लेखक
- उदय शंकर भट्ट
उद्देश्य
- राष्ट्र प्रेम और राष्ट्रीयता की भावना को जाग्रत करना।
- प्रत्यय और विपरीत शब्दों का परिचय देना।
कविता का सार
यह कविता देश प्रेम और एकता की भावना को प्रेरित करती है। कवि का सपना है कि भारत एक महान देश बने, जहाँ सभी लोग एकजुट हों, एक ही लक्ष्य और उद्देश्य के साथ आगे बढ़ें। कविता में देशवासियों को साहसी, नन्हें और देश के लिए समर्पित होने की प्रेरणा दी गई है। कवि चाहते हैं कि देशवासी अपने देश को हिमालय की तरह ऊँचा और गौरवमयी बनाएँ।
कविता की मुख्य पंक्तियाँ और उनका अर्थ
1. एक ध्येय हो, एक श्रेय हो, एक समान विधान बने। मेरा देश महान बने।
- अर्थ: सभी देशवासियों का एक ही लक्ष्य और कल्याणकारी उद्देश्य हो। देश का नियम एक समान हो, जिससे भारत महान बने।
2.एक देश हो, एक वेश हो, प्राणवान हो, सदुद्देश्य हो।
- अर्थ: देश एक हो, सभी की पहचान एक हो, लोग जीवंत हों और उनके उद्देश्य शुद्ध हों।
3.सिहों से लड़ने वाले हों, अवसर पर अड़ने वाले हों।
- अर्थ: देशवासियों को शेर की तरह साहसी और दृढ़ निश्चय वाला होना चाहिए, जो मुश्किलों का सामना करें।
4.हँसते-हँसते मौत मसल कर, आसमान चढ़ने वाले हों।
- अर्थ: देशवासी हँसते-हँसते मृत्यु को हराकर ऊँचे लक्ष्यों को प्राप्त करें।
5.वज्र बने दुश्मन को, प्रिय को फूलों की मुस्कान बने।
- अर्थ: दुश्मनों के लिए कठोर और दोस्तों के लिए कोमल और प्रेममयी बनें।
6. उठें, देश के लिए उठें हम, जिएँ, देश के लिए जिएँ हम।
- अर्थ: हमें देश के लिए जीना, मरना और हर कार्य करना चाहिए। भारत को महिमावान बनाने का ध्यान रखें।
कविता के मुख्य भाव
- राष्ट्र प्रेम: कवि देशवासियों को देश के लिए समर्पित होने की प्रेरणा देता है।
- एकता: सभी देशवासियों का लक्ष्य, नियम और उद्देश्य एक होना चाहिए।
- साहस और दृढ़ता: देशवासियों को शेर की तरह साहसी और दृढ़ निश्चय वाला होना चाहिए।
- समर्पण: हमें देश के लिए जीना, मरना और हर कार्य करना चाहिए।
- महानता: भारत को हिमालय की तरह गौरवमयी और महान बनाना है।
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