3.1 भारत की भौगोलिक स्थिति एवं विस्तार
- भारत एक प्राचीन सभ्यता वाला देश है, जिसे आर्यावर्त, हिन्दुस्तान और इंडिया के नाम से भी जाना जाता है।
- यह विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है।
- आर्थिक और सैन्य शक्ति की दृष्टि से भारत का विश्व में विशेष स्थान है।
- अंतरराष्ट्रीय व्यापार की दृष्टि से भारत की स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भौगोलिक स्थिति:
- भारत उत्तरी गोलार्द्ध में, एशिया महाद्वीप के दक्षिणी भाग में स्थित है।
- दक्षिण में: हिन्द महासागर
- पूर्व में: बंगाल की खाड़ी
- पश्चिम में: अरब सागर
अक्षांश व देशांतर:
- अक्षांशीय विस्तार: 8°4′ उत्तरी अक्षांश से 37°6′ उत्तरी अक्षांश तक।
- देशांतरीय विस्तार: 68°7′ पूर्वी से 97°25′ पूर्वी देशांतर तक।
- कर्क रेखा (23°30′ N) भारत को लगभग दो बराबर भागों में बाँटती है।
- 82°30′ पूर्वी देशांतर भारत की मानक समय रेखा है, जिससे भारतीय मानक समय (IST) तय किया जाता है।
मुख्य बिंदु:
- सबसे पश्चिमी राज्य: गुजरात
- सबसे पूर्वी राज्य: अरुणाचल प्रदेश
- सबसे उत्तरी राज्य: जम्मू-कश्मीर
- सबसे दक्षिणी राज्य: तमिलनाडु
- भारत का सबसे दक्षिणी बिंदु: इंदिरा पॉइंट (अंडमान निकोबार द्वीप समूह में)
पड़ोसी देश:
भारत की सीमाएँ इन देशों से मिलती हैं -पाकिस्तान, अफगानिस्तान, चीन, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, म्यांमार, और दक्षिण में श्रीलंका (पाक जलडमरूमध्य द्वारा अलग)।
तटीय सीमाएँ:
- स्थल सीमा: 15,200 किमी
- कुल तटरेखा: लगभग 7,600 किमी
- पूर्वी तट: बंगाल की खाड़ी के किनारे (गंगा डेल्टा से कन्याकुमारी तक)
- पश्चिमी तट: अरब सागर के किनारे
- उत्तर में काठियावाड़ तट
- मध्य में कोंकण तट
- दक्षिण में मालाबार तट
3.2 भारत की प्रशासनिक इकाइयाँ
- क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का विश्व में सातवाँ स्थान है।
- भारत का कुल क्षेत्रफल: 32,87,263 वर्ग किलोमीटर।
- भारत में 29 राज्य और 7 केंद्रशासित प्रदेश हैं।
- राजधानी: नई दिल्ली
- सबसे बड़ा राज्य (क्षेत्रफल में): राजस्थान
- सबसे छोटा राज्य: गोवा
- सबसे बड़ा केंद्रशासित प्रदेश: अंडमान निकोबार द्वीप समूह
- सबसे छोटा केंद्रशासित प्रदेश: लक्षद्वीप
- पांडिचेरी एकमात्र केंद्रशासित प्रदेश है जिसके कुछ भाग पूर्वी और पश्चिमी दोनों तटों पर हैं।
- उत्तर-पूर्व के सात राज्यों को “सात बहनें” कहा जाता है।
- भारत में कुल जिलों की संख्या: 640
- गाँवों की कुल संख्या: लगभग 6,40,930 (बसे और निर्जन दोनों सहित)
3.3 भारत के भौतिक विभाग
भारत की भौगोलिक बनावट विविध है -पर्वत, पठार, मैदान, मरुस्थल और द्वीप सभी प्रकार की स्थलाकृतियाँ यहाँ मिलती हैं।
भारत को पाँच भौतिक विभागों में बाँटा गया है:
- उत्तरी पर्वतीय प्रदेश
- उत्तर का विशाल मैदान
- प्रायद्वीपीय पठार
- तटीय प्रदेश
- द्वीप समूह
1. उत्तरी पर्वतीय प्रदेश
- भारत की उत्तरी सीमा पर हिमालय पर्वत श्रृंखला स्थित है।
- यह विश्व की सबसे ऊँची और नवीन वलित पर्वत श्रृंखला है।
- विस्तार: सिंधु नदी से ब्रह्मपुत्र नदी तक लगभग 2400 किमी।
- चौड़ाई: कश्मीर में 400 किमी, अरुणाचल प्रदेश में 150 किमी।
हिमालय के तीन मुख्य भाग:
(i) महान या आंतरिक हिमालय (हिमाद्रि)
- सबसे उत्तरी भाग।
- औसत ऊँचाई: लगभग 6000 मीटर।
- ग्रेनाइट शैलों से बना और सदैव बर्फ से ढका रहता है।
- प्रमुख शिखर –
- माउंट एवरेस्ट (8848 मी.)
- कंचनजंघा (8598 मी.)
