उद्देश्य
- ग्रामीण जीवन और संस्कृति का सामान्य ज्ञान प्राप्त करना।
- सौंदर्य बोध का भाव जगाना।
- सर्वनाम शब्दों की पहचान करना।
कवि
- मैथिलीशरण गुप्त: यह कविता प्रसिद्ध हिंदी कवि मैथिलीशरण गुप्त द्वारा लिखी गई है।
कविता का सार
1. पहला छंद
- कवि ग्राम्य जीवन की सुंदरता और सादगी की प्रशंसा करते हैं।
- गाँव का जीवन इतना आकर्षक है कि हर कोई इसे चाहता है।
- गाँव में कम साधनों में भी निर्वाह (गुजारा) हो जाता है, जो शहरों में संभव नहीं।
- शहरों की तरह गाँव में आडंबर (दिखावा) और अनाचार (बुरा व्यवहार) नहीं होता।
2.दूसरा छंद
- गाँव के लोग सीधे-सादे और भोले-भाले होते हैं, जो उन्हें अनोखा बनाता है।
- ग्रामीणों में एक-दूसरे के लिए ममता और प्रेममयी समता होती है।
- भले ही उनके शरीर का रंग काला हो, लेकिन उनका मन बहुत उज्ज्वल (स्वच्छ और पवित्र) होता है।
- उनका अंतःकरण (हृदय) बहुत सरल होता है, और वे ईश्वर और अपनी मेहनत पर भरोसा करते हैं।
3.तीसरा छंद
- गाँव में सभी के पास विभूति (धन-संपत्ति) और पारस्परिक सहानुभूति होती है।
- वहाँ ईर्ष्या (जलन) या द्वेष (बैर) नहीं होता, और कपट (छल) का नामोनिशान नहीं है।
- गाँव के घर मिट्टी के बने होते हैं, जो लिपे-पुते और स्वच्छ-सुघर (सुंदर) होते हैं।
- आँगन में गाय के खुर (गोपद) के निशान होते हैं, और एक तरफ जल-घट (पानी का घड़ा) रखा होता है।
4.चौथा छंद
- गाँव के घरों की खपरैलों (छतों) पर हरी-भरी बेलें उगी होती हैं, जो मन को भाती हैं।
- वहाँ काशीफल (कदू), कुष्मांड (कुम्हड़ा), और लौकी जैसी सब्जियाँ लटकती हैं।
- गाँव की हवा इतनी शुद्ध है कि उसका गुण डॉक्टरी दवाओं में भी नहीं मिलता।
- संध्या (शाम) के समय गाँव के बाहर का दृश्य नंदन विपिन (सुंदर जंगल) जैसा लगता है।
5.पाँचवाँ छंद
- गाँव के लोग श्रम-सहिष्णु (मेहनती और धैर्यवान) होते हैं और आलस से दूर रहते हैं।
- वे दिनभर खेतों में काम करते हैं और कभी रुकते नहीं।
- गाँव में अतिथि का स्वागत ऐसे किया जाता है जैसे वह कोई संबंधी हो।
- अतिथि को ठहराने और उसका आतिथ्य करने में गाँव वाले कोई कसर नहीं छोड़ते।
Leave a Reply