परिचय
- यह पाठ अमीर खुसरो के साहित्यकार और समन्वयवादी व्यक्तित्व पर आधारित है।
- खुसरो एक महान संत-कवि, दरबारी और दार्शनिक थे, जिन्होंने भारतीय संस्कृति और धर्मों के समन्वय को अपनी रचनाओं में दर्शाया।
- पाठ में गुरु-शिष्य के प्रेम, देशप्रेम और धर्मनिरपेक्षता की भावना पर जोर दिया गया है।
अमीर खुसरो का जीवन
जन्म: 1253 ई., दिल्ली के पास पटियाली ग्राम में।
बचपन का नाम: अबुल हसन यमीनुद्दीन।
1. परिवार:
- तुर्की से भारत आए परिवार में जन्म।
- पिता जागीरदार थे, कई बादशाहों के विश्वासपात्र।
2.प्रारंभिक जीवन:
- बचपन से विवेकशील, सुशील, कुशाग्र और मेधावी।
- पिता की मृत्यु के बाद नाना के घर दिल्ली आए।
3.गुरु: हजरत निजामुद्दीन औलिया (सूफी संत)।
- गुरु का विश्वास: ईश्वर को अलौकिक प्रेम से प्राप्त किया जा सकता है।
- खुसरो भी इस सूफी मत के अनुयायी बने।
- गुरु को खुसरो पर गर्व था, वे कहते थे: “अगर कब्र में दो लोग दफन हों, तो मैं खुसरो को अपने साथ चाहूँगा।”
साहित्यिक योगदान
1. लोकभाषा में काव्य:
- खुसरो ने लोकभाषा में काव्य रचा, जो बाद में साहित्यिक उर्दू बनी।
- उनकी रचनाएँ सरल और मन को छूने वाली थीं।
2.पहेलियाँ:
- रहस्यमयी और मनोरंजक पहेलियाँ लिखीं।
- उदाहरण:
- एक नार ने अचरज किया। साँप मार पिंजरे में दिया। ज्यों-ज्यों साँप ताल को खाय। सूखे ताल साँप मरि जाय। (दीपक, बाती, तेल)
3.मुकरियाँ:
- एक वस्तु की बात करते हुए दूसरी वस्तु को बताने की शैली।
- उदाहरण:
- वह आवे तो शादी होय, उस बिन दूजा और न कोय। मीठे लागे वाके बोल, क्यों सखि साजन, ना सखि ढोल।
4.गीत:
- बसंत गीत और बाबुल गीत बहुत प्रसिद्ध।
- उनकी रचनाओं में मधुरता और कसक थी, जो सुनने वालों को झुमा देती थी।
5.भारतीय संस्कृति:
- रचनाओं में भारत की जलवायु, पशु-पक्षी, पेड़-पौधे, धर्म और भाषाओं की जानकारी दी।
- भारत की प्रशंसा: “यह मेरा वतन है, मेरी भारत माता है।”
- वेदांत, बौद्ध और इस्लाम दर्शन को सहजता से समाहित किया।
समन्वयवादी भावना
- ननिहाल का प्रभाव: धार्मिक समन्वय सीखा।
- धर्मनिरपेक्षता: उनकी रचनाएँ लोगों को जोड़ती थीं, तोड़ती नहीं।
- देशप्रेम: भारत को अपनी माता माना और इंसानी बराबरी का उदाहरण प्रस्तुत किया।
गुरु के प्रति समर्पण
गुरु निजामुद्दीन औलिया के निधन पर खुसरो को गहरा दुख हुआ।
दिल्ली लौटकर अंतिम दर्शन किए, आँखों से अश्रुधारा बही।
उनकी अंतिम रचना:
गोरी सोवे सेज पर, मुख पर डारे केस। चल खुसरो घर आपने, रैन भई चहुँ देस।
इसके बाद उन्हें वैराग्य हो गया।
Leave a Reply