परिचय
- कविता शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ द्वारा लिखित है।
- यह कविता पक्षियों की स्वतंत्रता और प्रकृति के सौंदर्य को दर्शाती है।
- यह हमें सभी प्राणियों की स्वतंत्र रहने की इच्छा और प्रकृति से प्रेम का संदेश देती है।
- पाठ में स्त्रीलिंग और पुल्लिंग शब्दों का बोध भी कराया गया है।
कविता का सार
1. पक्षियों की स्वतंत्रता:
- पक्षी आकाश में स्वतंत्र उड़ने वाले हैं, वे पिंजरे में बंद होकर नहीं गा सकते।
- सोने की सलाखों से टकराने पर उनके पंख टूटने का डर रहता है।
2.प्राकृतिक भोजन और स्वतंत्रता:
- पक्षी बहता जल पीना चाहते हैं, न कि सोने की कटोरी की मैदा।
- कटुक निबोरी (कड़वा नीम) भी उन्हें सोने की कटोरी से बेहतर लगता है।
3.स्वप्न और इच्छाएँ:
- सोने की जंजीरों में बंधे पक्षी अपनी उड़ान और गति भूल जाते हैं।
- वे सपनों में पेड़ की टहनी पर झूलने की कल्पना करते हैं।
- उनकी इच्छा है कि नीले आकाश से होड़ करें या क्षितिज तक उड़ें।
4.आग्रह:
- पक्षी कहते हैं कि उन्हें घोंसला या टहनी न दो, लेकिन उनके पंखों की उड़ान में बाधा न डालो।
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