मुख्य विषय
लेखक: रामनारायण उपाध्याय
उद्देश्य:
- संस्मरण विधा का परिचय।
- ग्रामीण रहन-सहन और संस्कृति की जानकारी।
- क्रिया के प्रेरणार्थक रूप को समझना।
मुख्य संदेश: गाँव की पुरानी संस्कृति और सादगी लुप्त हो रही है। शहरीकरण और औद्योगिकीकरण ने गाँव का स्वरूप बदल दिया है, जिससे लेखक को अपना पुराना गाँव नहीं मिलता।
संस्मरण का सार
लेखक का दुख: लेखक जब गाँव जाता है, तो उसे अपना पुराना गाँव नहीं मिलता। गलियाँ, चौराहे, नदी का घाट और रास्ते वही हैं, लेकिन गाँव की आत्मा खो गई है।
चौपाल की स्थिति: गाँव की चौपाल खाली पड़ी है। पहले वहाँ लोग चौसर खेलते और बातें करते थे, लेकिन अब वहाँ कोई नहीं आता। कुछ लोग हैं, लेकिन उनमें घर की देहरी लाँघने की ताकत नहीं।
पुरानी यादें:
- गाँव में कुँडी के पानी और कंडे की आग पर चिलम के साथ बातें होती थीं, जो अब बंद हो गई हैं।
- गली के मोड़ पर बूढ़ा नीम पेड़ अब भी खड़ा है, लेकिन कोई उससे झूला नहीं बाँधता। हवा उसकी पीली पत्तियों को उड़ा ले जाती है।
- एक जन्मांध बूढ़ा, जो लेखक के पाँव की आवाज़ पहचानता था, अब नहीं रहा। वह पाँवों की आवाज़ से लोगों को पहचानता था और उनकी भावनाओं को समझता था। वह बकरी के दूध की चाय और 10 पैसे की दक्षिणा देता था, जिससे लेखक को बहुत खुशी मिलती थी।
नदी की स्थिति: नदी का पानी सूख गया है। पहले कंकड़ी फेंकने पर तरंगें उठती थीं, लेकिन अब नदी रेत बन चुकी है।
गाँव का बदलता स्वरूप:
- पहले गाँव में रथ-सी सजी गाड़ियाँ होती थीं, अब ठेले खड़े हैं।
- गाँव का दूध अब बच्चों के लिए नहीं, बल्कि होटलों की भूख मिटाने में खर्च हो रहा है।
- अमराई में आम तो हैं, लेकिन कोयल की जगह कौए बैठते हैं, जो यह देखते हैं कि कोई आम न ले ले।
- महुआ अब गाँव की गोरियों के इशारे पर नहीं, बल्कि ठेकेदार की ठोकर पर टपकता है।
लेखक का सवाल: कुछ लोग गाँव की जमीन पर दफ्तर, होटल और दुकानें बना रहे हैं। वे अनुदान के पैसे से गलत काम कर रहे हैं और गाँव वालों को उनकी जमीन से बेदखल कर रहे हैं। लेखक पूछता है कि ये लोग कौन हैं, जो गाँव की एकता और संस्कृति को नष्ट कर रहे हैं?
लेखक की भावना: लेखक को लगता है कि उसका गाँव कहीं खो गया है, और वह उसे ढूँढ नहीं पा रहा।
शिक्षण संकेत
- संस्मरण विधा की जानकारी दें।
- ग्रामीण संस्कृति और परिवेश के बारे में बताएँ।
- शहरीकरण और औद्योगिकीकरण के प्रभाव पर चर्चा करें।
- कठिन शब्दों के अर्थ समझाएँ।
- शब्दों के शुद्ध उच्चारण और लेखन पर ध्यान दें।
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