मुख्य विषय
लेखक: संकलित
उद्देश्य:
- पत्र लेखन की विधा सीखना।
- जीवन में बचत का महत्व समझना।
- शब्दों का संधि-विच्छेद करना।
मुख्य संदेश: छोटी-छोटी बचत से बड़ी पूँजी बन सकती है, जो निजी और राष्ट्रीय विकास में मदद करती है।
पत्र का सार
- पत्र लेखक: माँ
- पत्र प्राप्तकर्ता: पुनीत (कक्षा 8, विवेकानंद विद्याभवन, भोपाल)
- स्थान और तारीख: आदर्श नगर, इंदौर, 6 अक्टूबर 2007
मुख्य बिंदु:
- माँ को पुनीत का पत्र मिला, जिसमें उसकी पढ़ाई और स्वास्थ्य की जानकारी थी।
- पुनीत की दीदी पवित्रा ने अपनी बचत से कंप्यूटर खरीदा। उसने छात्रवृत्ति और माँ द्वारा भेजे गए पैसों को डाकघर के बचत खाते में जमा किया और मितव्ययिता से 15,000 रुपये इकट्ठा किए।
- माँ ने कम रुपये जोड़कर कंप्यूटर खरीदने में मदद की।
- कंप्यूटर से पवित्रा की बौद्धिक क्षमता बढ़ेगी और रोजगार के अवसर मिलेंगे।
- माँ ने पुनीत को सलाह दी कि वह भी बचत खाते में पैसे जमा करे, खर्च पर ध्यान दे और अपव्यय से बचे।
बचत के लाभ:
- पैसों का हिसाब रहता है।
- व्यर्थ की चीजों के लिए लालच नहीं होता।
- मितव्ययिता का गुण विकसित होता है।
- छोटी बचत बड़ी आवश्यकताएँ पूरी करती है।
- राष्ट्रीय विकास में योगदान देती है, क्योंकि बचत का पैसा सार्वजनिक कार्यों में उपयोग होता है।
- माँ ने पुनीत को 500 रुपये भेजे, लेकिन पूछा कि इतनी जल्दी पैसे की जरूरत क्यों पड़ी।
- माँ ने कहा कि पैसा खर्च करने से पहले सोच-विचार करना चाहिए।
- लोकोक्ति: “क्षणशः कणशश्चैव विद्यामर्थ च साधयेत्” – एक-एक क्षण और एक-एक पैसा बचाकर विद्या और धन प्राप्त किया जा सकता है।
- माँ ने पुनीत को अपनी प्रगति के बारे में पत्र लिखकर बताने को कहा।
शिक्षण संकेत
- पत्र लेखन की विधा और इसके महत्व को समझाएँ (विचारों का आदान-प्रदान)।
- मितव्ययिता का महत्व और अपव्यय की हानियाँ बताएँ।
- बच्चों को बचत के लिए प्रोत्साहित करें।
- कठिन शब्दों के अर्थ समझाएँ।
- बच्चों को मित्रों या रिश्तेदारों को पत्र लिखने की प्रैक्टिस कराएँ।
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