपलब्ध हैं।
मध्यकालीन इतिहास के स्रोत
1. साहित्यिक स्रोत
- ताड़पत्र, भोजपत्र और ताम्रपत्र पर लिखे अभिलेख।
- 13वीं शताब्दी से कागज पर लेखन शुरू हुआ।
- प्रमुख विदेशी यात्री और लेखक –इब्नबतूता, मार्कोपोलो, अल्बरुनी, बर्नी, निकोलोंकोटी, अब्दुलरज्जाक, बर्नियर, टैवर्नियर।
- प्रमुख ग्रंथ –बाबरनामा, हुमायूननामा, अकबरनामा, तुजुक-ए-जहाँगीरी, बादशाहनामा।
- अन्य भारतीय ग्रंथ –कथा सरित्सागर, वृहत्कथा कोष, पृथ्वीराजरासो, राजतरंगिणी।
2. पुरातात्विक स्रोत
- मंदिर, मस्जिद, मीनार, मकबरे और भव्य भवन।
- सिक्के, चित्र और अभिलेख उस काल की कला व स्थापत्य की झलक दिखाते हैं।
पूर्व मध्यकाल की राजनीतिक स्थिति
- उत्तर भारत में अनेक छोटे-छोटे राज्य थे, जिनमें युद्ध होते रहते थे।
- दक्षिण भारत में चोल, पांड्य, और अन्य राज्य थे।
- चोल राज्य सबसे शक्तिशाली था।
- राजधानी: तंजौर (Thanjavur)
- चोल नरेश राजेन्द्र प्रथम (1025 ई.) ने मलाया व सुमात्रा पर विजय प्राप्त की।
- यह पहला समुद्र पार अभियान था।
- चोलों ने चीन और दक्षिण एशिया के देशों से व्यापार किया।
- उन्होंने साहित्य और स्थापत्य कला को प्रोत्साहन दिया।
यूरोप का मध्यकाल
- पाँचवीं शताब्दी में रोमन साम्राज्य का पतन हुआ।
- छोटे-छोटे सामंत अपने भू-भाग पर शासन करने लगे।
- जमीन के बदले सैनिक सहायता देने की प्रथा को फ्यूडलिज्म (सामंतवाद) कहा गया।
- इस व्यवस्था में –
- सामंत किलों (कैसल) में रहते थे।
- किसान वंशानुगत दास (सर्फ) कहलाते थे।
- किसानों पर अत्याचार होता था और वे बहुत गरीब थे।
मुख्य विशेषताएँ:
- फ्यूडलिज्म का विकास
- सर्फ वर्ग का उदय
- समाज में असमानता और अत्याचार बढ़ा
अरबों का उदय
- अरब लोग अनेक कबीलों में बँटे थे।
- 7वीं शताब्दी में पैगंबर मोहम्मद ने इस्लाम धर्म का उपदेश दिया।
- अरब एकजुट होकर पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरोप के कई हिस्सों पर शासन करने लगे।
- उनका साम्राज्य भारत की उत्तर-पश्चिमी सीमा तक फैल गया।
अरबों की उपलब्धियाँ
- वे कुशल व्यापारी थे।
- भारत, चीन, यूरोप और अफ्रीका से व्यापार करते थे।
- कला, विज्ञान और साहित्य को प्रोत्साहन दिया।
- प्राचीन ग्रीक और भारतीय ग्रंथों का अरबी में अनुवाद किया।
- खगोलशास्त्र और गणित का भारतीय ज्ञान यूरोप तक पहुँचाया।
- बारूद, कागज और कंपास (कुतुबनुमा) का ज्ञान अरबों के माध्यम से यूरोप पहुँचा।
- भारत की संपन्नता के आकर्षण से उन्होंने यहाँ आक्रमण शुरू किए।
- तुर्कों ने भारत में राज्य स्थापना में सफलता पाई, जिससे भारत का मध्यकाल आरंभ हुआ।

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