मुख्य विषय
- लेखक: मुंशी प्रेमचंद
- उद्देश्य:
- पंचायती राज और न्याय व्यवस्था को समझना।
- मित्रता, प्रेम और सहानुभूति की भावना जाग्रत करना।
- शुद्ध लेखन और उच्चारण का अभ्यास।
- मुख्य संदेश: पंचायत में पंच न किसी का दोस्त होता है, न दुश्मन। पंच का फैसला निष्पक्ष और ईमानदारी से होता है, जो परमेश्वर का काम माना जाता है।
कहानी का सार
- अलगू और जुम्मन की मित्रता:
- अलगू चौधरी और जुम्मन शेख गहरे दोस्त थे। दोनों ने एक साथ शिक्षा पाई थी और एक-दूसरे पर पूरा भरोसा करते थे। कठिन समय में एक-दूसरे का साथ देते थे। अलगू बाहर जाने पर घर जुम्मन को और जुम्मन बाहर जाने पर घर अलगू को सौंपता था।
- जुम्मन की मौसी का दुख:
- जुम्मन की वृद्धा मौसी उसके साथ रहती थी। जब तक उसने अपनी संपत्ति (खेत और घर) जुम्मन के नाम नहीं की थी, तब तक उसकी खातिरदारी होती थी। संपत्ति लिखने के बाद जुम्मन और उसकी गर्म मिजाज पत्नी ने मौसी की उपेक्षा शुरू कर दी। मौसी को रोटी-दाल तक के लिए तरसना पड़ता था।
- मौसी ने जुम्मन से रुपये माँगे ताकि वह अपना खाना बना सके, लेकिन जुम्मन ने क्रोध में कहा कि रुपये पेड़ पर नहीं फलते और मौसी को ताने दिए।
पहली पंचायत:
- मौसी ने पंचायत बुलाई और अलगू चौधरी को सरपंच चुना। जुम्मन ने इसका विरोध किया, लेकिन मौसी ने कहा कि पंच न दोस्त होता है, न दुश्मन; उनके दिल में खुदा बसता है।
- अलगू ने ईमानदारी से पंचायत चलाई और जुम्मन से सवाल किए। अंत में फैसला सुनाया कि जुम्मन को मौसी के खेतों की कमाई से मासिक खर्च देना होगा, वरना खेतों की लिखा-पढ़ी रद्द हो जाएगी।
- इस फैसले से जुम्मन अलगू का दुश्मन बन गया और बदला लेने का मौका ढूँढने लगा।
अलगू का संकट:
- अलगू ने बैलों की एक जोड़ी खरीदी, लेकिन एक बैल मर गया। उसने बचा हुआ बैल समझू साहू को बेच दिया, जिसने एक महीने में पैसे चुकाने का वादा किया।
- समझू ने बैल से बहुत काम लिया, लेकिन उसका खाना-पानी का ध्यान नहीं रखा। एक दिन ज्यादा बोझ और कोड़ों के कारण बैल मर गया। उसी रात चोर सामान और रुपये चुरा ले गए।
- समझू ने बैल का दाम नहीं दिया और अलगू को जली-कटी बातें सुनाईं। मजबूरन अलगू ने पंचायत बुलाई।
दूसरी पंचायत:
- समझू ने जुम्मन को सरपंच चुना, क्योंकि उसे जुम्मन और अलगू की दुश्मनी का पता था। लेकिन सरपंच बनते ही जुम्मन का मन बदल गया और उसने निष्पक्षता से काम किया।
- पंचों ने दोनों पक्षों की बात सुनी। कुछ पंच समझू को रियायत देना चाहते थे, लेकिन अन्य पंचों ने कहा कि समझू ने बैल की देखभाल नहीं की, इसलिए वह पूरी कीमत और दंड दे।
- जुम्मन ने फैसला सुनाया कि समझू को बैल का पूरा दाम देना होगा, क्योंकि बैल खरीदते समय वह स्वस्थ था।
पंचायत का प्रभाव:
- जनता ने पंचायत के फैसले की तारीफ की और कहा, “पंच परमेश्वर की जय, यह दूध का दूध और पानी का पानी है।”
- जुम्मन ने अलगू से माफी माँगी और कहा कि पंच के पद पर बैठकर उसे कोई मित्र या शत्रु नहीं दिखता, केवल न्याय सूझता है। दोनों फिर से दोस्त बन गए, और उनकी मित्रता पहले जैसी हो गई।
शिक्षण संकेत
- कहानी को भावपूर्ण ढंग से सुनाएँ और बच्चों से सुनवाएँ।
- प्रेमचंद की अन्य कहानियों (जैसे ‘ईदगाह’, ‘नमक का दारोगा’) पर चर्चा करें।
- ‘दूध का दूध, पानी का पानी’ की भावना वाली कहानियाँ सुनाएँ।
- ‘निष्ठुर’, ‘क्रुद्ध’, ‘जुम्मन’ जैसे शब्द लिखवाएँ और उनके अर्थ समझाएँ।
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