मुख्य विषय
- लेखक: डॉ. एम. एस. पुरोहित
उद्देश्य:
- स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना।
- शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में संतुलन रखना।
मुख्य संदेश: पूर्ण स्वास्थ्य केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक भी होना चाहिए। भावनाओं पर नियंत्रण से जीवन सफल होता है।
स्वास्थ्य का अर्थ
- शारीरिक स्वास्थ्य:
- शरीर के बाहरी अंग (जैसे त्वचा, आँखें) और आंतरिक अंग (जैसे हृदय, फेफड़े, पाचन तंत्र, कंकाल, मस्तिष्क) ठीक से काम करें।
- अगर आंतरिक अंगों में खराबी हो तो बुखार, थकान जैसे लक्षण दिखते हैं।
- परिश्रम से आंतरिक अंग मजबूत रहते हैं।
- स्वस्थ रहने के लिए बाहरी और आंतरिक दोनों अंगों का स्वस्थ होना जरूरी है।
- मानसिक स्वास्थ्य:
- समस्या आने पर आसानी से समाधान निकालना।
- अगर परिणाम उम्मीद के मुताबिक न हो तो निराशा होती है।
- बुद्धिमान व्यक्ति भी कभी गलत निर्णय ले सकता है अगर मानसिक स्वास्थ्य कमजोर हो।
- शारीरिक स्वास्थ्य पर मानसिक स्वास्थ्य का प्रभाव पड़ता है।
- भावनात्मक स्वास्थ्य:
- भावनाएँ जैसे हर्ष, शोक, क्रोध, ईर्ष्या, द्वेष, प्रेम, वात्सल्य, दया, करुणा, भय, आश्चर्य मन में रहती हैं।
- ये भावनाएँ परिस्थितियों से मजबूत या कमजोर होती हैं।
- इच्छा पूरी होने पर खुशी, न होने पर क्रोध या निराशा।
- अच्छा भावनात्मक स्वास्थ्य: संयम और धैर्य से भावनाओं को नियंत्रित करना।
- सफलता के लिए शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य सब अच्छे होने चाहिए।
भावनाओं का प्रभाव
- शारीरिक स्वास्थ्य पर:
- तनाव, चिंता से अम्लता, अल्सर, हृदय रोग, सिरदर्द, थकान होती है।
- ज्यादा खुशी या दुख से हृदय पर असर, कभी हृदयाघात से मौत।
- क्रोध, ईर्ष्या, द्वेष से रक्तचाप बढ़ता है, हार्मोन असंतुलित होते हैं, कई बीमारियाँ होती हैं।
- क्रोध, कुंठा से काम में गलतियाँ और अरुचि।
- मानसिक स्वास्थ्य पर:
- नकारात्मक भावनाएँ (क्रोध, ईर्ष्या, द्वेष, तनाव, चिंता, अहंकार, निर्दयता, डर) त्यागें।
- सकारात्मक व्यवहार से मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहता है।
- भावनात्मक स्थिरता से मस्तिष्क शरीर के अंगों को सही संदेश देता है, उद्देश्य प्राप्ति आसान होती है।
पूर्ण स्वास्थ्य के उपाय
- मानसिक शांति के लिए: योग, ध्यान, प्राणायाम से अस्थमा, हार्मोन संबंधी रोग, रक्तचाप नियंत्रित होते हैं।
पूर्ण स्वस्थ व्यक्ति की विशेषताएँ:
- परिस्थितियों का आत्मविश्वास से सामना करता है, भावनात्मक रूप से नहीं डगमगाता।
- भावनाओं पर नियंत्रण रखता है, विवेक से काम करता है।
- छोटी बातों का बोझ नहीं रखता, लक्ष्य से नहीं भटकता।
- अपनी क्षमता से बाहर की चिंता नहीं करता।
- जीवन के उद्देश्य स्पष्ट रखता है, कठिनाइयों को अवसर मानता है।
- तात्कालिक लक्ष्यों से दूरगामी उद्देश्यों की ओर बढ़ता है, इससे संतोष और आनंद मिलता है।
उक्ति: “स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन निवास करता है।”
शिक्षण संकेत
- स्वास्थ्य प्राप्ति की जानकारी दें।
- बच्चों में श्रद्धा और बुद्धिमत्ता का विकास करें।
- शारीरिक विकास की जानकारी दें।
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