उद्देश्य
- पारस्परिक प्रेम, सहयोग और सहानुभूति के भावों को समझना।
- प्रतिभा को विकसित होने के अवसर प्रदान करने का महत्व जानना।
कहानी का सार
परिचय
- दीनानाथ शर्मा एक दिन फैक्ट्री से थके हुए घर लौटते हैं और उन्हें एक निमंत्रण-पत्र मिलता है।
- निमंत्रण-पत्र छगन चौधरी का है, जो अब डॉ. छगन चौधरी बन चुका है और रतनगढ़ में अपना नर्सिंग होम खोल रहा है।
- दीनानाथ को आश्चर्य और खुशी होती है, क्योंकि छगन वही लड़का है जिसने उनके बेटे दीनू की जान बचाई थी।
- दीनानाथ अतीत की यादों में खो जाते हैं और छगन के साथ अपनी पुरानी घटनाओं को याद करते हैं।
अतीत की घटना
- एक बारिश के दिन दीनानाथ अपने बच्चों, दीनू और रानी, के साथ गाँव के तालाब के पास घूमने जाते हैं।
- तालाब की पाल पर बैठे दीनानाथ के सामने दीनू खेलते-खेलते तालाब में गिर जाता है।
- पास में बकरियाँ चराने वाला छगन दीनू को बचाने के लिए तालाब में कूद पड़ता है और उसे सुरक्षित किनारे लाता है।
- दीनानाथ छगन को गले लगाते हैं और उसकी बहादुरी की प्रशंसा करते हैं।
छगन का परिचय
- छगन एक गरीब किसान का बेटा है, जो आठवीं कक्षा तक पढ़ा था, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई छोड़ दी।
- वह गाँव के बाहर रहता है और बकरियाँ चराकर परिवार का सहारा देता है।
- उसका व्यवहार शिष्ट और सभ्य है, जिससे दीनानाथ बहुत प्रभावित होते हैं।
दीनानाथ का फैसला
- दीनानाथ छगन की मदद करने का निर्णय लेते हैं।
- वे छगन के घर जाते हैं और उसकी पढ़ाई का खर्च उठाने का वादा करते हैं।
- छगन और दीनू एक साथ स्कूल जाने लगते हैं और दोनों में गहरी मित्रता हो जाती है।
छगन और दीनू की मित्रता
- छगन और दीनू की मित्रता कृष्ण-सुदामा की तरह सच्ची और निःस्वार्थ होती है।
- दोनों एक-दूसरे के सुख-दुख में साथी बनते हैं।
- दीनू के लिए छगन आदर्श बन जाता है, और छगन के लिए दीनू एक वरदान।
समय का बीतना
- तीन साल बाद दीनानाथ का स्थानांतरण दूसरे शहर में हो जाता है, जिससे छगन और दीनू को बिछड़ना पड़ता है।
- छगन बोर्ड परीक्षा में शीर्ष स्थान प्राप्त करता है और छात्रवृत्ति के साथ अपनी पढ़ाई पूरी करता है।
- वह डॉक्टर बन जाता है और रतनगढ़ में नर्सिंग होम खोलता है।
पुनर्मिलन
- दीनानाथ छगन के नर्सिंग होम के उद्घाटन में जाते हैं।
- छगन ने निमंत्रण-पत्र के साथ एक चिट्ठी भेजी थी, जिसमें लिखा था कि उद्घाटन दीनानाथ के पिताजी के हाथों होना था, लेकिन दीनानाथ के पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं।
- दीनानाथ और छगन का मिलन बहुत भावुक होता है। दोनों पुरानी यादों में खो जाते हैं।
- छगन की पत्नी नीला भी मेहमानों का स्वागत करती है।
- उद्घाटन समारोह खुशी से संपन्न होता है।
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