1. प्राकृतिक वनस्पति से आशय
- मानव के बिना हस्तक्षेप के प्राकृतिक रूप से उगने वाले पेड़-पौधों को प्राकृतिक वनस्पति कहते हैं।
- भारत विश्व के 12 प्रमुख जैव विविधता वाले देशों में से एक है – यहाँ लगभग 47,000 प्रकार के पेड़-पौधे पाए जाते हैं।
- कुल क्षेत्रफल का 20.55% भाग वन क्षेत्र है (2003 के अनुसार)।
- देशज पौधे – जो भारत में मूल रूप से पाए जाते हैं।
- विदेशज पौधे – जो बाहर से आए हैं जैसे लेण्टाना और जलकुंभी, जो अब समस्या बन चुके हैं।
2. वनस्पति को प्रभावित करने वाले तत्व
वनस्पति पर भौगोलिक तत्वों का गहरा प्रभाव पड़ता है:
(क) धरातल
- भूमि का ऊँच-नीच और मिट्टी का प्रकार वनस्पति को प्रभावित करता है।
- समतल भूमि पर कृषि, पठारों पर पर्णपाती वन, और पर्वतीय भागों पर शंकुधारी वन पाए जाते हैं।
- डेल्टाई क्षेत्र – मैंग्रोव वन।
(ख) जलवायु
- तापमान: अधिक तापमान व आर्द्रता वाले क्षेत्रों में सघन वन।
- सूर्य का प्रकाश: दक्षिणी ढलानों पर घनी वनस्पति।
- वर्षा: अधिक वर्षा में घने वन, कम वर्षा में झाड़ियाँ व घास।
3. भारत के वनों के प्रकार एवं वन्य जीव वितरण
(क) प्रशासनिक आधार पर तीन प्रकार:
- आरक्षित वन – स्थायी रूप से सुरक्षित, चराई या खेती की अनुमति नहीं।
- संरक्षित वन – सीमित चराई व कृषि की अनुमति।
- अवर्गीकृत वन – न तो आरक्षित, न ही संरक्षित।
(ख) प्राकृतिक आधार पर पाँच प्रकार:
उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन
- वर्षा: 300 सेमी. से अधिक
- स्थान: पश्चिमी घाट (केरल, कर्नाटक), पूर्वोत्तर भारत
- मुख्य वृक्ष: रबर, महोगनी, बांस, ताड़
- वन्य जीव: हाथी, बंदर, गैंडा, हिरण, पक्षी
उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन (पतझड़/मानसूनी वन)
- वर्षा: 100-200 सेमी.
- स्थान: झारखंड, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, पश्चिमी घाट के ढाल
- मुख्य वृक्ष: साल, सागौन, शीशम, खैर
- वन्य जीव: शेर, बाइसन, नीलगाय, सुअर, हाथी
पर्वतीय वन
- स्थान: हिमालय एवं प्रायद्वीपीय पहाड़ियाँ
- हिमालय में:
- 1000-2000 मीटर: ओक, चीड़
- 2000-3000 मीटर: देवदार, फर
- 3000 मीटर से ऊपर: अल्पाइन घास
- वन्य जीव: हिम तेंदुआ, याक, बारहसिंघा, लाल पांडा
मैंग्रोव या ज्वारीय वन
- स्थान: गंगा-ब्रह्मपुत्र, गोदावरी, कावेरी डेल्टा
- मुख्य वृक्ष: सुंदरी, नारियल, ताड़
- वन्य जीव: रॉयल बंगाल टाइगर, मगर, घड़ियाल
कंटीले वन
- स्थान: राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश
- वर्षा: 70 सेमी. से कम
- मुख्य पौधे: बबूल, खजूर, नागफनी
- वन्य जीव: ऊँट, लोमड़ी, जंगली गधा, शेर
4. औषधीय वनस्पतियाँ
भारत औषधीय पौधों का केंद्र रहा है।मुख्य औषधीय पौधे व उपयोग:
| पौधा | उपयोग |
|---|---|
| सर्पगंधा | रक्तचाप के इलाज में |
| तुलसी | सर्दी-खांसी में |
| नीम | जीवाणु प्रतिरोधी |
| जामुन | पाचन व मधुमेह में |
| बबूल | फोड़े व शक्ति वृद्धि हेतु |
| कचनार | दमा व फोड़े में उपयोगी |
| अर्जुन | हृदय रोग व कान दर्द में लाभकारी |
5. वनों का महत्व
प्रत्यक्ष लाभ
- इमारती लकड़ी, ईंधन, चारा, फल, पत्ते, औषधियाँ
- लघु उद्योगों के लिए कच्चा माल
अप्रत्यक्ष लाभ
- जलवायु संतुलन
- मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि
- बाढ़ नियंत्रण
- वन्य जीवों के आवास
- सौंदर्य और पर्यटन का स्रोत
6. वन संरक्षण के उपाय
- राष्ट्रीय वन नीति (1980) के अनुसार पर्यावरणीय स्थिरता बनाए रखना।
- वन संरक्षण अधिनियम 1980 लागू।
- सामाजिक एवं कृषि वानिकी को बढ़ावा।
- वृक्षारोपण और पुनःरोपण।
- वनों की वैज्ञानिक कटाई।
- वनों को आग व कीटों से बचाना।
- झूम खेती पर नियंत्रण।
- चिपको आंदोलन, वन महोत्सव जैसी पहलें।
7. वन्य जीव संरक्षण
- भारत में विश्व की लगभग 6.5% वन्य जीव प्रजातियाँ हैं।
- प्रमुख जीव: बाघ, शेर, हाथी, गैंडा, मगर, कछुआ, तेंदुआ, हिरण।
- शिकार और वनों के विनाश से कई प्रजातियाँ विलुप्ति के कगार पर हैं।
संरक्षण के प्रमुख उपाय:
- वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972
- प्रोजेक्ट टाइगर (1973)
- मगर प्रजनन योजना (1975)
- हाथी परियोजना
- सिंह संरक्षण (गिर क्षेत्र)
- केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण
- 14 जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र – जैसे नंदा देवी, सुन्दरवन, नीलगिरि आदि।
8. मध्यप्रदेश में वन्य जीव, राष्ट्रीय उद्यान व अभ्यारण्य
- राज्य का लगभग 30% क्षेत्र वनों से आच्छादित है।
- प्रमुख जीव: बाघ, चीतल, सांभर, तेन्दुआ, नीलगाय, भालू, मगर, सोनचिड़िया आदि।
राष्ट्रीय उद्यान (मुख्य):
| क्रम | नाम | जिला | क्षेत्रफल (वर्ग किमी) | मुख्य प्राणी |
|---|---|---|---|---|
| 1 | कान्हा | मण्डला | 940 | बाघ, सांभर |
| 2 | बांधवगढ़ | उमरिया | 437 | बाघ, चीतल |
| 3 | माधव | शिवपुरी | 375 | तेन्दुआ |
| 4 | पन्ना | पन्ना | 543 | बाघ |
| 5 | सतपुड़ा | होशंगाबाद | 585 | बाघ, गौर |
| 6 | पेंच | सिवनी | 293 | बाघ |
| 7 | संजय | सीधी | 467 | बाघ |
| 8 | वन विहार | भोपाल | 4.45 | सभी वन्य प्राणी |
| 9 | जीवाश्म | मण्डला | 0.27 | जीवाश्म क्षेत्र |

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