परिचय
- सरदार वल्लभ भाई पटेल विश्व के प्रमुख राष्ट्र-निर्माताओं में से एक हैं।
- उन्हें लौह पुरुष कहा जाता है क्योंकि वे वीर, निर्भय, दृढ़ निश्चयी, परिश्रमी और लगनशील थे।
- उनका व्यक्तित्व असाधारण था, जिसमें बुद्धिमत्ता, प्रशासनिक क्षमता और मुश्किल परिस्थितियों में सफलता पाने की कला थी।
जन्म और प्रारंभिक जीवन
- जन्म: 31 अक्टूबर 1875, नाडियाड, गुजरात।
- माता-पिता: पिता – जवेर भाई, माता – लाडबाई।
- शिक्षा: 1897 में नाडियाड हाईस्कूल से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की।
बचपन की विशेष घटना
- एक बार खेत में पिता के साथ काम करते समय उनके पैर में डाब नामक घास का कांटा चुभ गया।
- वे पहाड़े याद करने में इतने तल्लीन थे कि उन्हें कांटे का दर्द महसूस नहीं हुआ।
- पिता ने उनकी दृढ़ता की प्रशंसा की और कांटे को निकालकर काड वृक्ष की पत्तियों से खून रोक दिया।
व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन
- व्यक्तिगत जीवन: सहृदयी और सच्चे मित्र, मुश्किल समय में दोस्तों की मदद के लिए हमेशा तैयार।
- सार्वजनिक जीवन: लौह पुरुष की तरह कठोर, लेकिन हृदय नारियल की तरह कोमल।
- वे किसी भी विषय को तुरंत समझकर उस पर तुरंत कार्रवाई करते थे।
- वे हमेशा सजग, सक्रिय और ऊर्जावान रहते थे।
- उनका ध्यान हमेशा राष्ट्र की समस्याओं और उनके समाधान पर रहता था।
स्वतंत्रता संग्राम में योगदान
- सत्याग्रह आंदोलन और बारडोली किसान आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका।
- बारडोली में किसानों को संगठित कर लगान माफ करवाया, जिसके बाद उन्हें सरदार की उपाधि मिली।
मानवीय गुण
1. हाजिर-जवाबी और विनोदप्रियता: उनके पास हास्य और मजाक का असीम भंडार था।
2.दयालुता: सहायकों और अनुयायियों की गलतियों पर भी दया करते थे और उनकी देखभाल करते थे।
3.विश्वास: एक बार जिस पर भरोसा करते, उस पर कभी संदेह नहीं करते थे। “विश्वास से विश्वास उत्पन्न होता है” – यही उनके संबंधों का आधार था।
4.कम बोलना: वे कम बोलते थे, लेकिन जब बोलते थे तो महत्वपूर्ण कार्य की घोषणा करते थे, जो युद्ध-घोष की तरह होती थी।
5.चिंतन-मनन: किसी भी विषय पर सहमति देने से पहले गहराई से सोचते थे।
राष्ट्र निर्माण में योगदान
- गृहमंत्री के रूप में: स्वतंत्रता के बाद भारत के पहले गृहमंत्री बने।
- देशी रियासतों का एकीकरण: अंग्रेजों ने 500 से अधिक रियासतों को स्वतंत्र छोड़ दिया था। सरदार पटेल ने अपनी राजनीतिक सूझबूझ से इनका एकीकरण कर भारत को एकजुट किया।
- वे शक्ति का उपयोग बिना लालच के करते थे और युद्ध कौशल में निपुण थे।
- विरोधियों की कमजोरियों का सावधानी से विश्लेषण कर उन्हें परास्त करते थे।
अंतिम दिन और विचार
- जीवन के अंतिम दिनों में अस्वस्थ होने के बावजूद वे काम करते रहे।
- उनकी इच्छा थी कि भारत स्वतंत्रता की रक्षा और उन्नति के लिए सक्षम बने।
- उनका मानना था कि स्वराज्य के लिए श्रम किया गया था, लेकिन सुराज (अच्छा शासन) के लिए और अधिक मेहनत की जरूरत है।
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