लेखक
- संकलित (लेखक का नाम नहीं दिया गया)
उद्देश्य
- जीवन में विनम्रता और बड़ों के प्रति आदर की भावना को जाग्रत करना।
- विशेषण और विशेष्य शब्दों की पहचान करना।
पाठ का सार
यह पाठ विनम्रता के महत्व को समझाता है। पाठ में एक कहानी के माध्यम से बताया गया है कि कैसे शर्माजी के बेटे विराट और बेटी विधु के व्यवहार में अंतर है। विराट का व्यवहार असभ्य और लापरवाह है, जबकि विधु का व्यवहार विनम्र और शिष्ट है। कविता के माध्यम से विनम्रता को एक ऐसा गुण बताया गया है जो व्यक्ति को आकर्षक बनाता है, लोगों का दिल जीतता है और जीवन में सफलता दिलाता है। विनम्रता को दीनता से अलग बताया गया है, क्योंकि विनम्र व्यक्ति दाता होता है, जो प्यार और सम्मान बाँटता है।
कहानी का सार
- कहानी का आधार: लेखक को शर्माजी से मिलने उनके घर जाना था। वहाँ उन्होंने शर्माजी के बेटे विराट और बेटी विधु के व्यवहार को देखा।
- विराट का व्यवहार: विराट खेल में व्यस्त था और उसने लेखक (वीरेन्द्र अंकल) के सवाल का जवाब बिना ध्यान दिए, संक्षिप्त और असभ्य तरीके से दिया। उसने सिर्फ चिल्लाकर पापा को सूचना दी और अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली।
- विधु का व्यवहार: विधु ने विनम्रता से लेखक का स्वागत किया, नमस्कार किया, उन्हें बैठने को कहा और पानी लाकर दिया। उसका व्यवहार शिष्ट, सहज और सम्मानजनक था।
- निष्कर्ष: लेखक को विधु का विनम्र व्यवहार अच्छा लगा और उन्होंने सोचा कि पढ़ाई में तेज होने के बावजूद विराट की तुलना में विधु की प्रशंसा इसलिए होती है क्योंकि वह विनम्र है।
विनम्रता के बारे में मुख्य बिंदु
1. विनम्रता क्या है?
- विनम्रता चरित्र का एक महत्वपूर्ण गुण है, जो व्यक्ति को सुसंस्कृत बनाता है।
- यह एक चुंबक की तरह है, जो दूसरों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
- विनम्र व्यक्ति की बोली कोमल, व्यवहार शिष्ट और भावनाएँ दूसरों के प्रति सम्मान से भरी होती हैं।
2.विनम्रता और दीनता में अंतर
- दीनता याचक (माँगने वाला) की भावना है, जबकि विनम्रता दाता की भावना है।
- विनम्र व्यक्ति प्यार, सम्मान और मेल-मिलाप की भावना फैलाता है।
3.विनम्र व्यक्ति की पहचान
- आगंतुक (मेहमान) का प्रसन्नता से स्वागत करना।
- बड़ों के बैठने के बाद ही बैठना।
- सभी की गरिमा और भावनाओं का सम्मान करना।
- भाषा में स्पष्टता, सहजता और शिष्टता होना।
4.विनम्रता का महत्व
- विनम्रता व्यक्ति के व्यक्तित्व को आकर्षक बनाती है।
- यह सफलता की गारंटी है और समस्याओं का समाधान आसान करती है।
- विनम्र व्यवहार से कारोबारी का व्यवसाय फलता-फूलता है।
- यह बड़ों, बराबर वालों और छोटों के प्रति सम्मान और स्नेह की भावना को दर्शाता है।
5.विनम्रता के नियम
- बड़ों के बुलाने पर “जी हाँ”, “जी आया” जैसे शब्दों का उपयोग करना चाहिए।
- जवाब देते समय दूसरों की भावनाओं को ठेस नहीं पहुँचानी चाहिए।
- अगर कोई हमारे लिए कष्ट उठाए, तो उसका धन्यवाद हृदय से करना चाहिए।
- अगर कोई हमारी विनम्रता को कमजोरी समझे, तो स्वाभिमान की रक्षा करनी चाहिए, लेकिन अपने सद्गुणों को नहीं छोड़ना चाहिए।
6.प्रकृति से सीख
- समुद्र की तरह विनम्र व्यक्ति सबको अपने में समा लेता है, चाहे कितनी भी नदियाँ उसमें मिलें।
- नदी जब बाढ़ के रूप में आती है, तो जो पेड़ झुक जाते हैं, वे बच जाते हैं, लेकिन जो अकड़कर खड़े रहते हैं, वे बह जाते हैं। विनम्रता जीवंतता देती है, जबकि अहंकार विनाश का कारण बनता है।
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