लेखक
- भगवतशरण उपाध्याय
उद्देश्य
- उदारता, परोपकार और अहिंसा की भावना को जाग्रत करना।
- संज्ञा, विशेषण और क्रिया शब्दों की पहचान करना।
कहानी का सार
यह पाठ महात्मा बुद्ध और अंगुलिमाल डाकू की कहानी के माध्यम से अहिंसा की शक्ति को दर्शाता है। श्रावस्ती के राजा प्रसेनजित अपनी प्रजा को अंगुलिमाल डाकू के अत्याचारों से बचाने के लिए चिंतित थे। महात्मा बुद्ध ने राजा की चिंता को दूर करने का वादा किया और अंगुलिमाल से मिलने जंगल में गए। बुद्ध की प्रेमपूर्ण बातों और अहिंसक व्यवहार ने अंगुलिमाल का हृदय बदल दिया। उसने हिंसा छोड़ दी और बुद्ध का शिष्य बन गया। यह कहानी सिखाती है कि प्रेम और अहिंसा से सबसे क्रूर व्यक्ति को भी सुधारा जा सकता है।
कहानी के मुख्य बिंदु
1. महात्मा बुद्ध का श्रावस्ती आगमन:
- महात्मा बुद्ध मगध की राजधानी राजगृह से कोसल की राजधानी श्रावस्ती पहुँचे। उस समय श्रावस्ती वर्तमान अयोध्या के आसपास का क्षेत्र था।
- श्रावस्ती का राजा प्रसेनजित बुद्ध का शिष्य था।
2.राजा की चिंता:
- राजा प्रसेनजित अंगुलिमाल डाकू के अत्याचारों से चिंतित थे, क्योंकि वह प्रजा को त्रस्त कर रहा था।
- बुद्ध ने राजा को धीरज बंधाया और उनकी चिंता दूर करने का वादा किया।
3.अंगुलिमाल की क्रूरता:
- अंगुलिमाल एक भयंकर डाकू था, जिसने हजार लोगों की हत्या करने की प्रतिज्ञा की थी।
- वह प्रत्येक हत्या के बाद मृतक की एक अंगुली काटकर माला बनाता था, इसलिए उसका नाम ‘अंगुलिमाल’ पड़ा।
- उसका नाम सुनकर लोग काँपते थे, और उसकी क्रूरता की कहानियाँ दूर-दूर तक फैली थीं।
4.बुद्ध का जंगल में प्रवेश:
- बुद्ध अंगुलिमाल से मिलने जंगल की ओर गए। वहाँ पहरेदार ने उन्हें रोककर चेतावनी दी, लेकिन बुद्ध ने बिना डरे आगे बढ़ने का फैसला किया।
- जंगल में चलते समय बुद्ध सोच रहे थे कि लोग एक-दूसरे को मारते क्यों हैं और जीव-जंतु एक-दूसरे को देखकर प्रसन्न क्यों नहीं होते।
5.बुद्ध और अंगुलिमाल का मिलन:
- जंगल में अंगुलिमाल ने बुद्ध को “ठहर जा” कहकर रोका। बुद्ध रुक गए और प्रेमपूर्वक बोले, “मैं तो ठहर गया, भला तू कब ठहरेगा?”
- अंगुलिमाल बुद्ध की नन्हें और प्रेमपूर्ण बातों से चकित हुआ। उसने पहली बार किसी को बिना डरे आँखों में आँखें डालकर बात करते देखा।
- बुद्ध ने कहा कि जीवन में पहले से ही बहुत दुख हैं, फिर क्रूरता क्यों बढ़ाना? उन्होंने अंगुलिमाल को शांति, दया और प्रेम का उपदेश दिया।
6.अंगुलिमाल का हृदय परिवर्तन:
- बुद्ध की बातों ने अंगुलिमाल के मन का अंधकार दूर किया। वह उनके चरणों में गिर पड़ा और राह दिखाने की प्रार्थना की।
- उसने अंगुलियों की माला तोड़ दी, कटार फेंक दी और हिंसा का जीवन त्यागकर बुद्ध का शिष्य बन गया।
कहानी का संदेश
- अहिंसा सबसे बड़ी शक्ति है, जो क्रूर से क्रूर व्यक्ति का हृदय भी बदल सकती है।
- प्रेम और दया से दूसरों को सुधारा जा सकता है।
- हिंसा से केवल दुख बढ़ता है, जबकि अहिंसा शांति और समृद्धि लाती है।
Leave a Reply