Solutions
1. वस्तुनिष्ठ प्रश्न
(क) सही जोड़ी बनाइए
| पंक्ति | सही विकल्प |
|---|---|
| रहीमन अब वे बिरछ कहँ | जूती खात कपाल |
| आपु तो कहि भीतर गई | समय चूक की हूक |
| चतुरन चित रहिमन लगी | ते ही साँचे मीत |
| विपति कसौटी जे कसे | जिनकी छाँह गंभीर |
उत्तर:
| पंक्ति | अर्थ / सही विकल्प |
|---|---|
| रहीमन अब वे बिरछ कहँ | जिनकी छाँह गंभीर |
| आपु तो कहि भीतर गई | जूती खात कपाल |
| चतुरन चित रहिमन लगी | समय चूक की हूक |
| विपति कसौटी जे कसे | ते ही साँचे मीत |
(ख) सही विकल्प चुनकर रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए-
(अ) …ऐसे वचन में रहिमन रिस की गाँस। (अमृत, विष)
(ब) चतुरन चित रहिमन लगी… समय चूक की हूक।(संपत्ति, समय चूक)
(स)पावस … देखि रहीम मन, कोइल साधे मौन। (पावस, ग्रीष्म)
(द) जल में उलटी नाव ज्यों, खैचत… गुन के जोर।(गुन, पाप)
उत्तर:
(अ) अमृत ऐसे वचन में रहिमन रिस की गाँस।
(ब) चतुरन चित रहिमन लगी समय चूकसमय चूक की हूक।
(स) पावस देखि रहीम मन, कोइल साधे मौन।
(द) जल में उलटी नाव ज्यों, खैचत गुन के जोर।
2. अति लघु उत्तरीय प्रश्न
(अ) कपूत की गति किसके समान होती है?
उत्तर: कपूत की गति दीप की तरह होती है।
(ब) रहीम के अनुसार अब कौन से वृक्ष दिखाई नहीं देते?
उत्तर: रहीम के अनुसार अब वे वृक्ष दिखाई नहीं देते जिनकी छाँह गंभीर होती थी।
(स) रहीम ने सबसे बड़ा लाभ किसे माना है?
उत्तर: रहीम ने समय को सबसे बड़ा लाभ माना है।
(द) दीनबंधु के समान कौन हो जाता है?
उत्तर: जो दीन को लखे, दीनबंधु के समान हो जाता है।
(ई) पावस आने पर कौन मौन साध लेता है?
उत्तर: पावस आने पर कोइल मौन साध लेती है।
3. लघु उत्तरीय प्रश्न
(अ) रहीम ‘रिस की गाँस’ के विषय में क्या कहते हैं?
उत्तर: रहीम कहते हैं कि रिस की गाँस अमृत जैसे वचनों में मिलती है, जैसे मिश्री में निरस बाँस की फाँस मिल जाती है, जो मीठे में कड़वाहट का अनुभव कराती है।
(ब) ‘जीभ के बावलेपन’ का क्या दुष्परिणाम होता है?
उत्तर: जीभ के बावलेपन का दुष्परिणाम यह होता है कि जो कुछ कह दिया जाता है, वह सरग-पाताल तक पहुँच जाता है और व्यक्ति को अपने ही कथनों के कारण जूती खाकर कपाल पर चोट सहनी पड़ती है।
(स) रहीम ने तन की तुलना नाव से क्यों की है?
उत्तर: रहीम ने तन की तुलना उलटी नाव से की है क्योंकि जैसे उलटी नाव को जल में गुन के जोर से खींचा जाता है, वैसे ही तन कर्म के वश में है और मन को उसी ओर लगाना चाहिए।
(द) कवि के अनुसार ‘सच्चा मीत’ कौन है?
