उद्देश्य
- अमर शहीदों के देश प्रेम, साहस और शौर्य से परिचय प्राप्त करना।
- सरल, मिश्र और संयुक्त वाक्यों का सामान्य ज्ञान प्राप्त करना।
लेखक
- योगेश चन्द्र शर्मा: यह एकांकी योगेश चन्द्र शर्मा द्वारा लिखी गई है।
एकांकी का सार
परिचय
- स्वतंत्रता संग्राम में क्रांतिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
- क्रांतिकारियों को हथियारों के लिए धन की जरूरत थी, इसलिए वे ब्रिटिश सरकार का खजाना लूटना बेहतर समझते थे।
- क्रांतिकारियों को सूचना मिली कि एक ट्रेन से सरकारी खजाना दिल्ली जाएगा।
- उन्होंने काकोरी नामक स्थान पर ट्रेन रोकी और खजाना लूट लिया।
- रामप्रसाद बिस्मिल इस योजना में शामिल थे।
- अंग्रेजों ने उन्हें और उनके साथियों को पकड़ लिया।
- बिस्मिल को फाँसी की सजा हुई।
- फाँसी के एक दिन पहले उनकी माँ जेल में मिलने आई।
- बिस्मिल अपनी माँ से मिलना नहीं चाहते थे, क्योंकि उन्हें डर था कि माँ दुखी हो जाएँगी।
- लेकिन माँ का हृदय चट्टान की तरह कठोर था। उन्हें गर्व था कि उनका बेटा भारत माँ को आजाद कराने के लिए फाँसी पर चढ़ रहा है।
- माँ ने देशभक्ति से भरे दिल से बेटे को आशीर्वाद दिया और हँसते-हँसते विदा ली।
दृश्य और संवाद
- दृश्य: जेल की कोठरी, बिस्मिल सींखचों के पीछे गाते हुए घूम रहे हैं।
- गीत: “सरफरोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है। देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है। सिर्फ मिट जाने की हसरत, इक दिले बिस्मिल में है। अब तेरी हिम्मत की चर्चा, गैर की महफिल में है।”
- जेलर (भारतीय, बिस्मिल के प्रति अपनापन): बिस्मिल से कहता है कि उनकी माँ मिलने आई हैं।
- बिस्मिल: पहले प्रसन्न होते हैं, फिर उदास होकर मना कर देते हैं। कहते हैं कि माँ को दुख होगा, उनकी आँखें गीली हो जाएँगी, जिससे उनके कदम डगमगा सकते हैं।
- जेलर: आश्चर्य करता है कि आखिरी बार माँ से क्यों नहीं मिलोगे।
- बिस्मिल: कहते हैं कि वे चट्टान की तरह अटल हैं, लेकिन माँ से मिलने की हिम्मत नहीं है। जेलर से माँ से क्षमा माँगने को कहते हैं।
- माँ का प्रवेश: माँ पूछती है कि बेटा मुझसे क्यों नहीं मिलेगा। अपनी ओर देखने को कहती है।
- बिस्मिल: माँ को देखकर आश्चर्य करते हैं।
- माँ: कहती है कि बेटे को जानती है, वह सोच रहा होगा कि माँ दुखी होगी। लेकिन वह रामप्रसाद बिस्मिल की माँ है, जो भारत माँ की बेटी है।
- बिस्मिल: माँ से माफ़ी माँगते हैं।
- माँ: कहती है कि आज खुशी का दिन है, क्योंकि बेटा कुर्बानी की राह पर जा रहा है। अफसोस है कि दूसरा बेटा छोटा है।
- बिस्मिल: विश्वास दिलाते हैं कि उनके बलिदान से कई रामप्रसाद पैदा होंगे, देश आजाद होगा।
- बिस्मिल की इच्छा: आजादी के पहले जश्न में उनकी तस्वीर ऐसी जगह रखना जहाँ से वे जश्न देख सकें, लेकिन कोई उन्हें न देख सके।
- माँ: पूछती है क्यों, लेकिन बिस्मिल कहते हैं कि लोग उनकी याद में दुखी होंगे, जबकि जश्न खुशी का होना चाहिए।
- माँ: इच्छा पूरी करने का वादा करती है।
- बिस्मिल: अगले जन्म में भी माँ बनने की कामना करते हैं।
- माँ: फिर कुर्बान करने की बात कहती है, लेकिन गला रूँध जाता है।
- बिस्मिल: पूछते हैं क्या हुआ।
- माँ: हँसकर कहती है कि कुछ नहीं, आँसू खुशी के हैं।
- बिस्मिल: कहते हैं कि आँसू उनके कदम डगमगा रहे हैं।
- माँ: बहादुर ऐसी बातें नहीं करते, कोई शक्ति उनके कदम नहीं डगमगा सकती।
- बिस्मिल: माँ के दुख को सहन नहीं कर सकते।
- माँ: ये खुशी के आँसू हैं, संतान को कुर्बान करने में खुशी है।
- माँ: जेलर से पूछती है कि फाँसी के समय रह सकती है? जेलर मना करता है।
- बिस्मिल: कहते हैं कि अब भारत माँ की सेवा करेंगे।
- माँ: बेटे के सिर पर हाथ फेरती है, बिस्मिल पैर छूता है। माँ जेलर के साथ जाती है।
- बिस्मिल माँ की तरफ देखता रहता है।
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