- नंदा देवी, नंगा पर्वत, नामचा बरवा आदि।
(ii) मध्य हिमालय (हिमाचल)
- ऊँचाई: 3700 – 4500 मीटर, चौड़ाई लगभग 50 किमी।
- मुख्य शृंखलाएँ – पीर पंजाल, धौलाधर, महाभारत।
- यहाँ प्रसिद्ध घाटियाँ हैं – कश्मीर, कांगड़ा, कुल्लू।
- प्रसिद्ध नगर – शिमला, मसूरी, नैनीताल, दार्जिलिंग।
(iii) शिवालिक श्रेणी
- सबसे दक्षिणी श्रेणी, ऊँचाई 900-1100 मीटर।
- चौड़ाई 10 से 50 किमी।
- अवसादी शैलों से बनी।
- नदियों द्वारा लाई गई मिट्टी से बनी घाटियाँ – इन्हें दून कहते हैं (देहरादून, कोथरीदून)।
प्रादेशिक विभाजन:
- पंजाब हिमालय – सिंधु से सतलुज तक
- कुमायूं हिमालय – सतलुज से काली नदी तक
- नेपाल हिमालय – काली से तिस्ता तक
- असम हिमालय – तिस्ता से ब्रह्मपुत्र तक
प्रमुख दर्रे:
काराकोरम (जम्मू-कश्मीर), शिपकी ला (हिमाचल), नाथुला (सिक्किम), बोमडिला (अरुणाचल)।
महत्व:
- हिमालय ठंडी हवाओं से रक्षा करता है।
- यहाँ नदियों, वनों, औषधियों, जल विद्युत और पर्यटन की दृष्टि से बहुत महत्व है।
2. उत्तर का विशाल मैदान
- यह मैदान सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र नदियों और उनकी सहायक नदियों के जलोढ़ निक्षेपों से बना है।
- लंबाई: लगभग 3200 किमी, चौड़ाई: 150-300 किमी।
- यह सपाट, उपजाऊ और घनी आबादी वाला क्षेत्र है।
इस मैदान के तीन भाग:
- पश्चिमी मैदान: पंजाब, हरियाणा, राजस्थान तक फैला।
- मरुस्थलीय भाग को थार मरुस्थल कहा जाता है।
- प्रमुख नदी – लूनी।
- मध्यवर्ती मैदान: यमुना से बांग्लादेश तक; इसे गंगा का मैदान कहते हैं।
- खादर भूमि: नई जलोढ़ मिट्टी, बाढ़ से प्रभावित।
- बांगर भूमि: पुरानी जलोढ़ मिट्टी, ऊँचा भाग।
- पूर्वी मैदान: ब्रह्मपुत्र घाटी, 650 किमी लंबा।
महत्व:
- यह मैदान अत्यंत उपजाऊ, कृषि के लिए अनुकूल, जनसंख्या-सघन क्षेत्र है।
- यहाँ नहरें, सड़कें और रेलें विकसित हैं।
- यह क्षेत्र भारत की सभ्यता की जन्मभूमि है।
3. प्रायद्वीपीय पठार
- यह भारत का सबसे पुराना भू-भाग है – गोंडवाना लैण्ड का भाग।
- औसत ऊँचाई: 600-900 मीटर।
- तीन ओर से समुद्र और एक ओर से स्थल से घिरा – इसलिए इसे “प्रायद्वीपीय पठार” कहा जाता है।
- यह दो भागों में विभाजित है –
- मध्यवर्ती उच्चभूमि
- दक्कन का पठार
(i) मध्यवर्ती उच्चभूमि:
- उत्तरी भाग, आग्नेय शैलों से बना।
- उत्तर-पश्चिम में अरावली पर्वतमाला, दक्षिण सीमा विंध्याचल व कैमूर पर्वत।
- यहाँ मालवा का पठार, बुंदेलखंड, बघेलखंड, छोटा नागपुर का पठार स्थित हैं।
- प्रमुख नदियाँ – नर्मदा, सोन, बेतवा, चंबल, दामोदर।
- यह क्षेत्र खनिजों से समृद्ध है (कोयला, लोहा, हीरा, चूना पत्थर)।
(ii) दक्कन का पठार:
- सतपुड़ा से कन्याकुमारी तक फैला हुआ।
- पश्चिमी सीमा – पश्चिमी घाट (सह्याद्रि), पूर्वी सीमा – पूर्वी घाट।
- प्रमुख पहाड़ियाँ – नीलगिरि, अन्नामलाई, कार्डामम (इलायची), पालनी।
- सर्वोच्च शिखर – अनाईमुदी (2695 मीटर)।
- खनिजों और जल विद्युत उत्पादन में समृद्ध।
- प्रमुख फसलें – कपास, चाय, कॉफी, मसाले।
4. तटीय प्रदेश
भारत का तट दो भागों में विभाजित है –
(i) पश्चिमी तटीय मैदान:
- अरब सागर के किनारे गुजरात से केरल तक फैला।
- उत्तर भाग – कोंकण तट, दक्षिण भाग – मालाबार तट।
- संकरा क्षेत्र (चौड़ाई लगभग 40 किमी)।
- प्रमुख नदियाँ – नर्मदा, ताप्ती।
- डेल्टा नहीं बनते।
(ii) पूर्वी तटीय मैदान:
- बंगाल की खाड़ी के किनारे स्थित।
- महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी के डेल्टा यहाँ बनते हैं।
- उपजाऊ भूमि, कृषि के लिए उपयुक्त।
- प्रमुख झीलें – चिल्का, कोलेरू, पुलीकट।
- उत्तरी भाग – उत्तरी सरकार तट, दक्षिणी भाग – कोरोमंडल तट।
5. द्वीप समूह
(i) लक्षद्वीप द्वीप समूह:
- अरब सागर में, केरल तट से दूर स्थित।
- प्रवाल (मूंगे) के निक्षेपों से बने – एटॉल कहलाते हैं।
- छोटे-छोटे द्वीपों का समूह।
(ii) अंडमान व निकोबार द्वीप समूह:
- बंगाल की खाड़ी में स्थित।
- लगभग 300 द्वीप, क्षेत्रफल 8249 वर्ग किमी।
- कुछ द्वीप ज्वालामुखीय क्रियाओं से बने।
- भारत का सबसे दक्षिणी बिंदु “इंदिरा पॉइंट” यहीं स्थित है।
- सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण।

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