उत्तर: कवि के अनुसार ‘सच्चा मीत’ वही है जो विपत्ति की कसौटी पर कसा जाए और सच्चाई से साथ निभाए, न कि संपत्ति में ही साथ दे।
4. निम्नलिखित दोहे के माध्यम से कवि क्या कहना चाहते हैं, स्पष्ट कीजिए
विपति भए धन ना रहे, रहे जो लाख करोर।
नभ तारे छिपि जात हैं, ज्यों रहीम भए भोर।
उत्तर:
कवि इस दोहे के माध्यम से कहना चाहते हैं कि विपत्ति के समय धन का कोई मूल्य नहीं रहता, चाहे वह लाख-करोड़ हो। जैसे भोर होने पर नभ के तारे छिप जाते हैं, वैसे ही विपत्ति में धन का महत्व समाप्त हो जाता है और सच्ची बातें सामने आती हैं।
भाषा की बात
1. बोलिए और लिखिए
मिसिरिहु, बिरछ, दीनबंधु, सेंहुड़, वक्ता
उत्तर:
इन शब्दों को बोलकर और लिखकर अभ्यास करें:
मिसिरिहु
बिरछ
दीनबंधु
सेंहुड़
वक्ता
2. निम्नलिखित शब्दों की शुद्ध वर्तनी खाली स्थान में लिखिए
| गलत रूप | सही रूप |
|---|---|
| विरछ, वृक्ष, विरक्छ | ………… |
| निरस, निरीस, नीरस | …………. |
| संपत्ति, संपनी, संपति | …………. |
| बाँस, वाँस, बासँ | ………….. |
उत्तर:
विरछ, वृक्ष, विरक्छ- वृक्ष
निरस, निरीस, नीरस- नीरस
संपत्ति, संपनी, संपति –संपत्ति
बाँस, वाँस, बासँ –बाँस
3. निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए
उपकार अपकार
अमृत ______
लाभ ______
सबल ______
अनुरक्ति ______
कपूत ______
उत्तर:
उपकार –अपकार
अमृत –विष
लाभ –हानि
सबल –निर्बल
अनुरक्ति –विरक्ति
कपूत –कुलीन
4. निम्नलिखित तत्सम एवं तद्भव शब्दों को पहचानकर जोड़ी बनाइए
अँधरो, दीप, स्वर्ग, जीभ, कुपुत्र, दुग्ध, दीया, अंधकार, कपूत, दूध, जिह्वा, सरग
उत्तर:
तत्सम: अंधकार, स्वर्ग, जिह्वा, दुग्ध, कुपुत्र
तद्भव: अँधरो, दीप, जीभ, दूध, दीया, कपूत, सरग
जोड़ी:
अंधकार – अँधरो
स्वर्ग – सरग
जिह्वा – जीभ
दुग्ध – दूध
कुपुत्र – कपूत
दीप – दीया
अब करने की बारी
1. रहीम की ही तरह तुलसी, कबीर, बिहारी आदि कवियों के नीति के दोहों का संकलन उत्तर पुस्तिका में कीजिए।
2.अपने विद्यालय की बालसभा में दोहों का सस्वर पाठ कीजिए।
3.नीति के दोहों से मिलने वाली सीख को ‘सूक्ति’ रूप में लिखकर अपनी कक्षा में लगाइए।
1. उत्तर: मैं अपनी उत्तर पुस्तिका में तुलसी का दोहा “जौ हरि भजहि जे मन माहीं, तौ हरि बिरंचि समानी” और कबीर का दोहा “कहत कबीर सुनो भाई साधू, करम न्यारा बानी” जैसे नीति के दोहों को लिखूँगा। बिहारी का दोहा “बिनु सत्संग विवेक न होई, राम नाम रस पियो” भी शामिल करूँगा, जो जीवन के सही मार्ग को दिखाते हैं।
2.मैं बालसभा में इन दोहों को सुंदर और स्पष्ट आवाज में पढ़ूँगा, ताकि सभी साथी उनकी शिक्षाओं को समझ सकें। मैं पहले दोहों का अर्थ भी थोड़ा-सा बताऊँगा, ताकि सबको उनका महत्व पता चले।
3.मैं कक्षा में यह सूक्ति लिखकर लगाऊँगा: “सत्संग से विवेक जागे, राम नाम से जीवन सुधरे।” दूसरी सूक्ति होगी: “हरि का भजन मन को शुद्ध करे, जीवन को ऊँचा उठाए।” इन सूक्तियों को रंग-बिरंगी कागज पर सजाकर दीवार पर चिपकाऊँगा।

Leave a Reply