उद्देश्य
- व्यंग्य विधा का परिचय प्राप्त करना।
- उर्दू, अंग्रेजी और हिंदी शब्दों को अलग-अलग पहचानना।
लेखक
- हरिशंकर परसाई: यह पाठ प्रसिद्ध व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई द्वारा लिखा गया है।
कहानी का सार
परिचय
- लेखक हास्य और व्यंग्य के माध्यम से उन लोगों की बात करते हैं जो समय पर नहीं मिलते या समय पर दूसरों के घर नहीं जाते।
लोग तीन प्रकार के होते हैं:
- समय पर घर न मिलने वाले।
- समय पर किसी के घर न जाने वाले।
- न समय पर घर मिलने वाले और न ही किसी के घर समय पर जाने वाले।
- कुछ लोग ऐसे भी हैं जो समय पर घर मिलते हैं और समय पर दूसरों के घर भी जाते हैं। लेखक इन्हें मजाक में टाइमपीस कहते हैं, क्योंकि ये हमेशा घड़ी देखते रहते हैं।
- लेखक का कहना है कि ऐसे लोगों की चर्चा करना व्यर्थ है। असल चर्चा उन लोगों की होनी चाहिए जो समय का वादा करके भी समय पर नहीं मिलते।
समय पर न मिलने की स्थिति
- लेखक बताते हैं कि जब कोई सुबह 8 बजे मिलने का वादा करता है, लेकिन घर पर नहीं होता, तो इंतजार करने वाला परेशान हो जाता है।
- घर में बड़ा लड़का शिष्टता दिखाने के लिए किताब पढ़ता रहता है, लेकिन बीच-बीच में इंतजार करने वाले को देखता रहता है।
- इंतजार करने वाला तनाव कम करने के लिए लड़के से पढ़ाई या खेल की बात करता है, लेकिन लड़का छोटे-छोटे जवाब देता है।
- इंतजार करने वाला अखबार पढ़ने लगता है, लेकिन बार-बार पूछता है कि व्यक्ति कहाँ गया, कब आएगा। जवाब हमेशा “पता नहीं” मिलता है।
- घर की औरतें परेशान होकर आपस में बात करती हैं कि इंतजार करने वाला क्यों नहीं जाता। उनकी बातें सुनकर इंतजार करने वाले का चेहरा लाल हो जाता है, लेकिन जरूरी काम के कारण वह रुकता है।
- आखिरकार, वह हार मानकर चला जाता है और लड़के से कहता है कि बता देना कि वह आया था।
दोबारा कोशिश
- अगले दिन फिर 8 बजे इंतजार करने वाला उस व्यक्ति के घर जाता है, लेकिन वह फिर नहीं मिलता।
- बड़ा लड़का फाटक पर ही बता देता है कि व्यक्ति घर पर नहीं है। इंतजार करने वाला फिर भी अंदर जाकर बैठता है।
- छोटा लड़का चिल्लाकर माँ को बताता है कि “वो फिर आ गया”। औरतें फिर शिकायत करती हैं कि वह बेकार बैठा है।
- छोटा लड़का बार-बार दरवाजे पर आकर कहता है, “ए, पापा बाहर गए हैं”। बड़ा लड़का उसे डाँटता है, लेकिन छोटे को यह खेल मजेदार लगता है।
- आखिर में इंतजार करने वाला फिर बिना मिले चला जाता है। पूरा परिवार खिड़की और दरवाजे से उसे जाते हुए देखता है।
समय पर मिलने का महत्व
- लेखक कहते हैं कि जो लोग समय तय करके भी नहीं मिलते, वे भगवान के एजेंट जैसे हैं। वे हमें सिखाते हैं कि बिना ऊबे और अपमान सहकर लंबा इंतजार कैसे करना है।
- लेखक मजाक में कहते हैं कि भगवान के दरवाजे पर तो कई जन्म इंतजार करना पड़ता है, इसलिए ऐसे लोगों से अभ्यास हो जाता है।
- इंतजार से प्रेम बढ़ता है, क्योंकि इंतजार करने वाला हर पल उसी व्यक्ति के बारे में सोचता है और उसकी राह देखता है।
लेखक का अनुभव
- लेखक अपने एक दोस्त की कहानी बताते हैं जो समय पर कभी नहीं मिलते। लेखक उनके घर उस समय जाते हैं जब मिलने की संभावना सबसे कम होती है, और तब वे मिल जाते हैं।
- एक बार दोस्त ने लेखक को सुबह 11 बजे खाने पर बुलाया, लेकिन वे घर पर नहीं थे। लेखक को इंतजार करते हुए पता चला कि दोस्त किसी और के घर खाना खा रहे थे।
- कई सालों के अनुभव से लेखक ने सावधानी की दीवार खड़ी की और तय समय पर दोस्त के घर नहीं जाते।
- एक बार दोस्त ने लेखक और एक अन्य मित्र को भोजन के लिए बुलाया। लेखक को शक था, लेकिन दोस्त की भावुकता के कारण वे चले गए। फिर भी दोस्त घर पर नहीं मिले।
- बाद में दोस्त ने फिर भोजन का निमंत्रण दिया, लेकिन लेखक और उनके मित्र ने समय तय करने से मना कर दिया।
लेखक का नजरिया
- लेखक कहते हैं कि समय पर न मिलने वालों की निंदा होती है, लेकिन वे इन्हें ज्ञानी मानते हैं।
- ये लोग जानते हैं कि काम अनंत है और आत्मा अमर है। अगर इस जन्म में काम पूरे नहीं हुए, तो अगले जन्म में पूरे हो जाएँगे।
- लेखक मजाक में कहते हैं कि इस जन्म में मनुष्य का चोला लिया है, अगले जन्म में मेंढक का चोला ले सकते हैं। इसलिए जल्दी की क्या जरूरत है?
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