परिचय
- कविता गोपाल कृष्ण कौल द्वारा लिखित है।
- यह कविता प्रकृति और पर्यावरण के प्रति प्रेम और प्रेरणा की बात करती है।
- कविता हमें प्रकृति से सीखने और दूसरों के हित में त्याग करने का संदेश देती है।
कविता का सार
प्रकृति की शिक्षा: प्रकृति हमें हर दिन कुछ न कुछ सिखाती है, जैसे दूसरों के लिए जीना और त्याग करना।
1. सूरज, तारे, चाँद और बादल:
- सूरज रोशनी देता है, तारे शीतलता बरसाते हैं, चाँद अमृत बांटता है, और बादल वर्षा-जल देते हैं।
- हमें जुगनू की तरह थोड़ा-थोड़ा ही सही, अंधकार को दूर करना सीखना चाहिए।
2.पेड़ों का त्याग:
- पेड़ बिना अभिमान के बीज, फूल, फल और ठंडी छाया देते हैं।
- दधीचि ऋषि की तरह, जो अपनी हड्डियाँ तक दान कर देते थे, पेड़ अपनी काया न्योछावर करते हैं।
- हमें हर मौसम में पेड़ों की तरह निखरना सीखना चाहिए।
3.नदियाँ और पर्वत:
- गहरी नदियाँ, निर्झर और नाले निर्मल जल बहाते हैं।
- पर्वत इन जल स्रोतों के जनक (जन्म देने वाले) हैं।
- हमें त्यागी बनकर बूंद-बूंद झरने की तरह बहना सीखना चाहिए।
4.धरती का योगदान:
- धरती सबका पालन करती है, अन्न उगाती है और जीवन को महकाती है।
- वह प्राणवायु (ऑक्सीजन) देती है और उथल-पुथल सहकर भी जीवन को सुंदर बनाती है।
- हमें धरती की तरह चारों ओर जीवन बांटना सीखना चाहिए।
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